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अक्षय खन्ना के शोर में छुपा नाम, रणवीर सिंह ने इन 5 सीन्स में दिखाया क्यों हैं ‘धुरंधर’ कलाकार!

नेटफ्लिक्स पर आई ‘धुरंधर’ ने रणवीर सिंह की उस परफॉर्मेंस पर लोगों का ध्यान फिर से ला दिया है, जो थिएट्रिकल रिलीज के वक्त थोड़ी कम नोटिस हुई. दोबारा देखने पर फिल्म के कई सीन्स नए मायने खोलते हैं. ओटीटी पर ‘धुरंधर’ अब एक नई नजर से देखी जा रही है.

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रणवीर ने 'धुरंधर' में इन 5 सीन्स से साबित किया एक्टिंग का दम (Photo: ITGD)
रणवीर ने 'धुरंधर' में इन 5 सीन्स से साबित किया एक्टिंग का दम (Photo: ITGD)

‘धुरंधर’ फाइनली ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर आ चुकी है. रणवीर सिंह की ब्लॉकबस्टर हिट को थिएटर्स में देखने का चांस मिस कर चुके लोग अब आदित्य धर की इस लज्जतदार फिल्म का स्वाद चख रहे हैं. जिन्होंने थिएटर्स में ‘धुरंधर’ देखी भी थी, वो फिर से इस फिल्म का जादू फील करने के लिए नेटफ्लिक्स खोले बैठे हैं. दोबारा देखने वालों को अब सीन्स में नए-नए एंगल और छुपे हुए मतलब नजर आ रहे हैं. और अब बहुत लोग ये कह रहे हैं कि ‘धुरंधर’ की थिएट्रिकल रिलीज के वक्त रणवीर को उतनी चर्चा नहीं मिली, जितनी मिलनी चाहिए थी.

धुरंधर’ में रीडिस्कवर किए जा रहे रणवीर
जब थिएटर्स में ‘धुरंधर’ रिलीज हुई थी, तो परफॉर्मेंस के हिस्से आने वाली सारी तारीफें अक्षय खन्ना लूट ले गए और रणवीर की चर्चा कम नजर आई. वजह साफ है— रहमान डकैत के रोल में अक्षय खन्ना ने ‘धुरंधर’ में जो किया, वो इतना डायनामिक था कि उसका क्रेज सिर से उतार पाना मुश्किल था. हमेशा से दमदार एक्टर कहे जाने वाले अक्षय को पहली बार इस फिल्म ने वो ‘शाइन’ करने वाला मोमेंट दिया, जो स्टार्स के लिए फिक्स होता है. इसीलिए अक्षय के नाम का शोर अचानक से बहुत तेजी से बढ़ा.

मगर ‘धुरंधर’ को गौर से देखने पर आपको एहसास होगा कि रणवीर सिंह का काम कितना डिटेल्ड और परतदार है. आदित्य धर ने असल में ‘स्टार’ रणवीर सिंह को पीछे करके, ‘एक्टर’ रणवीर पर भरोसा दिखाया. रणवीर ने भी वो भरोसा पूरा निभाया और हमज़ा अली मजारी उर्फ जसकीरत सिंह रांगी के किरदार के साथ पूरा जस्टिस किया, जिसमें गायब हो जाना ही पीक परफॉर्मेंस होती. लेकिन जब इन 5 सीन्स को आप एक्स-रे की नजर से देखेंगे, तो आपको ‘गायब’ रणवीर की परफॉर्मेंस पूरी शान से चमकती हुई नजर आएगी:

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1. नजर और सब्र का जूसर
‘धुरंधर’ की शुरुआत में आलम भाई की दूध-सोडा की दुकान पर पहुंचने से लेकर रहमान डकैत से कॉन्टैक्ट होने तक, हमज़ा की जर्नी रणवीर के करियर की बेस्ट परफॉर्मेंस कही जा सकती है. वो एक ट्रेंड सोल्जर है, किलिंग के लिए तैयार. मगर ल्यारी में पहली ही रात उसे इस कदर सरेंडर करना पड़ता है कि मामला ऑलमोस्ट सेक्सुअल असॉल्ट तक पहुंच जाता है. अगली सुबह कूड़ेदान पर बैठकर पन्नी से बिरयानी खाता और आंसू बहाता हमज़ा, शरीर पर लगी मार के दर्द से नहीं रो रहा.

