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पद्मावत: SC के आदेश के बाद बैन लगाने वाले राज्य उठा सकते हैं ये कदम

संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत को 4 राज्यों की सरकार ने बैन किया है. ये हैं मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और हरियाणा. लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस बैन पर रोक लगाई गई है. अब राज्य इस फैसले की समीक्षा करने में जुटे हैं. ये लड़ाई सुप्रीम कोर्ट बनाम राज्य सरकार हो गई है. ऐसे में एक्सपर्ट से जानते हैं कि राज्य कौन सा कदम उठाकर पद्मावत की रिलीज रोक सकते हैं.

पद्मावत पद्मावत

संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत को 4 राज्यों की सरकार ने बैन किया है. ये हैं मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और हरियाणा. लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस बैन पर रोक लगाई गई है. अब राज्य इस फैसले की समीक्षा करने में जुटे हैं. ये लड़ाई सुप्रीम कोर्ट बनाम राज्य सरकार हो गई है. ऐसे में एक्सपर्ट से जानते हैं कि राज्य कौन सा कदम उठाकर पद्मावत की रिलीज रोक सकते हैं.

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और संवैधानिक मामलों के जानकार विराग गुप्ता के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सेंसर बोर्ड के द्वारा एक बार फिल्म पास किए जाने के बाद किसी को भी इसमें कमी निकालने का कोई अधिकार नहीं है. राज्यों को कहा गया है कि वे फिल्म रिलीज के लिए सुरक्षा दें. इसमें अभिव्यक्त‍ि की स्वतंत्रता का हवाला दिया गया है. राज्य सरकारों अब फिल्म की रिलीज रोकने के लिए कोर्ट को यह कह सकती हैं कि यदि हिंसा की स्थ‍िति राज्य में बनी तो कौन जिम्मेदार होगा? ऐसी स्थ‍िति में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य के पास अधिकार है कि वह फिल्म पर बैन लगा दे. इसके अलावा राज्य इंटेलीजेंस इन पुट के आधार पर हिंसा की आंशका जता सकते हैं. इस सबके बीच राज्य सरकार और सुप्रीम कोर्ट आमने सामने हो गए हैं. पूरे मसले पर संवैधानिक संकट पैदा हो गया है.

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जारी है बयानबाजी का दौर

पद्मावत फिल्म पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद उग्र प्रदर्शन और बयानबाजी का दौर जारी है. गुजरात में भी राजस्थान की तरह ही फिल्म का जबरदस्त विरोध हो रहा है. अहमदाबाद में महाकाल सेना के अध्यक्ष संजय सिंह राठौर ने आज तक से कहा, 'डेढ़ साल से आंदोलन चल रहा है. किसी भी हालत पर ये फ़िल्म गुजरात में नहीं चलने देंगे. सरकार, फ़िल्म प्रोड्यूसर के बीच लुका-छिपी का खेल चल रहा है'

संजय सिंह ने धमकी दी, 'अगर बीजेपी सरकार ने फ़िल्म दिखाने का प्रयास किया तो 2019 में इसका जवाब दिया जाएगा. लॉ एंड ऑर्डर की एसी की तैसी. कोई क़ानून नहीं चलता है.'

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर संजय सिंह ने सवाल उठाया, 'ख़िलजी को चित्तौड़ जीतने में 6 महीने लगे थे. 6 दिन में सुप्रीम कोर्ट कैसे अपना फैसला सुना सकता है.' कहा, मैं गुजरात सरकार के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री से विनती करता हूं लुका-छिपी के खेल से हमें हथियार पकड़ने कि लिए मजबूर न करें.

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शिवराज सिंह चौहान ने क्या कहा ?

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा वो पद्मावत बैन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर मशविरा कर रहे हैं. शिवराज ने कहा, 'हमने अपने एडवोकेट जनरल को सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर की स्टडी करने को कहा है. मैंने इसे अभी तक नहीं देखा है. हमारी अपनी चिंताएं हैं. अध्ययन के बाद हम सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी चिंताएं रखेंगे.'

इन राज्यों में भी बैन पर सस्पेंस

यूपी, गोवा, महाराष्ट्र और उत्तराखंड जैसे बीजेपी शासित अन्य राज्यों में भी फिल्म का प्रदर्शन रोके जाने की आशंका है. गोवा में पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए राज्य सरकार से सिफारिश की है. मुंबई पुलिस ने सिक्योरिटी रीजन्स की दुहाई दी है. यूपी और दूसरे राज्यों ने कुछ दिन पहले फिल्म के प्रदर्शन की बात की थी. उन्होंने अभी प्रदर्शन को लेकर कुछ साफ़ नहीं किया है.

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किस वजह से फिल्म को लेकर जारी है विवाद

रानी पद्मिनी के विवादित चित्रांकन का आरोप है. करणी सेना ने कहा कि फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ की गई है. अलाउद्दीन खिलजी और रानी पद्मिनी के बीच ड्रीम सीक्वेंस है. घूमर गाने पर भी रजवाड़ों ने विरोध जताया. हालांकि निर्माताओं ने तमाम बिंदुओं पर सफाई दी है. सेंसर ने भी इसे लेकर पांच अहम बदलाव सुझाए थे जिसे निर्माताओं ने पूरा कर दिया है.

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