scorecardresearch
 

मौड़ मंडी असेंबली सीट पर अब तक दो बार हुए चुनाव, शिरोमणि अकाली दल और AAP में रहेगी टक्कर

मौड़ मंडी सीट पर दो बार चुनाव हुए हैं- 2012 और 2017 में. एक बार इस सीट पर शिरोमणि अकाली दल ने जीत दर्ज की है दूसरी बार आम आदमी पार्टी ने जीत दर्ज की.

X
मौड़ मंडी विधानसभा सीट मौड़ मंडी विधानसभा सीट
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बठिंडा जिले की आबादी 1388525 है, जिसमें 70.89 प्रतिशत सिख हैं
  • 2012 में इस सीट पर शिरोमणि अकाली दल ने जीत दर्ज की, 2017 में आम आदमी पार्टी जीती

मौड़ मंडी विधानसभा सीट: बठिंडा की मौड़ मंडी असेंबली सीट पर 2017 में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार जगदेव सिंह कम्मालु ने जीत दर्ज की थी. उन्होंने शिरोमणि अकाली दल बादल के कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ नेता जनमेजा सिंह सेखों को मात देकर जीत दर्ज की थी. तीसरे नंबर पर कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार हरमंदर सिंह जस्सी आए थे.

2017 चुनाव से पहले, मौड़ मंडी में कांग्रेस के उम्मीदवार हरमंदर सिंह जस्सी जैसे ही रैली कर बाहर निकले, तो एक बम ब्लास्ट हुआ था. इस ब्लास्ट में लगभग 6  लोगों की मौत हो गई थी. 

मौड़ मंडी बठिंडा से 40 किलोमीटर की दूरी पर है. यह इलाका अंग्रेजों के समय से ही बठिंडा दिल्ली रेलवे ट्रैक पर सड़क से लगा हुआ है. अंग्रेजों के समय में मौड़ मंडी पटियाला रियासत का हिस्सा था. रेलवे स्टेशन भी अंग्रेजों के समय का ही बना हुआ है. मौड़ मंडी दाना मंडी और बाजार के लिए मुख्य शहर था. मौड़ मंडी रेल के रास्ते बठिंडा, चंडीगढ़, अंबाला, दिल्ली, श्रीगंगानगर, फिरोजपुर के साथ जुड़ा हुआ है, जबकि सड़क के रास्ते यह बठिंडा मानसा चंडीगढ हाईवे पर पड़ता है.

2011 की जनगणना के अनुसार, बठिंडा जिले की आबादी 1388525 है, जिसमें 70.89 प्रतिशत सिख हैं, 27.41 प्रतिशत हिंदू हैं, 1.17 प्रतिशत मुस्लिम और 0.18 प्रतिशत इसाई हैं. साथ ही, दूसरी जाति के 0.53 प्रतिशत लोग बसते हैं. बठिंडा में 1000 पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की संख्या 865 है. साथ ही यहां का लिटरेसी रेट 69.6% है.

मौड़ मंडी का राजनीतिक इतिहास 

मौड़ मंडी सीट पर दो बार चुनाव हुए हैं- 2012 और 2017 में. एक बार इस सीट पर शिरोमणि अकाली दल ने जीत दर्ज की है दूसरी बार आम आदमी पार्टी ने जीत दर्ज की.

2012 में इस सीट पर शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार जन्मेजा सिंह सेखों जीते थे, जिन्हें 45,349 वोट मिले थे. कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार मंगत राय बंसल 43,962 वोट के साथ दूसरे नंबर पर रहे थे. उसी समय मनप्रीत सिंह बादल ने ट्रिपल पार्टी ऑफ पंजाब बनाई थी, और वह खुद मौड़ मंडी से ही चुनाव लड़े थे और तीसरे नंबर पर रहे थे. 

2017 के चुनाव में यहां से आम आदमी पार्टी के जगदेव सिंह कम्मालु चुनाव जीते थे. उन्हें 62,282 वोट मिले थे. दूसरे नंबर पर शिरोमणि अकाली दल बादल के उम्मीदवार जन्मेजा सिंह सेखों आए थे, जिन्हें 47,605 वोट मिले थे. वहीं, तीसरा नंबर पर 23,087 वोट के साथ कांग्रेस पार्टी के सीनियर नेता और पूर्व मंत्री हरमंदर सिंह जस्सी रहे, जो डेरा सिरसा मुखी के नजदीकी रिश्तेदार भी हैं. 6 अन्य उम्मीदवार भी इस सीट पर चुनाव लड़े थे. मौड़ मंडी में पंजाब के वोट प्रतिशत के मुकाबले 2017 में सबसे ज्यादा वोट पड़े थे, जो 84.5 प्रतिशत है. मौड़ मंडी में 137593 वोटरों ने अपने वोट का इस्तेमाल किया था, जबकि यहां कुल वोट 1,62,838 हैं.

मौड़ मंडी को लेकर लोगों की राय 

मौड़ मंडी के वोटर सरकार से नाराज हैं क्योंकि उनके इलाके से जीत कर जाने वाले उम्मीदवार मंत्री तो कई बार बने लेकिन उन्होंने मौड़ मंडी के विकास में कोई योगदान नहीं दिया. लोगों को राजनीतिक पार्टियों के लीडरों से काफी नाराजगी है. ऐसा इसलिए क्योंकि वे वादे बहुत करते हैं, लेकिन एक भी वादा निभाते नहीं हैं. 

विधायक का रिपोर्ट कार्ड

विधायक जगदेव सिंह कम्मालु, गांव कम्मालु के रहने वाले हैं. वह आदमी पार्टी से चुनाव जीते, लेकिन वह विरोधी पार्टी रही और उन्होंने भी मौड़ शहर और गांव के विकास में कोई योगदान नहीं दिया. विधायक दसवीं पास हैं. यह चुनाव से पहले खेती बाड़ी का काम करते थे. 2017 चुनाव में उन्होंने अपनी प्रॉपर्टी की कीमत  42,781,630 रुपए से ऊपर बताई थी और उनपर 2,256,673 रुपए की देनदारी है. उनके ऊपर कोई मामला दर्ज नहीं है.

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें