scorecardresearch
 

SIR के बाद 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कितने वोटर हुए कम? ECI ने जारी किया डेटा

चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाताओं की संख्या करीब 6.08 करोड़ घट गई है. पहले जहां कुल संख्या लगभग 51 करोड़ थी, अब यह घटकर 44.92 करोड़ रह गई है. इस प्रक्रिया का दूसरा चरण पूरा हो चुका है, जबकि अगले चरण में 17 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 40 करोड़ मतदाताओं को कवर किया जाएगा.

Advertisement
X
SIR का अगला चरण बाकी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू होगा. (File Photo- PTI)
SIR का अगला चरण बाकी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू होगा. (File Photo- PTI)

देश में वोटर लिस्ट को लेकर चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद बड़ा बदलाव सामने आया है. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों की संयुक्त मतदाता सूची में करीब 6.08 करोड़ मतदाताओं की कमी आई है.

यह आंकड़ा तब सामने आया जब उत्तर प्रदेश ने अपनी अंतिम मतदाता सूची जारी की, जिसके साथ ही SIR का दूसरा चरण पूरा हो गया. इस चरण में जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मतदाता सूची प्रकाशित हुई है, उनमें पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, छत्तीसगढ़, केरल, पुडुचेरी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, गुजरात, मध्य प्रदेश और गोवा शामिल हैं.

चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन अधिकारियों द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, जब 27 अक्टूबर को SIR प्रक्रिया की घोषणा की गई थी, तब इन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 51 करोड़ थी. लेकिन इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद यह संख्या घटकर करीब 44.92 करोड़ रह गई है.

गौरतलब है कि इससे पहले बिहार में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, जबकि अब दूसरे चरण में इन 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR का काम समाप्त हो गया है.

Advertisement

अब अगला चरण बाकी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू होगा. करीब 40 करोड़ मतदाताओं को कवर करने के लिए 17 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया लागू की जाएगी. माना जा रहा है कि यह चरण पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद शुरू होगा.

वहीं असम में SIR की जगह 'स्पेशल रिवीजन' प्रक्रिया 10 फरवरी को पूरी की गई थी.

इस पूरे अभियान के दौरान कई बार शेड्यूल में बदलाव भी किए गए. बिहार की तरह तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement