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पिता की मौत, मां ने दूसरों के घर किया काम, विशाल जेठवा का दर्द- नॉर्मल नहीं था बचपन

विशाल जेठवा सफल एक्टर हैं. लेकिन इस पहचान को बनाने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की है. बचपन से उनका स्ट्रगल शुरू हो गया था. बेटे को अच्छी लाइफ देने उनकी मां ने हर संभव कोशिश की. विशाल का कहना है वो अपनी मां के हमेशा आभारी रहेंगे.

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मुश्किलों से भरा था विशाल जेठवा का बचपन (Photo: YouTube screenshot)
मुश्किलों से भरा था विशाल जेठवा का बचपन (Photo: YouTube screenshot)

फिल्म होमबाउंड की वजह से चर्चा में छाए विशाल जेठवा इंडस्ट्री में अपनी एक्टिंग का दमखम दिखा चुके हैं. इससे पहले उन्होंने मूवी मर्दानी 2 में कमाल दिखाया था. आज वो लग्जरी लाइफ जीते हैं. लेकिन उनके लिए ऐसी जिंदगी पाना बेहद स्ट्रगलिंग रहा है. उनका बचपन गरीबी में बीता था. कम उम्र में पिता का साया उनके ऊपर से उठ गया था. मां ने मेहनत मजदूरी कर बेटे को पाला. बेटे को अच्छी जिंदगी देने की हर संभव कोशिश की.

विशाल का छलका दर्द
विशाल ने हाल ही में 'ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे' संग बातचीत में बचपन के दिनों को याद किया. उन्होंने कहा, मैं लोअर मिडिल क्लास फैमिली से आता हूं. आप इसे गरीब परिवार भी कह सकते हैं. मैं इसे अपना सौभाग्य समझता हूं क्योंकि इससे मुझे बतौर एक्टर और इंसान के रूप में बढ़ने का मौका मिला. मैंने अपने पेरेंट्स की जिंदगी करीब से देखी है. मैंने अपने पिता को बहुत छोटी उम्र में खो दिया था. मैंने अपनी मां को अकेले मुझे बड़ा करते हुए देखा है. इस सफर में मेरी मां ने कई मुश्किल झेलीं. मैंने आर्थिक संकट देखा. मेरा बचपन बाकियों की तरह नॉर्मल नहीं था. लेकिन इसने मुझे एक्टर के रूप में मजबूत बनाया.

विशाल ने अपने बचपन और पढ़ाई के बारे में बताते हुए कहा- मैंने गुजराती मीडियम स्कूल में पढ़ाई की और मलाड में रहा. छठी क्लास के बाद हम मीरा रोड शिफ्ट हुए. फिर मैं कांदीवली के ठाकुर कॉलेज गया. नौवीं क्लास में 'सा रे गा मा पा लिल चैंप्स' में बैकग्राउंड डांसर बना. एक बार सलमान खान, अजय देवगन और असिन अपनी फिल्म 'लंदन ड्रीम्स' प्रमोट करने आए थे, मैं बतौर बैकग्राउंड डांसर नाचा था. लेकिन मुझे ये बात जल्दी ही मालूम पड़ गई कि मैं ये सब नहीं करना चाहता हूं.

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मां के दुखों पर बात करते हुए विशाल ने बताया कि वो उनके काफी करीब हैं. उनका मानना है आज वो जो भी हैं अपनी मां की वजह से हैं. एक्टर ने कहा- मेरी मां लोगों के घरों में काम करती थीं. उन्होंने मेरे लिए त्याग किए. अपनी कहानी शुरू करने से पहले मैं उनकी कुर्बानी के बारे में सोचता हूं. उनका बचपन चैलेंजिंग था. उनके मुकाबले मेरा बचपन बेहतर था, क्योंकि मेरे पेरेंट्स ने हमें कोई कमी महसूस नहीं होने दी थी. मां बचपन में घरों में झाड़ू-पोछा करती थीं. वो घर-घर जाकर साफ सफाई का काम करती थीं. जब मैं इसके बारे में सोचता हूं, तो एहसास होता है क्या सच में मेरी जिंदगी से शिकायत है?
 
विशाल ने इससे पहले भी कई इंटरव्यू में मां के स्ट्रगल पर बात की थी. उनकी मां लोगों के घरों में झाडू-पोछा लगाती थीं. फिर सुपरमार्केट में सैनिटरी पैड बेचती थीं, पिता नारियल पानी बेचते थे. आज विशाल की लाइफ बदल चुकी है. वो होमबाउंड को मिल रही तारीफों को एंजॉय कर रहे हैं. आउटसाइडर होने के नाते इंडस्ट्री में जो मुकाम उन्होंने पाया है वो काबिलेतारीफ है.

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