
तेलुगू सिंगर और डबिंग आर्टिस्ट सुनीता उपद्रष्टा इन दिनों सोशल मीडिया पर भारी विवादों से घिर गई. हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान फेमिनिज्म (नारीवाद) और लैंगिक समानता (जेंडर इक्वालिटी) पर किए गए कमेंट की वजह से चौतरफा आलोचना झेलने के बाद अब सिंगर ने इस पूरे मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी है और सोशल मीडिया पर एक बयान जारी कर सफाई पेश की है.
सुनीता ने साफ शब्दों में कहा है कि इंटरव्यू में कही गई उनकी बातों को पूरी तरह तोड़-मरोड़कर और गलत संदर्भ में पेश किया गया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि वह हमेशा से महिलाओं की गरिमा, उनकी सुरक्षा और उनके समान अधिकारों की सबसे बड़ी समर्थक रही हैं और आगे भी रहेंगी.
आखिर क्या था वो विवादित बयान?
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब सुनीता एक इंटरव्यू में आधुनिक फेमिनिज़्म के तौर-तरीकों पर अपनी राय रख रही थीं. बातचीत के दौरान उन्होंने फेमिनिज्म की कुछ मौजूदा परिभाषाओं और व्याख्याओं पर खुलकर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि आज के दौर में कुछ ऐसी चीजों को जबरन महिला सशक्तिकरण के प्रतीक के रूप में पेश किया जा रहा है, जो असल में वैसी हैं नहीं.
इसी बातचीत के दौरान उनका एक छोटा सा हिस्सा (क्लिप) काटकर ऑनलाइन वायरल कर दिया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर महिलाएं 'मेरी बॉडी, मेरी मर्जी' (My Body, My Choice) की बात कहती हैं, तो पुरुष भी इसके जवाब में 'उसकी आंखें, उसकी मर्जी' (His Eyes, His Choice) कह सकते हैं. सुनीता की इसी एक लाइन पर सोशल मीडिया यूजर्स भड़क गए.
सिंगर चिन्मयी श्रीपदा का फूटा गुस्सा
सोशल मीडिया पर यह मामला तब और ज्यादा गंभीर हो गया जब इंडस्ट्री की जानी-मानी सिंगर चिन्मयी श्रीपदा ने सार्वजनिक रूप से सुनीता के इस बयान को चुनौती दे डाली. चिन्मयी के इस स्टैंड के बाद इंटरनेट पर यूजर्स दो धड़ों में बंट गए और दोनों सिंगर्स के फैंस के बीच एक बेहद तीखी बहस छिड़ गई, जिससे विवाद ने और तूल पकड़ लिया.

इंस्टाग्राम पर सुनीता का पलटवार
लगातार हो रही ट्रोलिंग और आलोचनाओं का जवाब देते हुए सुनीता ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर एक लंबा नोट शेयर किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इरादा कभी भी महिलाओं के साथ होने वाले गलत व्यवहार या पुरुषों की ओछी हरकतों का बचाव करना या उन्हें सही ठहराना बिल्कुल नहीं था. उन्होंने कहा कि उनका यह बयान दरअसल कुछ पुरुषों द्वारा महिलाओं को देखने के नजरिए से उपजी गहरी निराशा और चिंता के कारण था, इसलिए इसे पूरी बातचीत को समझे बिना नहीं देखा जाना चाहिए.
सुनीता ने लिखा, 'एक महिला होने के नाते, मैं महिलाओं के लिए समान अधिकार, समान अवसर, गरिमा और समाज में सम्मान की भावना पर दृढ़ता से विश्वास रखती हूं.' इसके साथ ही उन्होंने महिलाओं के खिलाफ होने वाले किसी भी तरह के शोषण, अन्याय या भेदभाव के प्रति अपनी 'जीरो टॉलरेंस' (बिल्कुल बर्दाश्त न करने) की नीति को एक बार फिर दोहराया.
स्मोकिंग आजादी का प्रतीक नहीं
इंटरव्यू में इस बहस की शुरुआत कैसे हुई, अगर इस पर गौर करें तो सुनीता ने फेमिनिज्म और बराबरी को लेकर अपनी एक अलग सोच रखी थी. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा था कि स्मोकिंग (धूम्रपान) जैसी लाइफस्टाइल की आदतों को तुरंत महिलाओं की आजादी या सशक्तिकरण के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए. उनके मुताबिक, असली समानता और आजादी तब मानी जाएगी जब समाज में महिलाओं की राय, उनकी काबिलियत, उनके काम और उनकी आवाज को पुरुषों के बिल्कुल बराबर सम्मान दिया जाएगा.