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कभी सिनेमा के बेहद करीब थे अजित पवार, परिवार का रहा बॉलीवुड से गहरा नाता, जानें कैसे

अजित पवार की विमान हादसे में निधन हो गया. अजित का बॉलीवुड के गहरा नाता रहा है. उनकी पूरी जिंदगी भले ही राजनीति में बीती, लेकिन उनकी जड़ों में फिल्म मेकिंग रही है. इसका सबूत उनके पिता के काम से मिलता है. आइये बताते हैं.

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अजित पवार का फिल्म इंडस्ट्री से था गहरा नाता (Photo: PTI)
अजित पवार का फिल्म इंडस्ट्री से था गहरा नाता (Photo: PTI)

28 जनवरी, बुधवार की सुबह महाराष्ट्र में उस समय सनसनी फैल गई जब महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की बारामती में एक दर्दनाक विमान हादसे में मौत हो गई.उनका लियरजेट-45 विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे प्लेन में मौजूद सभी की जान चली गई. अजित की उम्र 64 साल थी. राजनीतिक गलियारों से लेकर बॉलीवुड जगत में भी शोक की लहर है, वहीं जांच एजेंसियां अभी हादसे की तकनीकी वजहों का पता लगा रही हैं.

लेकिन जिस अजित पवार को लोग एक कद्दावर राजनेता के रूप में जानते थे, बहुत कम लोग उनके फिल्मी दुनिया से जुड़े दिलचस्प रिश्ते के बारे में जानते थे.

अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के देवलाली में हुआ था. उनका परिवार पहले से ही फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ा हुआ था. उनके पिता अनंतराव पवार, भारत के मशहूर फिल्म डायरेक्टर वी. शांताराम के साथ लंबे समय तक काम करते रहे थे. अजीत पवार ने भी वो माहौल करीब से देखा है.  

अजित पवार और सिनेमा से जुड़ी उनकी जिंदगी

अजित के पिता अनंतराव पवार बीते कई सालों में आई कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुंबई के राजकमल स्टूडियोज़ (राजकमल कलामंदिर) में काम करते थे. ये स्टूडियो मशहूर फिल्मकार वी. शांताराम का था.

अनंतराव पवार को अक्सर प्रोडक्शन या स्टूडियो के संचालन से जुड़ा बताया जाता है, हालांकि वो असल में उस प्रोडक्शन हाउस में किस पद पर थे. इस बारे में सार्वजनिक रूप से कोई जानकारी नहीं मिलती. लेकिन ये बात साफ है कि स्टूडियो सिस्टम के ज़रिए पवार परिवार की मुंबई की प्रोफेशनल दुनिया में अच्छी पकड़ थी, जबकि वो जड़ों से ग्रामीण महाराष्ट्र से जुड़े रहे.

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जिन वी. शांताराम के साथ अनंतराव पवार ने काम किया, वो कोई साधारण फिल्म मेकर नहीं थे. वो भारतीय सिनेमा के आधुनिक दौर के निर्माताओं में से एक माने जाते हैं. उन्होंने प्रभात फिल्म्स छोड़ने के बाद 1942 में राजकमल कलामंदिर की स्थापना की थी. इस स्टूडियो से ‘झनक झनक पायल बाजे’ और ‘दो आंखें बारह हाथ’ जैसी ऐतिहासिक फिल्में बनीं, जिन्हें आज भी उनकी कला और सामाजिक संदेश के लिए याद किया जाता है.

पर्दे के पीछे से अपना किरदार निभाते रहे अजित के पिता

अजित के पिता भी ‘डॉ. कोटनिस की अमर कहानी’, ‘झनक झनक पायल बाजे’, ‘नवरंग’, ‘दुनिया ना माने’ और ‘अमर भूपाली’ जैसी फिल्मों के दौर में वो स्टूडियो के काम काज को संभालने में मदद करते थे.

भले ही अनंतराव कैमरे के सामने कभी नहीं आए, लेकिन उन्हें जानने वाले कहते हैं कि उनका समर्पण और मेहनत उस रचनात्मक माहौल का अहम हिस्सा थी. जानने वालों के मुताबिक, सभी को लगता था कि अजित भी अपने पिता की तरह फिल्म इंडस्ट्री में ही करियर बनाएंगे, लेकिन किस्मत उन्हें राजनीति की ओर ले गई.

महाराष्ट्र एजुकेशन सोसायटी हाई स्कूल बारामती से अजित पवार ने प्राथमिक शिक्षा हासिल की. जब वो कॉलेज में थे तो उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी. और राजनीति में कदम रखा. समाज सेवा और राजनीति में उनकी रुचि शुरू से साफ दिखती थी. अजित ने अपने चाचा शरद पवार से प्रेरित होकर सिनेमा की जगह राजनीतिक जीवन को चुना.

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अजित ने 1982 में ऑफिशियली राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए महाराष्ट्र के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक बने.

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