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'पेद्दी' की भोजपुरी स्टाइल हिंदी के पीछे है सक्सेस का ये फॉर्मूला, क्या राम चरण को मिलेगी कामयाबी?

राम चरण की फिल्म 'पेद्दी' का हिंदी ट्रेलर आते ही सोशल मीडिया पर लोग पूछने लगे— ये हिंदी फिल्म है या भोजपुरी? लेकिन इस भोजपुरी मिक्स डबिंग के पीछे मेकर्स का एक तगड़ा बिजनेस प्लान छिपा नजर आता है. साउथ फिल्मों की कामयाबी बताती है कि उत्तर भारत की मास ऑडियंस तक पहुंचने में ये फॉर्मूला कितना कारगर है.

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पेद्दी की भोजपुरी स्टाइल डबिंग के पीछे है ये वजह (Photo: ITGD)
पेद्दी की भोजपुरी स्टाइल डबिंग के पीछे है ये वजह (Photo: ITGD)

'ये हिंदी फिल्म है या भोजपुरी?' साउथ स्टार राम चरण की फिल्म 'पेद्दी' के ट्रेलर पर रिएक्ट करते हुए एक सोशल मीडिया यूजर का कुछ ऐसा रिएक्शन था. पेद्दी का ट्रेलर हाल ही में आया है, जो वैसे तो तेलुगु फिल्म है, लेकिन पैन-इंडिया फॉर्मूले के हिसाब से डबिंग के साथ हिंदी में भी आ रही है. इस फिल्म के हिंदी ट्रेलर में डबिंग ऐसी है कि सोशल मीडिया पर कई लोग इसे 'भोजपुरी फिल्म' कहते नजर आए. जैसे इसका एक डायलॉग है— 'खेलय हमरा घमंड है'.  

डबिंग के साथ-साथ इसकी एक वजह फिल्म की लीड एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर का किरदार भी है. ट्रेलर में उनके शरीर पर कैमरे का जितना फोकस है, उतना स्क्रिप्ट में उनके किरदार पर नहीं नजर आता. लेकिन क्या ये पेद्दी के मेकर्स की चूक है? नहीं, ये मेकर्स का एक सॉलिड प्लान लगता है. ये प्लान कामयाब हो या न हो, लेकिन इसके पीछे जो वजहें हैं, वो काफी मजबूत नजर आती हैं.

साउथ फिल्मों की भोजपुरी मिक्स डबिंग का कमाल
पेद्दी के मेकर्स ने उत्तर भारत की जनता को टारगेट करते हुए जो भोजपुरी मिक्स हिंदी डबिंग इस्तेमाल की है, उसका अपने आप में एक तगड़ा बिजनेस पहलू भी है. अगर आपने हिंदी टीवी चैनलों पर चलने वाली साउथ की डबिंग फिल्में फॉलो की हैं, तो आपको याद होगा कि ये भोजपुरी मिक्स हिंदी भाषा उन फिल्मों में बहुत कॉमन थी.

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दरअसल, साउथ से आई इन डबिंग फिल्मों का अपना एक बहुत बड़ा ऑडियंस बेस रहा है. उत्तर प्रदेश, बिहार समेत कई राज्यों में सिंगल स्क्रीन ऑडियंस को फिल्मों की भाषा में ये भोजपुरी मिक्स हिंदी टेक्सचर बहुत पसंद आता है.

2000 के दशक में बॉलीवुड जब शहरी कहानियों और अर्बन एस्थेटिक की फिल्मों की तरफ घूम गया, तो छोटे शहरों, कस्बों और गांवों की सिंगल स्क्रीन ऑडियंस के लिए फिल्मों में एक कनेक्शन मिसिंग हो गया.

ये वही ऑडियंस है जिसे सिनेमा की जुबान में 'मास' कहा जाता है. मारधाड़ और तगड़ी डायलॉगबाजी वाली मसाला फिल्मों की सप्लाई बॉलीवुड की तरफ से रुकी, तो इसकी भरपाई साउथ से हुई. उस दौर में मनीष शाह की गोल्डमाइन्स टेलीफिल्म्स ने मौके को भुनाया और साउथ की फिल्मों के हिंदी डबिंग राइट्स खरीदकर उन्हें डबिंग के साथ टीवी चैनलों को बेचना शुरू किया.

