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कराची का किरदार और तमिल में डायलॉग! रिस्की है 'धुरंधर 2' मेकर्स का पैन इंडिया फॉर्मूला...

'धुरंधर 2' को पैन इंडिया बनाने के लिए मेकर्स अलग-अलग भाषाओं में डबिंग का रास्ता चुन रहे हैं. लेकिन क्या कराची, पाकिस्तान में बेस्ड कहानी तेलुगु-तमिल में असरदार बचेगी? सिर्फ एक भाषा में नॉर्थ से साउथ तक देखी गई 'धुरंधर' का सीक्वल अब कंटेन्ट बनाम कमाई के बड़े टेस्ट से गुजरने वाला है.

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'धुरंधर 2' के लिए क्यों रिस्की हिय पैन-इंडिया फॉर्मूला? (Photo: Instagram/@officialjiostudios)
'धुरंधर 2' के लिए क्यों रिस्की हिय पैन-इंडिया फॉर्मूला? (Photo: Instagram/@officialjiostudios)

रणवीर सिंह की 'धुरंधर' ने जैसी रिकॉर्डतोड़ कामयाबी हासिल की, 'धुरंधर 2' से उससे भी ज्यादा उम्मीदें की जा रही हैं. ईद के मौके पर, 19 मार्च को रिलीज हो रहे इस सीक्वल को और भी बड़ी सक्सेस दिलाने के लिए मेकर्स एक कदम और आगे जा रहे हैं.

ऑरिजिनल फिल्म 'धुरंधर' सिर्फ हिंदी में रिलीज हुई थी और इसने उत्तर भारत में ही नहीं, साउथ में भी जमकर कमाई की. लेकिन 'धुरंधर 2' को मेकर्स कई भाषाओं में प्रॉपर डबिंग के साथ लेकर आ रहे हैं. ये पैन इंडिया फॉर्मूला फिल्मों की रीच बढ़ाने के लिए तो कामयाब नजर आता है, मगर 'धुरंधर 2' के केस में ये फॉर्मूला फिल्म के कंटेन्ट को डिस्टर्ब कर सकता है.

'धुरंधर 2' के कल्चर के साथ सेट हो पाएगी डबिंग?
अच्छी डबिंग का मतलब सिर्फ डायलॉग को एक भाषा से दूसरी भाषा में बदल देना नहीं होता. क्योंकि हर भाषा एक कल्चर से जुड़ी होती है. हर भाषा के मुहावरे, बातचीत और जेस्चर्स की बारीकियां कल्चर के हिसाब से बदल जाती हैं. जैसे- एक हिंदी बोलने वाला किरदार बातचीत में किशोर कुमार के गाने की लाइन इस्तेमाल कर सकता है.

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लेकिन यही सीन जब तमिल में डब किया जाएगा, तो उसे एस पी बालासुब्रमण्यम या येसुदास के गाने की लाइन इस्तेमाल करते दिखाना होगा. यानी बात सिर्फ भाषा की नहीं, कल्चर की होती है. इसीलिए साउथ की देसी फिल्में जब हिंदी में डब होती हैं तो जगहों का रेफरेंस अक्सर यूपी-बिहार के गांवों से जोड़ दिया जाता है और भोजपुरी स्टाइल में डबिंग की जाती है. इससे कल्चरल कनेक्ट पैदा होता है.

'धुरंधर' की सबसे बड़ी खासियत ही ये थी कि ये उन रेयर इंडियन फिल्मों में से एक है जिनकी कहानी पाकिस्तान में घट रही है. डायरेक्टर आदित्य धर की सबसे ज्यादा तारीफ इसीलिए हुई क्योंकि उन्होंने स्क्रीन पर लिटरली पाकिस्तान का कराची शहर खड़ा कर दिया था. 'धुरंधर' का पाकिस्तान सिर्फ बिल्डिंग्स में ही नहीं, लोगों की बातचीत, पहनावे, खानपान और गानों में भी महसूस किया जा सकता था.

ऐसी कहानी में सेट किरदारों को तेलुगु, तमिल, मलयालम या कन्नड़ बोलते दिखाना स्क्रीन पर अटपटा लग सकता है. इससे फिल्म की वो बारीकियां और ऑथेन्टिसिटी कमजोर हो जाएंगी, जिसके लिए आदित्य धर ने पूरी जान लगा दी है. राकेश बेदी का किरदार जमील जमाल 'धुरंधर' की खासियतों में से एक था. पाकिस्तानी पंजाबी लहजे और अंदाज के साथ स्क्रीन पर जमील जमाल ने जो माहौल जमाया, उसे दर्शक अभी भी दिमाग से भुला नहीं पा रहे.

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क्या कराची की जमीन पर खड़े होकर बिना अपने सिग्नेचर पाकिस्तानी-पंजाबी लहजे के, तमिल में डायलॉग बोलते जमील जमाल की कल्पना की जा सकती है? कल्पना करने पर आपको ये चीज जितनी अटपटी लग रही है, रियल में भी उतनी ही अटपटी है. नेटफ्लिक्स पर तमिल या तेलुगु में 'धुरंधर' देखकर आप ये बात कन्फर्म कर सकते हैं. डबिंग में 'धुरंधर' की जैसे आत्मा ही मरी हुई नजर आती है. पूरी फिल्म बहुत सिंथेटिक लगने लगती है. यानी डबिंग में इसका स्वाद फीका हो जाता है.

ओटीटी पर खास पसंद नहीं की गई थी 'धुरंधर' की डबिंग
ओटीटी पर आए 'धुरंधर' के तमिल-तेलुगु वर्जन पर जनता का रिएक्शन बहुत पॉजिटिव नहीं था. सोशल मीडिया पर कई लोगों को फिल्म के गाने तेलुगु में खटक रहे थे. तो कईयों ने डबिंग वर्जन के एक्सपीरियंस को 'सिंथेटिक' बताया था. 'धुरंधर' पूरी तरह एक सिग्नेचर हिंदी फिल्म है, जिसे दूसरी भाषा में डबिंग के साथ देखने से अच्छा है कि ऑरिजिनल वर्जन को सबटाइटल्स के साथ देखा जाए. यही वजह है कि 'धुरंधर' सिर्फ हिंदी में होने के बावजूद साउथ के थिएटर्स में खूब देखी गई.

कन्नड़ मेजॉरिटी वाले शहर बेंगलुरु, तेलुगु के गढ़ हैदराबाद और तमिल भाषी चेन्नई में 'धुरंधर' ने शानदार बिजनेस किया था. बॉलीवुड के कई सुपरस्टार्स की, डबिंग वाली पैन इंडिया फिल्मों से भी बेहतर. 'धुरंधर' भारत की एकमात्र फिल्म है जिसने एक ही भाषा में रिलीज होकर 1000 करोड़ से ज्यादा ग्रॉस कलेक्शन किया है.

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'धुरंधर 2' का डबिंग में आना दो तरह से नुकसानदायक है— कंटेन्ट की क्वालिटी कमजोर होगी ही, ऑरिजिनल हिंदी वर्जन के लिए स्क्रीन काउंट भी कम होगा क्योंकि अब मेकर्स को साउथ में अपने हिस्से आ रहीं स्क्रीन्स को अलग-अलग भाषा वाले वर्जन में बांटना पड़ेगा. और 'टॉक्सिक' के सामने क्लैश होने की वजह से पहले ही स्क्रीन्स की मारामारी है. इसलिए 'धुरंधर 2' का साउथ में डबिंग के साथ आना कामयाब ही होगा ये जरूरी नहीं है. 

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