हमारे टीवी और फिल्में अक्सर अतिरेक परोसते हैं. वो एक ऐसी दुनिया रचते हैं, जहां ईमानदार, ईमानदारी के लिए जान गंवा देने की हद तक खुशी-खुशी चला जाता है. जो भ्रष्ट और अपराधी हैं, वे मांस खाते और शराब पीते है. साथ ही वेब सीरीज के इस जमाने में बोलते कम और गालियां ज्यादा देते है. लेकिन 'पाउडर’एक ऐसी वेब सीरीज है जो अपने हर किरदार को उसकी कमजोरियों और काबलियतों के साथ अपने दर्शकों का मनोरंजन करती है .
इस सीरीज के अपराधी, अपराध करते हैं, क्योंकि इससे उनके परिवार का दाना-पानी चलता है लेकिन वो बात, बात पर गाली नहीं देते. शराब नहीं पीते. वो ड्रग्स का धंधा तो करते हैं. बाहरी दुनिया के लिए सख्त हैं लेकिन जब बात खुद की या परिवार की आती है तो एक आम आदमी की तरह ही कमजोर पड़ते हैं.
ड्रग कारोबारी को रोकने के लिए तीन सरकारी संस्थाएं दिन-रात काम कर रही हैं. वो इस माफिया को पकड़ना चाहती हैं. इसका धंधा चौपट करना चाहती हैं. उसे तबाह करना चाहती हैं, लेकिन ठीक इसी वक्त में अपने आपसी खींचतान और एक-दूसरे को लेकर अपनी खुन्नस को भी सहलाते, पुचकारते रहते हैं. इतना ही क्यों? एक संस्था दूसरी से जानकारी शेयर नहीं करती. वो एक-दूसरे को नीचा दिखाने में लगे रहते हैं और दूसरे से पहले उस ड्रग माफिया को पकड़ना चाहते हैं ताकि उनकी संस्था का नाम हो.
कहने का मतलब यह कि इस सीरीज में जो भी आपको दिखता है वो वास्तविक जीवन के सबसे करीब है और शायद यही वजह है कि आप इस सीरीज के सारे के सारे एपिसोड को देखने के लिए जल्दी घर लौटना चाहते हैं. देर रात तक देखते हैं और सुबह भागते हुए अपने काम पर पहुंचते हैं. ये बात मैं निजी अनुभव से कह रहा हूं.असल में 'पाउडर' एक टीवी धारावाहिक है जिसे आज से नौ साल पहले सोनी टीवी चैनल पर प्रसारित किया गया था, लेकिन खराब टीआरपी की वजह से बीच में ही बंद कर दिया गया था. पिछले साल यही टीवी धारावाहिक नेटफ्लिक्स पर आया है.
सीरीज के केंद्र में नावेद अंसारी नामक एक किरदार है जो मुंबई में ड्रग्स का धंधा करता है. वो ये काम इतनी खुबसूरती से करता है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसियां सब कुछ जानते-समझते हुए भी उसके खिलाफ सबूत नहीं जुटा पाती हैं. कहानी का दूसरा अहम किरदार है, उस्मान अलि मलिक. उस्मान नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के मुंबई ब्रांच का एक ऑफिसर है, जो नावेद को तब से जानता है जब वो एक मामूली गुंडा होता था. उसमान अलि मलिक अपनी टीम के साथ नावेद अंसारी की नाक में नकेल डालने की कोशिश करता है और यही कोशिश, इसकी दुश्वारियां दर्शकों के लिए एक रोमांचकारी सीरीज बनाती हैं. नावेद अंसारी के किरदार में अभिनेता पंकज त्रिपाठी हैं और वो इस शिद्दत से अपना किरदार निभाते हैं कि देखने वाले को यकीन हो जाता है कि ड्रग्स का काम करने वाला कोई भाई ऐसा ही लगता होगा, ऐसे ही व्यवहार करता होगा. उस्मान अली मलिक का किरदार मनीष चौधरी ने निभाया है और वो पूरे ऑफिसर लगते हैं. अतुल सभरवाल ने ये सीरीज लिखी है और इसका निर्देशन भी किया है.
वेब सीरीज के निर्माता, निर्देशक बार-बार ये कहते हैं कि इस माध्यम में कोई सेंसर नहीं है और इस वजह से वो वास्तविकता के ज्यादा करीब पहुंच पाते हैं. कुछ नया बना पाते हैं. नया दिखा पाते हैं. लेकिन दर्शकों को कई बार ऐसा भी महसूस होता है कि इस छूट की वजह से उन्हें बेवजह हिंसा, गालियां और सेक्स सीन झेलने पड़ते हैं. ये सीरीज इस मामले में दर्शकों के साथ खड़ी है जो यथार्थ दिखाते हुए उनका भरपूर मनोरंजन भी करती है. साथ ही निर्देशकों के उस दावे को खारिज भी करता है कि बिना सेंसर के ही कुछ नया और मनोरंजक बनाया जा सकता है.