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हिम्मत और मेहनत

हिम्मत और मेहनत

समाज की कठोर वास्तविकता, जहां हमेशा महिलाओं को दोष दिया जाता है, इस 1987 में आई बॉलीवुड फिल्म में इस बात को ही चित्रित किया गया है. ज्योति एक नर्स होती है जो अमीर व्यापारी मदन की देखभाल करती है. मदन मृत्युशैय्या पर है. ज्योति अपने मृदुल स्वभाव के कारण मदन का दिल जीत लेती है. व्यापारी, घर की हर जिम्मेदारी उस पर छोड़ देता है. मदन का इकलौता बेटा विजय विदेश से घर लौटता है, तो ज्योति उसकी सारी व्यवस्था का ख्याल रखती है. एक रात नशे में धूत विजय सभी सीमाओं को तोड़ते हुए ज्योति के साथ बलात्कार करता है. जब विजय को अपनी गलती का एहसास होता है तो वो ज्योति से शादी करने को तैयार हो जाता है, लेकिन उसके रिश्तेदार उसे ज्योति के खिलाफ भड़काते है और उससे ये झूठ बोलते है की ज्योति बेवफा है और उसका किसी राजा नाम के आदमी के साथ प्रेम संबंध चल रहा है. ज्योति विजय और मदन के अविश्वास को मिटाने में सक्षम नहीं हो पाती है और अपने बेटे के साथ घर छोड़ कर चली जाती है. वर्षों की कठिनाई के बाद विजय और मदन को ये अहसास होता है की ज्योति उनके रिश्तेदारों की बुरी योजनाओं का शिकार हो गई थी और वो उसको वापस घर लेकर आते है.

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