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बंगाल में 30 फीसदी मुस्लिम वोटर, ममता के इस कोर वोट पर BJP की भी नजर

बीजेपी के बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने बुधवार को कहा कि हमारी पार्टी की विशेषता यही है कि इसके मंच पर 'सिराज और जय श्री राम' साथ में बैठे होते हैं. उन्होंने यह बात इसीलिए कही कि पूर्वी मेदिनापुर के टीएमसी जिला परिषद के सदस्य सिराज खान अपने समर्थकों के साथ बीजेपी का दामन थामा था. माना जा रहा कि बीजेपी मुस्लिम समुदाय को साधने में जुटी है.

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बंगाल बीजेपी प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय के साथ सिराज खान
बंगाल बीजेपी प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय के साथ सिराज खान
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बीजेपी में शामिल हुए टीएमसी के मुस्लिम नेता
  • बंगाल में 30 फीसदी मुस्लिम वोटर महत्वपूर्ण हैं
  • टीएमसी का मुस्लिम कोर वोट बैंक माना जाता है

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सियासी पार्टियां मुस्लिम वोटरों को लुभाने में जुट गई हैं. ये तृणमूल कांग्रेस का कोर वोट माना जाता है, लेफ्ट-कांग्रेस की भी इसपर नजर रहती है. अब बीजेपी भी इस समुदाय तक अपनी पहुंच बढ़ाने में जुट गई है. 

बीजेपी के बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने बुधवार को एक सभा में कहा कि हमारी पार्टी की विशेषता यही है कि इसके मंच पर 'सिराज और जय श्री राम' साथ में बैठे होते हैं. उन्होंने यह बात इसीलिए कही क्योंकि पूर्व मेदिनापुर के टीएमसी जिला परिषद के सदस्य सिराज खान ने अपने समर्थकों के साथ बीजेपी का दामन थामा था. विजयवर्गीय ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच यही अंतर है कि पीएम जहां सभी को साथ लेकर चलते हैं, वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री वर्ग विशेष की वकालत करती हैं.

बंगाल में करीब 30 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं, जो सूबे के 294 सीटों में से करीब-करीब 100 पर निर्णयक भूमिका में हैं. 2010 के बाद से बंगाल में मुस्लिम मतदाता टीएमसी का कोर वोटबैंक माना जाता है. हालांकि, मुस्लिम समुदाय को लेफ्ट और कांग्रेस के साथ-साथ अब बीजेपी भी अपने पाले में लाने की कवायद में जुटी है. 

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पश्चिम बंगाल में मुस्लिमों को नजरअंदाज कर किसी भी पार्टी के लिए चुनावी जंग जीतना आसान नहीं है. साल 2018 के बंगाल पंचायत चुनाव में 30 फीसदी मजबूत मुस्लिम वोटों को लुभाने के लिए बीजेपी ने मुस्लिम सम्मेलन भी किए थे. साथ ही बीजेपी ने मुस्लिम समुदाय से 850 से अधिक लोगों को टिकट दिया था, जिसमें 27 को जीत मिली थी. 2016 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने 6 मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतारे थे. 

बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चे के प्रदेश अध्यक्ष अली हुसैन ने कहा कि पश्चिम बंगाल में मुसलमानों के मतों के सहारे कांग्रेस और लेफ्ट ने राज किया और 10 सालों से टीएमसी सत्ता में है. इसके बावजूद राज्य में मुस्लिमों की हालत जस के तस बनी हुई है. टीएमसी खुद राज्य में अल्पसंख्यकों के एकमात्र संरक्षक होने का दावा नहीं कर सकती.

उन्होंने कहा कि पिछले 10 सालों से टीएमसी ने मुस्लिम समुदाय के उत्थान के लिए कुछ भी ठोस नहीं किया है और केवल इमामों को वफादारी देने से समुदाय को मदद नहीं होने वाली है. बीजेपी सिर्फ नारेबाजी नहीं करती है बल्कि सबका साथ और सबका विकास के मूल मंत्र के साथ आगे बढ़ रही है. इस बात को बंगाल के मुस्लिम समुदाय भी अब समझ रहे हैं और अगले साल चुनाव में बीजेपी उनकी पहली पसंद बनेगी.

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