रणवीर का डस्टबिन पर बैठकर बिरयानी खाना बहुत अलग हिट करता है (Photo: Screengrab)

वो एक सोल्जर है, जिसका सेल्फ-कॉन्फिडेंस बीती रात चकनाचूर होते-होते बचा है. क्योंकि जो करने के लिए वो ट्रेंड है, उसे वही नहीं करना है. ये एक सोल्जर से, एक स्पाई होने की शुरुआत है. इस पूरे सीक्वेंस में रणवीर ने एक शब्द नहीं बोला है. बस उनकी आंखें किरदार की कहानी बोल रही हैं.

2. गन फाइट का गिरगिट
एक रिसेप्शन पार्टी, एक अटैक और रहमान के बड़े बेटे की जान बचाने के खेल पर हमज़ा का पूरा मिशन टिका है. सीक्वेंस के अंत में रहमान का बड़ा बेटा गोलियों से छलनी पड़ा है. हमज़ा की आंखों में एक पल को ये डर और अफसोस है कि उसका प्लान चौपट हो गया. लेकिन दूसरे ही पल वो जिस तरह रोते-चिल्लाते एम्बुलेंस की गुहार लगा रहा है, वो एकदम 180 डिग्री की पलटी है. इस सीक्वेंस में रणवीर के इमोशंस ने जो पलटी मारी है, वो एक्टिंग का हुनर बहुत बारीकी से पकड़ने वाला ही कर सकता है.

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गन-फाइट के सीन में रणवीर के हेयर-फ्लिप का अलग जलवा है (Photo: Screengrab)

वैसे इस सीक्वेंस का एक और पक्ष भी है— रहमान के बड़े बेटे को तो अटैक से बचाकर हमज़ा ने मूर्ति के पीछे छुपा दिया था न. तो वो छलनी कैसे हुआ? पठान अटैकर्स की रीच में तो वो था ही नहीं. क्या हमज़ा ने ही रहमान के बड़े बेटे को…! क्योंकि रहमान का बेटा मरता नहीं, तो मैटर इतना गंभीर होता नहीं जितना हो गया. मैटर गंभीर नहीं होता, तो हमज़ा का मिशन इतनी तेजी से आगे नहीं बढ़ता. अब तो ‘धुरंधर’ ओटीटी पर है, ज़रा इस सीक्वेंस को पॉज़-प्ले करके देखिए तो!

3. मेजर इकबाल का पोस्टमॉर्टम रूम
मेजर इकबाल (अर्जुन रामपाल) जिस तरह इंडियन स्पाई को टॉर्चर कर रहा है, वो सीन ट्रेलर में देखकर ही लोग कांप गए थे. फिल्म में ये सीन हमज़ा के सामने हो रहा है. हमज़ा खुद इंडियन स्पाई है. हो सकता है कि टेबल पर मुर्गे की तरह छिदे पड़े उस इंडियन जासूस को हमज़ा पहचानता हो. और नहीं भी पहचानता हो, तो एक बेसिक भाईचारा तो घुमड़ता ही है— उस टॉर्चर को देखकर इंसानियत ने थोड़ा तो उछाल मारा होगा!

इस सीन में रणवीर की एक झलक भर उनकी पूरी फीलिंग बताया देती है (Photo: Screengrab)

ऐसे सीन्स में एक्टर के पास अपने मन की उलझन दिखाने की दो चॉइस होती हैं— ट्रेडिशनल फिल्मी ड्रामेटिक तरीका या फिर एक बेहद सहज, लगाम से खींचा हुआ हल्का-सा रिएक्शन. हमज़ा की आंखों में ऑलमोस्ट कोई एक्सप्रेशन नहीं उतरता, एकदम फ्लैट… क्योंकि मेजर इकबाल भी तो सामने खड़ा है! मगर जैसे ही हमज़ा का चेहरा फ्रेम से हटने को होता है, रणवीर की आंख तेजी से झपकती है, जबड़े का मसल टाइट होता दिखता है… और कट! ये अपने एक्टिंग मसल्स को साध चुके एक्टर का चेहरा है.

