लोकसभा चुनाव 2019 के लिए केरल की कन्नूर लोकसभा सीट पर 23 मई को मतगणना हुई. इस सीट पर कांग्रेस के के. सुधाकरण ने अपने नजदीकी उम्मीदवार सीपीएम की पीके श्रीमती टीचर को 94 हजार 559 वोटों से हराया.
कब और कितना हुआ मतदान?
केरल में कन्नूर लोकसभा सीट पर तीसरे चरण में मतदान हुआ था. कन्नूर लोकसभा सीट पर बंपर वोटिंग हुई थी. यहां कुल 83.05 फीसदी मतदान हुआ था. वहीं केरल की बात करें तो तीसरे चरण के तहत यहां पर 72.12 फीसदी मतदान हुआ.
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किस पार्टी से कौन मैदान में?
इस सीट पर 13 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. कांग्रेस ने के. सुधाकरण को प्रत्याशी बनाया है जबकि भारतीय जनता पार्टी की तरफ से सीके पद्मनाभन चुनाव लड़ रहे हैं. लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) की तरफ से माकपा ने अपनी मौजूदा सांसद पीके श्रीमती टीचर को फिर से उम्मीदवार बनाया है.
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पिछले चुनाव में क्या थे नतीजे?
साल 2014 में यहां से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी माकपा की पीके श्रीमती टीचर विजयी हुई थीं. उन्हें 4,27,622 वोट मिले थे. दूसरे स्थान पर रहे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस कैंडिडेट के. सुधाकरन को 4,21,056 वोट मिले थे. इस तरह यह सीट माकपा ने कांग्रेस से हथिया लिया था.
वहीं, भारतीय जनता पार्टी के पी.सी. मोहनन मास्टर को 51,636 वोट, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) को 19,170 वोट, आम आदमी पार्टी के के.वी. शशिधरन को 6,106, बहुजन समाज पार्टी के एन. अब्दुल्ला दाऊद को 2,109 वोट, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) रेड स्टार को 1,536 वोट और नोटा (छव्ज्) को 7,026 वोट मिले.
विवादित है पूरा क्षेत्र!
तिरुनंतपुरम से करीब 520 किमी की दूरी पर स्थित कन्नूर इलाका वैसे तो अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जाना जाता है, लेकिन यह वही इलाका है, जो राजनीतिक प्रतिशोध वाले रक्तपात के लिए पूरे देश में कुख्यात है. यह जिला असल में आजादी के काफी पहले से ही कम्युनिस्टों का गढ़ रहा है.
केरल माकपा में कन्नूर लॉबी काफी मजबूत रही है और मौजूदा सीएम विजयन भी इसी इलाके से आते हैं. बीजेपी अक्सर राष्ट्रीय स्तर पर कन्नूर में होने वाली राजनीतिक हत्याओं का सवाल उठाती रही है. फिलहाल यहां से माकपा की पीके श्रीमती टीचर सांसद हैं.
साल 2016 से अब तक वहां करीब एक दर्जन राजनीतिक हत्याएं हो चुकी हैं. इस समुद्र तटवर्ती जिले में राजनीतिक हत्या 1970 के दशक से ही शुरू हो गई थी. एक अनुमान के अनुसार वहां साल 2000 से 2016 के बीच करीब 70 राजनीतिक हत्याएं हो चुकी थीं.
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