ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स नेटफ्लिक्स और हॉटस्टार ने सरकारी सेंसरशिप के बढ़ते दबाव के चलते सेल्फ रेग्युलेशन गाइडलाइन्स बनाने का फैसला किया है. दरअसल, भारतीय सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टीफिकेशन के पास इंटरनेट के कंटेंट को सेंसर करने की ताकत नहीं है. कानून के मुताबिक, ये सर्टीफिकेशन सिर्फ फिल्मों की स्क्रीनिंग के लिए और थियेटर और टीवी पर ट्रेलर दिखाने के लिए चाहिए होता है. लेकिन अनुराग कश्यप और विक्रमादित्य मोटवानी की एक वेबसीरीज़ सैक्रेड गेम्स के बाद ऑनलाइन कटेंट को रेग्युलेट करने की मांग में तेजी आई है.
पिछले साल आई इस वेबसीरीज़ में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की बेइज्जती करने के आरोप लगे थे. कांग्रेस के एक कार्यकर्ता ने इस सीरीज़ को लेकर एफआईआर भी दर्ज कराई थी. हालांकि राहुल गांधी के ट्वीट के बाद ये एफआईआर वापस ले ली गई थी. वायलेंस और बोल्ड सीन्स पर भी आपत्ति जताई गई. इस दौरान ये खबरें भी आईं कि सरकार इन प्लेटफॉर्म्स के कंटेंट को सेंसर करने की तैयारी कर रहा है. यूं तो अभी ऐसा नहीं हुआ है, लेकिन अब भी सरकारी सेंसरशिप की चिंताएं बनी हुई है.
माना जा रहा है कि नेटफ्लिक्स और हॉटस्टार का सेल्फ रेग्युलेशन का कदम इसी बात को लेकर है.
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क्या है तैयारी ?
नेटफ्लिक्स और हॉटस्टार ने संभावित सरकारी सेंसरशिप को रोकने के लिए ही भारत में अपने कंटेंट के लिए सेल्फ-रेगुलेशन गाइडलाइन्स को अपनाने की योजना बनाई है. इसी को ध्यान में रखते हुए नेटफ्लिक्स, हॉटस्टार, टाइम्स इंटरनेट, इरोज़, ऑल्टबालाजी, जी, अरे, वूट और सोनी जैसी वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स ने एक कोड साइन किया है जिसका मतलब होगा ये प्लेटफॉर्म्स अपने वीडियो कंटेंट को सेल्फ-रेग्युलेट करेंगी.
ये प्लेटफॉर्म्स अपने ऐसे कंटेंट पर प्रतिबंध लगाएंगे जिसमें बच्चों को यौन गतिविधियों में लिप्त दिखाया गया हो या जिसमें भारत के ध्वज का अपमान किया गया हो, या किसी भी सीन में आतंकवाद को प्रमोट करने वाली चीज दिखाई गई हो. इस कोड को तैयार करने वाले इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष सुभो रे ने कहा है कि इस कोड को गुरुवार को सार्वजनिक किया जाएगा.
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वहीं, नेटफ्लिक्स को कड़ी टक्कर देने वाली ऑनलाइन स्ट्रीमिंग साइट अमेजॉन ने इस मामले में एकदम अलग रूख अपनाया है. अमेजॉन का कहना है कि जब तक सरकार की तरफ से ऐसा कोई अनिवार्य रेग्युलेशन नहीं आ जाता, तब तक वह इस कोड का पालन नहीं करेगी. अमेजॉन प्राइम वीडियो इस कोड पर साइन नहीं कर रहे हैं, क्योंकि उनके हिसाब से मौजूदा कानून पर्याप्त हैं.
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