लोकसभा चुनाव 2019 के लिए केरल में 23 मई को मतगणना हुई. वडकरा लोकसभा सीट से कांग्रेस के के. मुरलीधरन ने अपने नजदीकी उम्मीदवार सीपीएम के पी. जयराजन को 84 हजार 663 वोटों से हराया.
कब और कितना हुआ मतदान?
वडकरा लोकसभा सीट पर 23 अप्रैल को तीसरे चरण में मतदान हुआ था. चुनाव आयोग के मुताबिक वडकरा में 82 फीसदी मतदान हुआ था.
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किस पार्टी से कौन मैदान में?
इस सीट 12 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे थे. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने पी. जयराजन को टिकट दिया था जबकि कांग्रेस ने के. मुरलीधरन को उम्मीदवार बनाया था. माकपा उम्मीदवार को एलडीएफ का जबकि कांग्रेस प्रत्याशी को यूडीएफ का समर्थन हासिल था. वहीं भारतीय जनता पार्टी ने वीके संजीवन को मैदान में उतारा था और नेशनल लेबर पार्टी जतीश एपी सहित कई निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव लड़ रहे थे.
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क्या थे 2014 में नतीजे?
साल 2014 में यहां एम. रामचंद्रन जीते और फिलहाल वही सांसद हैं. वह यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी यूडीएफ की तरफ से कैंडिडेट थे. लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट की तरह से उम्मीदवार माकपा के ए.एन. शमसीर दूसरे स्थान पर थे. कांग्रेस के एम. रामचंद्रन को 4,16,479 वोट यानी करीब 43 फीसदी वोट मिले. दूसरे स्थान पर रहे माकपा कैंडिडेट ए.एन. शमसीर को कुल 4,13,173 वोट मिले. कांग्रेस के सामने चुनौती यह है कि उसका वोट घट रहा है.
क्या है सीट का समीकरण और इतिहास?
वडकरा केरल के कोझिकोड जिले में एक समुद्रतटीय शहर है. इसे वटकरा भी उच्चारित करते हैं और इसका पुराना नाम बडागरा है. ब्रिटिश राज में यह इलाका मद्रास राज्य के मालाबार जिले का हिस्सा रहा है. वडकरा में ही प्रसिद्ध ऐतिहासिक मंदिर लोकनाकार्यू स्थित है. वडकरा शहर कोझिकोड से करीब 50 किमी उत्तर और कन्नूर से करीब 44 किमी. दक्षिण की ओर स्थित है.
इस संसदीय क्षेत्र में सात विधानसभा क्षेत्र आते हैं- थलास्सेरी, कुथुपरम्बा, वटाकरा, नदापुरम, कुट्टीयाडी, कोयिललैंडी, पेरम्बरा. साल 1957 में हुए पहले आम चुनाव में यह प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के के.बी. मेनन विजयी हुए थे. 1971 में पहली बार कांग्रेस कैंडिडेट के.पी. उन्नीकृष्णन को जीत मिली, तब से अब तक कुल चार बार कांग्रेस कैंडिडेट को जीत मिल चुकी है.
उन्नीकृष्णन यहां से छह बार सांसद रह चुके हैं. हालांकि, एक बार वह कांग्रेस (यूआरएस) और तीन बार कांग्रेस (सोशलिस्ट) के टिकट पर जीते थे. साल 1996 में यहां पहली बार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी माकपा के कैंडिडेट ओ. भारतन को जीत मिली. साथ ही 1996 से 2004 तक यहां लगातार चार बार माकपा जीती, लेकिन 2009 में कांग्रेस ने यह सीट छीन ली और उसके कैंडिडेट मुल्लप्पल्ली रामचंद्रन विजयी हुए.
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