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4. यलीना पर मोहब्बत का मंतर
पाकिस्तानी नेता जमील जमाली को अपने प्लान की सीढ़ी बनाए बिना हमज़ा मिशन पूरा नहीं कर सकता. और जमील जमाली तक जाने वाला रास्ता है उसकी बेटी— यलीना जमाली. एक कॉलेज स्टूडेंट. हमज़ा से ऑलमोस्ट दो दशक छोटी. हमज़ा से कहीं ज़्यादा रईस. बिल्कुल अलग तबके की लड़की. नहीं पटी, तो मिशन गया!

यलीना और हमज़ा की लव स्टोरी 'धुरंधर' का अकेला सॉफ्ट मोमेंट है (Photo: Screengrab)

एक किलिंग मशीन सोल्जर को लड़की को अपने चार्म में फंसाना है. और रणवीर को देखिए… कैरेक्टर के इस शेड में भी रणवीर एकदम टॉप हैं. वो ऑलमोस्ट जंगल में शेरनी को रिझाते शेर वाले अंदाज में हैं.

5. ‘केन्ट्रोल’ की कुंडी तोड़ने का टाइम
हमज़ा की पूरी कहानी, अपने इमोशंस को, अपने पहले रिएक्शन को बांधते हुए निकली है. फिल्म का क्लाइमेक्स आ चुका है. हमज़ा का काम, रहमान को चौधरी असलम (संजय दत्त) तक पहुंचाना भर है, खुद उससे भिड़ना नहीं. मगर रहमान ने प्लानिंग सूंघ ली है— खेल बिगड़ गया है. रहमान अब चौधरी से नहीं संभल रहा. हमज़ा खुद रहमान और उसके गुर्गों से भिड़ चुका है.

अभी जरा देर पहले हमज़ा ने, कम पढ़े-लिखे आदमी की तरह अंग्रेजी बिगाड़ते हुए रहमान डकैत को कहा था— ‘आप जरा केन्ट्रोल करें’. और अब इस भिड़ंत में आप पहली बार हमज़ा को सारे ‘कंट्रोल’ तोड़कर, सांड की तरह लड़ते देखते हैं. पूरे क्लाइमेक्स में हमज़ा वो सारा गुस्सा उतार देता है, जो ल्यारी में कदम रखने से लेकर अब तक वो अंदर जमा करता रहा. रणवीर सिंह बीस्ट-मोड में आ चुके हैं. जो मसल्स अभी तक करीने से सिले गए कुर्तों की शोभा बढ़ा रहे थे, अब पता चल रहा है कि वो कितने तगड़े हथियार हैं.

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'धुरंधर' के क्लाइमेक्स में रणवीर सिंह 'बीस्ट-मोड' में हैं (Photo: Screengrab)

क्लाइमेक्स खत्म होता है. अब हमज़ा अधमरे रहमान को ऑटो में लेकर हॉस्पिटल भाग रहा है— वही रहमान, जिसे थोड़ी देर पहले उसने खूब धोया है. वही रहमान, जिसके गले में गोली से बना सुराख उसने हाथ से बंद कर रखा है ताकि वो जल्दी न मरे. और अब हमज़ा फिर गिरगिट की तरह रंग बदलता है.

वो फिर वैसे ही गिड़गिड़ा रहा है, जैसे उसके बेटे के मरने (या उसे मारने) के बाद गिड़गिड़ा रहा था. रोने-गिड़गिड़ाने का ये नाटक ज़रूरी है, गैंग का भरोसा जीतने के लिए. क्योंकि मिशन तो अभी बाकी है. ‘धुरंधर 2’ अभी बाकी है. परफॉर्मर रणवीर सिंह का हुनर अभी और दिखना बाकी है. बस 19 मार्च तक इंतज़ार करना है… और ये इंतज़ार बड़ा भारी है!

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