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'बिना बात के गाली खाई है, हमें क्या बदनाम करोगे' गोविंदा ने इंडस्ट्री को सुनाई खरीखोटी, बोले- दगा नहीं

90 के दशक के मशहूर अभिनेता गोविंदा ने अपने करियर और इंडस्ट्री में होने वाली राजनीति पर बात की है. उन्होंने अपने जीवन के कठिन दौर, जैसे थप्पड़ कांड और सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों का भी जिक्र किया.

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इंडस्ट्री में अपनी इमेज पर बोले गोविंदा (Photo: PTI)
इंडस्ट्री में अपनी इमेज पर बोले गोविंदा (Photo: PTI)

90 के दशक के सुपरस्टार गोविंदा भले ही बड़े पर्दे से दूर हैं, लेकिन आज भी उनका जलवा बरकरार है. गोविंदा के करियर को लेकर कई तरह की बातें की जाती हैं. अब गोविंदा ने करियर, इंडस्ट्री पॉलिटिक्स और अपने मुश्किलों दिनों पर दिल खोलकर बात की है.

थप्पड़ कांड से चमकी किस्मत 
मुकेश खन्ना के पॉडकास्ट में गोविंदा ने कहा कि एक थप्पड़कांड ने मेरी किस्मत चमका दी थी. कोई मुझसे बदतमीजी कर रहा था मैंने थप्पड़ मार दिया. वो केस मेरे लिए बहुत लकी रहा. 9 साल चला वो केस. उसका अंत ये रहा है कि मेरे मित्र ने कहा कि यार इसका वीडियो रिकॉर्ड कर लो. वो इंसान मुझसे बोला कि पहले जैसे राक्षस लोगों को पीछे दौड़ाया करते थे. मैंने आपको वैसे ही दौड़ाया कैसा लग रहा है. मैंने उसका वो वीडियो रिकॉर्ड करके कोर्ट में भेज दिया.

मैं भगवान का शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मुझे ऐसा दिन दिखाया. एक थप्पड़ के केस में कोई मेरे साथ नहीं खड़ा था. जो हमारी वजह से खड़े हैं, वो भी हमारे लिए खड़े नहीं थे. इसलिए इंसान का विश्वास टूटता है. इसलिए गोविंदा जो है, वो गोविंदा की वजह से है. 

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बॉलीवुड को सुनाई खरीखोटी
मुकेश खन्ना ने गोविंदा से कहा कि सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें रहती हैं कि गोविंदा ने अपना करियर खुद खराब कर लिया, लेकिन आप ऐसी चीजों को इग्नोर करिए. इस पर गोविंदा कहते हैं कि कभी-कभी बोलना भी जरूरी होता है. अगर आप चुप रहो तो लोगों को लगता है कि इसका कुछ तो है. किसी ने मुझसे कहा कि मैं ऐसा लिखूंगा कि गोविंदा हिल जाएगा. मैंने कहा कि तू जिसको हिलाना चाह रहा है, उसको मैंने सजाया है. चल अब हवा आने दे. 

एक्टर कहते हैं कि हम लोकल ट्रेन में सीट पकड़ने के लिए भी गाली खा चुके हैं. हमने बिना बात के गाली खाई है, कोई हमें क्या बदनाम कर पाएगा. उन्होंने कहा कि मैंने ही अपने आप को नजर लगाई है. मैं कहता था कि 35 साल हो गए डॉक्टर से नहीं मिला. फिर मुझे गोली लग गई. गोविंदा ने कहा कि मैं जहां जाता हूं शुक्रिया करता हूं कि मुझे इतना काम मिला. लेकिन बॉलीवुड शब्द ही गलत है. यहां लोगों को बीमारियां हुई नहीं हैं, बीमारियां दी गई हैं. ये अच्छे लोग नहीं है. कुछ अच्छे शरीफ लोग आए हैं. रामदेव बहुत अच्छा आदमी है. मैं कहता हूं कि जिसको जैसे कमाना है, कमाए. पर किसी के दिल में रहकर आप किसी के दिल के साथ दगा मत कीजिए. 

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