scorecardresearch
 

'मां की रसोई' खोलेगी ममता सरकार, 5 रुपये में मिलेगा गरीबों को भरपेट भोजन

इस 'मां की रसोई' योजना का शुभारंभ सोमवार (15 फरवरी) को सीएम ममता बनर्जी राज्य सचिवालय से वर्चुअली करेंगी. फिलहाल, इस योजना के तहत अभी कोलकाता में लंच की व्यवस्था की जा रही है. प्रत्येक जगह लगभग हजार लोगों को दोपहर का भोजन कराया जाएगा.

Advertisement
X
सीएम ममता बनर्जी
सीएम ममता बनर्जी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बंगाल में कल होगी 'मां की रसोई' योजना की शुरुआत
  • 5 रुपयो में मिला करेगा गरीबों को भरपेट भोजन
  • ममता बनर्जी वर्चुअली करेंगी रसोई का शुभारंभ

पश्चिम बंगाल में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं. चुनाव को देखते हुए हर एक पार्टी वोटर्स को लुभाने का कोई भी मौका हाथ से गंवाना नहीं चाहती. ऐसे में सीएम ममता बनर्जी की सरकार बंगाल में 'मां की रसोई' योजना की शुरुआत करने जा रही है. इसके तहत लोगों को पांच रुपये में भरपेट भोजन दिया जाएगा. 

दरअसल, चुनाव से पहले गरीबों के लिए ममता सरकार 'मां की रसोई' योजना लेकर आ रही हैं. इस योजना के तहत महज 5 रुपये में गरीबों को भरपेट भोजन दिया जाएगा. पांच रुपये में ग्राहकों को दाल-चावल, एक सब्जी और एक अंडा दिया जाएगा. 

इस 'मां की रसोई' योजना का शुभारंभ सोमवार (15 फरवरी) को सीएम ममता बनर्जी राज्य सचिवालय से वर्चुअली करेंगी. फिलहाल, इस योजना के तहत अभी कोलकाता की 16 बोरो ऑफिस में लंच की व्यवस्था की जा रही है. प्रत्येक जगह लगभग हजार लोगों को दोपहर का भोजन कराया जाएगा. बताया जा रहा है कि धीरे-धीरे इस योजना को कोलकाता से बाहर भी शुरू किया जाएगा. 

गौरतलब है कि तमिलनाडु में भी तत्कालीन सीएम जयललिता ने 'अम्मा कैंटीन' के नाम से इसी तरह की योजना शुरू की थी. जहां 5 रुपये में गरीबों को भरपेट भोजन दिया जाता था. अब उसी तर्ज पर ममता बनर्जी का नाम भी जुड़ रहा है. हालांकि, विपक्षी दल चुनाव पूर्व इसे चुनावी स्टंट बता रहे हैं. 

Advertisement

गौरतलब है कि बंगाल में इसी साल चुनाव होने हैं. यहां मुख्य तौर पर बीजेपी, कांग्रेस-लेफ्ट और टीएमसी के बीच मुकाबला माना जा रहा है. ओवैसी की पार्टी भी मैदान में ताल ठोक रही है. हाल ही में नेताजी के जयंती के बहाने राज्य में खूब सियासत देखने को मिली. केंद्र की ओर से कई परियोजनाओं का ऐलान बंगाल के लिए किया गया. ऐसे में अब ममता सरकार की रसोई योजना को लेकर सियासत देखने को मिल रही है. 

रिपोर्ट- अनुपम मिश्रा

Advertisement
Advertisement