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भारत की इकलौती 'चालबाज' एक्ट्रेस जिन्होंने 27 की उम्र में जीता था BAFTA अवॉर्ड, लहराया परचम

1983 में रोहिणी हत्तांगड़ी ने फिल्म गांधी में बेहतरीन भूमिका निभाकर बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का BAFTA अवॉर्ड जीता था. उन्होंने भारतीय सिनेमा को विश्व मंच पर पहचान दिलाई और थिएटर से लेकर फिल्मों तक अपनी अलग पहचान बनाई.

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जब रोहिणी हत्तांगड़ी ने रचा इतिहास (Photo: ITG)
जब रोहिणी हत्तांगड़ी ने रचा इतिहास (Photo: ITG)

79वां BAFTA इस बार इसलिए खास है क्योंकि इस मंच पर आलिया भट्ट प्रेजेंटर के तौर पर नजर आएंगी. ब्रिटिश अवॉर्ड्स के इस प्रतिष्ठित मंच पर किसी भारतीय कलाकार की मौजूदगी अपने आप में गर्व का पल होती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह गौरव का क्षण भारत 1983 में ही हासिल कर चुका था?

जी हां, वो ऐतिहासिक पल दिग्गज अदाकारा रोहिणी हत्तांगड़ी की बदौलत आया था. उन्होंने न सिर्फ BAFTA के मंच पर भारत का नाम रोशन किया, बल्कि इतिहास रच दिया. रोहिणी हत्तांगड़ी भारत की पहली और अब तक की इकलौती एक्ट्रेस हैं, जिन्होंने BAFTA अवॉर्ड अपने नाम किया. वो जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं थी, बल्कि भारतीय सिनेमा के लिए दुनिया के मंच पर गूंजती एक बड़ी पहचान थी.

ये वही रोहिणी हैं जिन्होंने 1989 की फिल्म चालबाज में श्रीदेवी की चाची अंबा का किरदार निभाया था. वहीं मुन्ना भाई एमबीबीएस में संजय दत्त की मां के रोल में थीं.

जब रोहिणी ने रचा इतिहास...

रोहिणी को 1982 में फिल्म गांधी में कस्तूरबा गांधी की भूमिका निभाने के लिए ‘बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस’ का BAFTA अवॉर्ड मिला. इस फिल्म में उन्होंने महात्मा गांधी की पत्नी का किरदार इतनी संजीदगी से निभाया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी सराहना हुई. ये उपलब्धि उन्हें भारतीय सिनेमा में खास बनाती है. खास बात ये है कि, वो तब महज 27 साल की थीं. 

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रोहिणी ने बताया था कि उन्हें हॉलीवुड से खुद कॉल आया था. गांधी उनकी चौथी फिल्म थी. सर रिचर्ड ने उन्हें ऑडिशन के लिए कॉटन की साड़ी पहनकर बुलाया था. थोड़ी बातचीत हुई थी, इसके बाद ही उन्हें इंग्लैंड बुला लिया था. लेकिन रोहिणी की दिक्कत थी कि उनके पास पासपोर्ट नहीं था. लेकिन सब कुछ फिल्म के मेकर्स ने खुद मैनेज किया. उन्होंने रोहिणी के लिए टेम्परेरी पासपोर्ट बनवाया जो 6 महीने के लिए बनता है. 

रोहिणी ने तोड़े नियम, बनाई अपनी राह

रोहिणी हतांगड़ी का जन्म 11 अप्रैल 1955 को पुणे में हुआ. उनका झुकाव शुरू से ही एक्टिंग की ओर था. उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) से एक्टिंग की पढ़ाई की, जहां उनके बैचमेट अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और ओम पुरी जैसे दिग्गज कलाकार थे. थिएटर से अपने करियर की शुरुआत करने वाली रोहिणी ने कई मराठी और हिंदी नाटकों में काम किया.

रोहिणी के नाम सिर्फ बाफ्टा ही नहीं कई और अचीवमेंट्स भी हैं. थिएटर की मजबूत जमीन से निकलीं रोहिणी ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत मराठी स्टेज से की और देखते ही देखते रंगमंच की दुनिया में एक बड़ा नाम बन गईं. उन्होंने मराठी थिएटर ग्रुप ‘आविष्कार’ की स्थापना की, जिसके जरिए करीब 150 नाटकों को प्रोड्यूस किया. 

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रोहिणी सिर्फ एक अदाकारा नहीं, बल्कि परंपराओं को तोड़ने वाली कलाकार भी रहीं. वो पहली ऐसी महिला बनीं जिन्होंने कन्नड़ लोकनाट्य शैली ‘यक्षगान’ में एक्ट किया, जो लंबे समय तक पुरुषों के वर्चस्व वाला मंच माना जाता था. इतना ही नहीं, उन्होंने एशिया की पहली महिला कलाकार के तौर पर जापानी पारंपरिक रंगमंच ‘कबुकी’ में भी एक्ट कर इतिहास रच दिया.

उम्र दराज एक्टर्स की मां का निभाया किरदार

रोहिणी को शुरू सिर्फ अच्छे किरदार करने से मतलब रहा है. रोहिणी ने अर्थ, दामिनी, सारांश, अग्निपथ जैसी कई नामचीन फिल्में की हैं. वो खुद बता चुकी हैं कि उन्होंने अपनी यंग ऐज से एक्टर्स की मां की भूमिका निभाई है. अपने 40 साल के करियर में वो अमिताभ बच्चन से लेकर संजय दत्त तक कि मां की भूमिका निभा चुकी हैं. रोहिणी कहती हैं कि सारे मेरे ऑनस्क्रीन बेटे मुझसे उम्र में बड़े हैं. 

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