झारखंड की दुमका लोकसभा सीट से झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रत्याशी शिबू सोरेन को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा है. उनको भारतीय जनता पार्टी के सुनील सोरेन ने 47590 वोटों से हराया है. इस चुनाव में सुनील सोरेन को 484923 वोट मिले, जबकि झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रत्याशी शिबू सोरेन को 437333 वोटों से संतोष करना पड़ा.
आपको बता दें कि यहां पर आखिरी चरण में 19 मई को वोट डाले गए थे. चुनाव आयोग के मुताबिक दुमका संसदीय सीट पर 73.16 फीसदी वोटिंग रिकॉर्ड की गई थी.
जानिए इस चुनाव में किसको कितने वोट मिले
23 मई को मतगणना के दिन कैसे चला रुझान
LIVE 19:10 IST- अब तक के रुझान में झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रत्याशी शिबू सोरेन पीछे चल रहे हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी के सुनील सोरेन बढ़त बनाए हुए हैं. देखिए अब तक किसको कितने वोट मिले.
LIVE 15:10 IST- अब तक के रुझान में झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रत्याशी शिबू सोरेन पीछे चल रहे हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी के सुनील सोरेन बढ़त बनाए हुए हैं. देखिए अब तक किसको कितने वोट मिले.
कौन-कौन थे उम्मीदवार
दुमका लोकसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस ने अर्जुन पुजहर, झारखंड मुक्ति मोर्चा ने शिबू सोरेन, भारतीय जनता पार्टी ने सुनील सोरेन, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने सेनापति मुर्मू, बहुजन समाज पार्टी ने स्टेफन बेसरा और झारखंड पीपुल्स पार्टी ने सतीश सोरेन को चुनाव मैदान में उतारा था. दुमका लोकसभा सीट पर कुल 15 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमाने उतरे थे.
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पिछली बार किसने दर्ज की थी जीत
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में दुमका संसदीय सीट से शिबू सोरेन सातवीं बार जीते थे. उन्होंने बीजेपी के सुनील सोरेन को हराया था. शिबू सोरेन को करीब 3.35 लाख और सुनील सोरेन को 2.96 लाख वोट मिले थे. इससे पहले यानी 2009 के चुनाव में भी शिबू सोरेन ने बीजेपी के सुनील सोरेन को ही हराया था. इस दौरान शिबू सोरेन को करीब 2 लाख और सुनील सोरेन को करीब 1.89 लाख वोट मिले थे.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
दुमका लोकसभा सीट से झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन और बाबू लाल मरांडी सांसद रह चुके हैं. दुमका लोकसभा सीट के अन्तर्गत जामताड़ा, देवघर और दुमका जिले की 6 विधानसभा सीट आती है. साल 1989 से ही यह सीट झारखंड मुक्ति मोर्चा का गढ़ रही है और इस सीट से सात बार से शिबू सोरेन सांसद बनते आ रहे हैं. साल 2014 में प्रचंड मोदी लहर के बावजूद शिबू सोरेन अपनी सीट बचाने में कामयाब हुए थे.
साल 1957 में इस सीट से झारखंड पार्टी के देबी सोरेन जीते थे. इसके बाद इस सीट से कांग्रेस के एस. सी. बेसरा लगातार तीन बार (1962, 1967 और 1971) में सांसद बने. 1977 में यह सीट जनता पार्टी के पास चली गई और हेमब्रह्म बटेश्वर जीतनें कामयाब हुए. 1980 के चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा के टिकट पर शिबू सोरेन पहली बार संसद पहुंचे. 1984 में यह सीट फिर कांग्रेस के पास आ गई और पृथ्वी चंद किस्कू जीते.
1989 में शिबू सोरेन ने वापसी की और लगातार तीन बार (1989, 1991 और 1996) झारखंड मुक्ति मोर्चा के टिकट पर जीते. 1998 में इस सीट से बीजेपी प्रत्याशी बाबू लाल मरांडी जीते. मरांडी 1999 का चुनाव भी जीते. 2002 में शिबू सोरेन ने दुमका में झारखंड मुक्ति मोर्चा का परचम फहराया और जीते. इसके बाद से वह लगातार (2004, 2009 और 2014) इस सीट से सांसद बन रहे हैं. वह इस सीट से सातवीं बार सांसद हैं.
सामाजिक तानाबाना
दुमका लोकसभा सीट पर आदिवासी, अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्ग के वोटरों का दबदबा है. इस सीट पर 40 फीसदी आदिवासी, 40 फीसदी पिछड़ी जातियां और 20 प्रतिशत मुस्लिम वोटर हैं. आदिवासी और अल्पसंख्यक वोटरों को झारखंड मुक्ति मोर्चा का परंपरागत वोटर माना जाता है. यही कारण है कि इस सीट से शिबू सोरेन लगातार जीत रहे हैं. इस सीट पर मतदाताओं की संख्या 12.47 लाख है, इसमें 6.46 लाख पुरुष और 6 लाख महिला मतदाता शामिल है.
इस लोकसभा सीट के अन्तर्गत 6 विधानसभा सीटें शिकारीपाड़ा (एसटी), जामताड़ा, दुमका (एसटी), नाला, सारठ और जामा (एसटी) आती है. 2014 के विधानसभा चुनाव के दौरान झामुमो ने चार सीटों (शिकारीपाड़ा, नाला, सारठ, जामा), बीजेपी ने एक सीट (दुमका) और कांग्रेस ने भी एक सीट पर (जामताड़ा) जीत दर्ज की थी.
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