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अक्षय की 'भूत चालीसा' और सत्यजीत रे के गोपी-बाघा! दो भूतिया गानों के बीच 57 सालों का रिश्ता

‘भूत बंगला’ का नया गाना ‘रामजी भला करेंगे’ मस्ती भरे अंदाज में भूतों का बखान करता है. लेकिन इसके लिरिक्स और टोन में सत्यजित रे की 1969 की क्लासिक ‘गोपी गायने बाघा बायने’ की झलक दिखती है. इन दोनों फिल्मों का भूतिया रिश्ता बहुत मजेदार है.

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अक्षय कुमार की 'भूत बंगला' का सत्यजित रे की फिल्म से कनेक्शन (Photo: Screengrab)
अक्षय कुमार की 'भूत बंगला' का सत्यजित रे की फिल्म से कनेक्शन (Photo: Screengrab)

बॉलीवुड को कई आइकॉनिक कॉमेडी हिट्स दे चुकी अक्षय कुमार और प्रियदर्शन की जोड़ी एक लंबे समय बाद साथ आ रही है. इनकी नई फिल्म ‘भूत बंगला’ 10 अप्रैल को रिलीज होगी. अक्षय ने एक मजेदार गाने के साथ फिल्म का प्रमोशनल कैम्पेन स्टार्ट कर दिया है. ये गाना ‘रामजी भला करेंगे’ हाल ही में आया और आते ही जनता इसकी वाइब में खोने लगी है. लेकिन क्या आपको पता है कि अक्षय का ये भूतों का बखान करने वाला गाना, सत्यजित रे की 57 साल पुरानी फिल्म के गाने से प्रेरित है?

अक्षय की ‘भूत चालीसा’!
‘भूत बंगला’ के गाने ‘रामजी भला करेंगे’ में अक्षय अलग-अलग भूतों का बखान कर रहे हैं. लंबा भूत, नाटा भूत, लंगड़ा भूत, काना भूत… अक्षय के इस भूतिया स्टॉक में हर तरह का भूत है. ये काफी फन और एनर्जेटिक गाना है. इसमें अक्षय की एनर्जी और एक्सप्रेशन बहुत पसंद किए जा रहे हैं. लेकिन इस गाने के लिरिक्स और मस्ती भरा अंदाज इंडिया के फिल्म पायनियर सत्यजित रे की एक फिल्म याद दिला रहा है. यहां देखें 'भूत बंगला' का गाना:

वरदान देने वाला भूतों का राजा!
सत्यजित रे की एक आइकॉनिक फिल्म है ‘गोपी गायने बाघा बायने’ (1969). इस फिल्म में एक गाना है ‘भूतेर राजा दिलो बोर’. इस गाने के एक पोर्शन में फिल्म के लीड किरदार गोपी और बाघा अलग-अलग टाइप के भूतों की बात कर रहे हैं. लिरिक्स कुछ वैसे ही हैं जैसे आप अक्षय के गाने में सुन रहे हैं- लंबा भूत, नाटा भूत, लंगड़ा भूत, काना भूत.

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कहानी ये है कि फिल्म में गोपी एक सिंगर है. वो अपनी कला में इतना कमजोर है कि उसकी गायकी से चिढ़कर राजा उसे अपने राज्य से बाहर कर देता है. जंगल में गोपी को ढोल बजाने वाले बाघा मिलता है. उसे भी खराब ढोल बजाने की वजह से उसके राज्य से निकाल दिया गया है.

इन दोनों का म्यूजिक लोगों के कानों को नहीं सुहाता, लेकिन जंगल में भूतों का राजा इनके टैलेंट से इम्प्रेस होकर इन्हें तीन वरदान देता है. इन वरदानों की वजह से आगे चलकर गोपी और बाघा दो राजाओं की लड़ाई रोकने में कामयाब होते हैं. ये राजा दोनों को अपना दामाद बना लेते हैं.

‘गोपी गायने बाघा बायने’ से सत्यजित रे ने एक ‘लाइट कॉमेडी’ फिल्म बनाने का अपना सपना पूरा किया था. लेकिन इस फिल्म में भी उनका क्राफ्ट इतना बेहतरीन था कि उन्हें बेस्ट डायरेक्शन का नेशनल अवॉर्ड मिला था. नेशनल अवॉर्ड्स में ‘गोपी गायने बाघा बायने’ को बेस्ट फीचर फिल्म भी माना गया था. यहां देखें 'गोपी गायने बाघा बायने' का गाना:

अक्षय की फिल्म में कैसे पहुंचा 57 साल पुराना गाना?
‘भूत बंगला’ का म्यूजिक जाने-माने बॉलीवुड म्यूजिक कंपोजर प्रीतम ने दिया है. प्रीतम केवल कंपोजर ही नहीं हैं, खुद भी तगड़े फिल्म प्रेमी हैं. बंगाली कल्चर से आने वाले प्रीतम, सत्यजित रे जैसे लेजेंड के असर से अछूते हों, ये लगभग असंभव है. उनके काम में पहले भी बंगाली म्यूजिक और क्लासिक बंगाली फिल्मों के इम्प्रेशन मिलते रहे हैं.

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इसे कॉपी करना नहीं, इंस्पायर होना ही कहते हैं. पूरा चांस है कि ‘भूत बंगला’ में 57 साल पुराने गाने के लक्षण ऐसे ही आए हैं. अक्षय की फिल्म में क्लासिक हॉरर कॉमेडी का एक इम्प्रेशन तो आ गया है, देखना है कि उनकी फिल्म कितना कमाल करती है.

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