एक पुराने इंटरव्यू में मनीष शाह ने बताया था कि उन्होंने सबसे पहले तेलुगु फिल्म 'मास' (2004) के डबिंग राइट्स खरीदे थे. डबिंग करके 'मेरी जंग- वन मैन आर्मी' के नाम से उन्होंने इसे 7 लाख रुपये में टीवी चैनल को बेचा था. तब टीवी पर फिल्मों की टीआरपी रेटिंग 0.8 हुआ करती थी, लेकिन 'मेरी जंग' ने 1.2 की शानदार रेटिंग बटोरी थी.

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इस एक घटना ने हिंदी डबिंग वाली साउथ फिल्मों का एक पूरा बाजार खड़ा कर दिया, जो आज भी दमदार है. इस बाजार में अक्सर साउथ से आई रूरल अपील वाली फिल्मों को भोजपुरी मिक्स हिंदी में डब किया जाने लगा. टीवी पर आपने साउथ से आई फिल्मों को जब भोजपुरी स्टाइल डबिंग में देखा था, वो इसी का नतीजा था. इन फिल्मों का बाजार अब टीवी के साथ-साथ यूट्यूब गोल्डमाइन्स और कई दूसरे चैनलों के जरिए लोगों के हाथों तक पहुंच चुका है.

इस बाजार की मजबूती का अंदाजा इसी से लगा लीजिए कि यश की पैन-इंडिया ब्लॉकबस्टर KGF हिंदी में तो आई थी, मगर गोल्डमाइन्स के यूट्यूब चैनल पर इसका एक अलग भोजपुरी स्टाइल डब वर्जन भी है. यूट्यूब पर KGF के इस भोजपुरी मिक्स डब वर्जन पर 850 मिलियन से ज्यादा व्यूज हैं. इस एक फिल्म ने गोल्डमाइन्स के यूट्यूब चैनल को कितनी कमाई दी होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है.

पेद्दी का असली टारगेट कौन है?
पेद्दी, उत्तर भारत की इसी मास ऑडियंस को टारगेट करती नजर आती है. राम चरण की ये फिल्म शहरों के साथ-साथ छोटे शहरों, कस्बों और गांवों के थिएटर्स में पैठ बनाने के लिए भोजपुरी मिक्स हिंदी डबिंग के साथ आ रही है. क्योंकि बड़े शहरों के मल्टीप्लेक्स थिएटर्स से प्रति टिकट फिल्मों की कमाई भले ज्यादा होती हो, मगर मास ऑडियंस छोटे शहरों और सिंगल स्क्रीन थिएटर्स में लगातार फिल्म को भीड़ दिलाती है.

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इन थिएटर्स में टिकट भले मल्टीप्लेक्स से सस्ते होते हों, लेकिन सस्ता टिकट ज्यादा भीड़ लाकर तगड़ी कमाई करवा देता है. इस बात का सबूत मल्टीप्लेक्स में चलने वाला ब्लॉकबस्टर ट्यूस्डे ऑफर भी है. आजकल मल्टीप्लेक्स में मंगलवार को जब टिकटों के रेट 200 रुपये से कम होते हैं, तो फिल्मों की कमाई बढ़ जाती है.

पेद्दी की कहानी भी रूरल अपील वाली है. इसमें हर खेल का उस्ताद एक हीरो अपने गांव से निकलकर नेशनल लेवल पर पहचान बनाना चाहता है. मगर ट्रेलर में आप उसे दिल्ली में छोटे-छोटे काम करते भी देखते हैं.

ये अपील रूरल दर्शकों को खींचने वाली है और ऐसे में भोजपुरी मिक्स हिंदी डबिंग फिल्म को अच्छी ऑडियंस दिला सकती है. और अच्छी ऑडियंस का मतलब है तगड़ी कमाई. पेद्दी के मेकर्स ने दांव तो तगड़ा खेला है, अब देखना है कि ये दांव उन्हें कितनी कामयाबी दिलाता है.

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