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जौनपुर में आसान नहीं है रवि किशन की राह

अभिनय जगत से राजनीति में आए भोजपुरी फिल्मों के अभिनेता रवि किशन के लिए संसद की राह आसान नहीं दिख रही. लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने रविकिशन को जौनपुर संसदीय सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है.

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रविकिशन
रविकिशन

अभिनय जगत से राजनीति में आए भोजपुरी फिल्मों के अभिनेता रवि किशन के लिए संसद की राह आसान नहीं दिख रही. लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने रविकिशन को जौनपुर संसदीय सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है. कांग्रेस ने हालांकि रवि किशन को तुरूप का पत्ता समझकर मैदान में उतारा है, और उनकी जीत का पार्टी को पूरा भरोसा भी है. लेकिन यहां की राजनीतिक परिस्थिति कांग्रेस और रविकिशन के लिए अनुकूल नहीं दिख रही हैं.

कांग्रेस के एक स्थानीय नेता ने नाम न जाहिर करने के अनुरोध पर बताया कि पार्टी ने रवि किशन को इसी सोच के साथ टिकट दिया है कि वह मौजूदा परिस्थिति में पार्टी को जीत दिला देंगे, लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है. कांग्रेस नेता ने कहा कि रवि किशन पूरा चुनाव अभियान फिल्मी अंदाज में चला रहे हैं, शायद यही उनका प्लस प्वाइंट भी है, लेकिन यह बहुत कारगर होता नहीं दिखता.

कांग्रेस नेता ने कहा, 'यहां ठोस और जमीनी प्रचार अभियान की जरूरत है, जिसका पूरा अभाव है.' लेकिन जौनपुर के लिए कांग्रेस के चुनाव प्रभारी वाराणसी के पूर्व सांसद राजेश मिश्र इस बात को खारिज करते हैं. उनके अनुसार, कांग्रेस जौनपुर में सबसे आगे चल रही है और उनका उम्मीदवार चुनाव जीत रहा है.

दूसरी ओर वरिष्ठ पत्रकार अरविंद उपाध्याय कांग्रेस को यहां लड़ाई से बाहर बताते हैं. उपाध्याय कहते हैं, 'जौनपुर में मुख्य लड़ाई बसपा के उम्मीदवार सुभाष पांडे, बीजेपी उम्मीदवार के.पी. सिंह और सपा उम्मीदवार पारसनाथ यादव के बीच है.' उन्होंने कहा, 'बसपा उम्मीदवार के पक्ष में स्थिति ज्यादा अनुकूल है क्योंकि अल्पसंख्यक समुदाय का झुकाव यहां बसपा की ओर है. बीजेपी उम्मीदवार को मोदी लहर का भरोसा है लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार धनंजय सिंह उनकी राह में रोड़ा बन रहे हैं. धनंजय के लिए यह अस्तित्व की लड़ाई है.'

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उल्लेखनीय है कि धनंजय जौनपुर के मौजूदा सांसद है, जो पिछले चुनाव में बसपा के टिकट पर निर्वाचित हुए थे. हत्या के एक मामले में जेल जाने के बाद बसपा ने इस बार उन्हें टिकट नहीं दिया और वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में हैं. सपा उम्मीदवार पारसनाथ यादव जौनपुर के पूर्व सांसद हैं, और यहां से दो बार (1998 और 2004) सपा के ही टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं. लेकिन आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार डॉ. के. पी. यादव उनके लिए मुसीबत बने हुए हैं. डॉ. यादव सपा से टिकट के प्रबल दावेदार थे, लेकिन टिकट न मिलने पर उन्होंने सपा छोड़ दी और आप के उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में हैं.

1984 के आम चुनाव में कमला प्रसाद सिंह ने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में यहां से जीत दर्ज कराई थी, लेकिन 1989 में वह बीजेपी के यादवेंद्र दत्त के सामने चुनाव हार गए थे, और उसके बाद जीत तो दूर पिछले छह चुनावों से कांग्रेस जौनपुर सीट पर लड़ाई से भी बाहर है.

कांग्रेस रविकिशन के जरिए यहां वापसी करने की उम्मीद लगाए हुए हैं लेकिन इसकी उम्मीद फिलहाल बहुत दमदार नहीं दिखती. यहां मतदान 12 मई को होना है और इस दौरान राजनीतिक ऊंट किस करवट बैठेगा इसका पता 16 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद चलेगा.

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बहरहाल, देश के 250 अति पिछड़े जिलों में से एक जौनपुर के शहरी हिस्से में पड़ने वाले इस संसदीय क्षेत्र में कुल 1,662,127 मतदाता हैं, जिसमें 896,528 पुरुष और 765,599 महिला मतदाता शामिल हैं.

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