चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और छह राज्यों के उपचुनावों के लिए 23 अप्रैल को होने वाले मतदान के मद्देनजर क्यूआर कोड युक्त मतदाता सूचना पर्चियों (VIS) का वितरण शुरू कर दिया है. बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर वोटरों को व्यक्तिगत रूप से ये पर्चियां दी जा रही हैं. इस पर्ची में मतदाता का नाम, पता, उम्र, मतदान केंद्र का स्थान और समय के साथ केंद्र के मानचित्र का स्नैपशॉट शामिल है.
मतदाताओं की मदद के लिए इसमें 'क्या करें' और 'क्या न करें' की सूची भी दी गई है. क्यूआर कोड की मदद से वोटर की जानाकरी तेजी से खोजने में मदद मिलती है, जिससे मतदान केंद्रों पर भीड़ कम होगी.
चुनाव आयोग ने निर्देश दिया है कि मतदान के दिन से करीब 5 दिन पहले सभी रजिस्टर्ड वोटरों को ये पर्चियां मिल जानी चाहिए. पहचान आसान बनाने के लिए भाग क्रमांक और क्रम संख्या को ज्यादा पठनीय बनाया गया है.
दिव्यांगजनों के लिए विशेष व्यवस्था
चुनाव प्रक्रिया में दिव्यांगजनों की सक्रिय भागीदारी के लिए चुनाव आयोग ने विशेष कदम उठाए हैं. नियमित पर्चियों के अलावा, नेत्रहीन लोगों के लिए ब्रेल विशेषताओं वाली सुलभ मतदाता सूचना पर्चियां (AVIS) जारी करने के निर्देश दिए गए हैं. वोटर लिस्ट को सिर्फ उन्हीं भाषाओं में रखा गया है, जिनमें संबंधित विधानसभा क्षेत्र की लिस्ट प्रकाशित होती है.
यह भी पढ़ें: चुनाव आयोग ने एक्स पर लिखा- 'TMC को दो टूक', मच गया बवाल, केजरीवाल-अखिलेश भी कूदे
निर्वाचन आयोग ने कहा है कि सिर्फ वोटर लिस्ट पर्ची को पहचान पत्र के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा. वोटिंग के लिए मतदाताओं को ईपीसी (EPIC) के अलावा 12 अधिकृत पहचान पत्रों में से किसी एक का उपयोग करना जरूरी होगा. पर्ची बांटे जाने के दौरान उम्मीदवारों के एजेंट बीएलओ के साथ जा सकते हैं, लेकिन पर्चियों का कोई भी अनधिकृत वितरण कानूनन अपराध है.
कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
वोटर सूचना पर्चियों का अवैध कब्जा या वितरण आरपी अधिनियम, 1951 और बीएनएस के प्रावधानों का उल्लंघन माना जाएगा. ऐसा करने पर कारावास, जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है. निर्वाचन आयोग की इस पहल का मुख्य उद्देश्य मतदान को सुलभ और मतदाता-अनुकूल बनाना है ताकि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी बनी रहे.