एक्ट्रेस सबा आजाद ने पीरियड्स को लेकर समाज में फैली सोच और महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव पर खुलकर अपनी राय रखी. सबा ने कहा कि पीरियड्स कोई शर्म की बात नहीं, बल्कि जिंदगी का एक अहम हिस्सा है, जिसका सम्मान होना चाहिए. उन्होंने छोटे शहरों में पीरियड्स को लेकर फैली दकियानूसी सोच, स्कूलों में सही शिक्षा की कमी और महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव पर भी सवाल उठाए.
वक्त पर पीरियड्स नहीं हुए तो 'कूल' नहीं- सबा
गलट्टा प्लस से बातचीत में सबा ने अपना एक्सपीरियंस बताते हुए कहा कि- मेरा परिवार तो काफी प्रोग्रेसिव है. और अक्सर ऐसी चीजें मां समझा देती हैं. पीरियड्स को लेकर वैसे भी लड़कियों के बीच एक भ्रम होता है कि हम अब एडल्ट हो जाएंगे. साथ ही अगर पीरियड्स लेट हो जाए या कोई और दिक्कत हो तो आपको 'कूल' नहीं समझा जाता. मेरा स्कूल तो ऐसा था लेकिन हर जगह ऐसा नहीं होता. कई जगह इसका उल्टा होता है.
'स्मॉल टाउन्स में बीमार है बोल देते हैं. जबकि इसका सेलिब्रेशन होना चाहिए. क्यों पीरियड्स नहीं होगा तो बच्चे नहीं होंगे, बच्चे नहीं होंगे तो यहां नहीं होंगे. तो इसकी रिस्पेक्टफुल सेलिब्रेशन होना चाहिए फीमेल बॉडी का क्योंकि आप एक जिंदगी को दुनिया में लाते हैं. पीरिड्स एक साइकल ऑफ लाइफ है, जिससे एक जिंदगी की शुरुआत होती है.'
पीरियड्स पर पढ़ाना छोड़ शर्म सिखा रहे हैं- सबा
सबा ने आगे इस वजह से महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव की भी बात की. और कहा कि- ये जो अंधविश्वास है कि किचन में मत जाओ, गंदा है, बीमार है. बहुत हो गया. बहुत ही दकियानूसी बातें हैं. हम 2026 में हैं तो ये अब तक खत्म हो जानी चाहिए थी. साइंस बहुत आगे निकल चुका है, तो अब हमें भी थोड़ा पढ़ लेना चाहिए.
सबा ने बताया कि टीचर्स बच्चों को सिखाना नहीं चाहते, फिर दोष उन्हीं को देते हैं. वो बोलीं- बच्चों के पास बहुत बैंडविथ है सीखने का, वो स्पॉन्ज की तरह होते हैं. लेकिन हम बड़ों को उन्हें सिखाना नहीं आता. आप उन्हें सही तरीके से चीजें नहीं सिखा रहे हैं, आप चैप्टर्स स्किप कर देते हैं. आप उन्हें इसकी बजाए शर्म सिखा रहे हैं. आप बायोलॉजी के टीचर हैं तो कैसे स्किप कर सकते हैं, ये तो बेसिक चीज है.
वर्कफ्रंट पर, सबा जल्द ही अपनी सीरीज व्हू इज योर गायनैक सीजन 2 में को-एक्टर कुणाल ठाकुर के साथ नजर आने वाली हैं.