पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में स्थित मेरठ छावनी (मेरठ कैंट), भारत की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी छावनियों में से एक है. 1803 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा स्थापित इस छावनी का एक समृद्ध सैन्य इतिहास रहा है और इसने 1857 में भारत के स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत देखी थी. इसके नागरिक मामलों का प्रबंधन छावनी बोर्ड द्वारा किया जाता है.
1956 में स्थापित, मेरठ कैंट एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र है और मेरठ लोकसभा सीट के पांच हिस्सों में से एक है. इसमें छावनी बोर्ड का पूरा क्षेत्र और मेरठ नगर निगम के 21 वार्ड शामिल हैं.
मेरठ कैंट में 1957 से अब तक 16 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. यह निर्वाचन क्षेत्र 1991 में चुनावी नक्शे से कुछ समय के लिए हट गया था और 1993 के चुनावों से पहले इसे फिर से बहाल किया गया. जहां शुरुआती दशकों में कांग्रेस पार्टी का दबदबा रहा, वहीं 1993 के बाद से भाजपा ने इसे लगातार सात जीत के साथ अपना मजबूत गढ़ बना लिया है.
कुल मिलाकर, भाजपा ने यह सीट आठ बार जीती है, जबकि कांग्रेस ने सात बार जीत हासिल की है. यहां जीतने वाली एकमात्र अन्य पार्टी संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी थी, जिसने 1967 में जीत हासिल की थी.
2012 में, भाजपा के सत्य प्रकाश अग्रवाल ने लगातार तीसरी बार जीत हासिल की और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सुनील कुमार वाधवा को 3,613 वोटों के मामूली अंतर से हराया. 2017 में बसपा के सतेंद्र सोलंकी के खिलाफ उनकी जीत का अंतर काफी बढ़कर 76,619 वोट हो गया. भाजपा ने 2022 में अधिक उम्र के कारण सत्य प्रकाश अग्रवाल को टिकट नहीं दिया और उनकी जगह अमित अग्रवाल को मैदान में उतारा. अमित अग्रवाल, जो पहले 1993 और 1996 में दो बार जीत चुके थे, ने राष्ट्रीय लोक दल की मनीषा अहलावत को 118,072 वोटों के भारी अंतर से हराकर सीट बरकरार रखी. अमित अग्रवाल को 162,032 वोट मिले, जबकि मनीषा अहलावत को 43,960 वोट मिले.
मेरठ कैंट क्षेत्र में भाजपा का दबदबा लोकसभा चुनावों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है. 2009 से हुए सभी चार संसदीय चुनावों में इसने बढ़त बनाए रखी है- 2009 में BSP से 28,128 वोट, 2014 में 109,051 वोट और 2019 में 102,752 वोट ज्यादा मिले. 2024 में, समाजवादी पार्टी ने BSP की जगह मुख्य चुनौती देने वाली पार्टी के तौर पर ले ली, लेकिन BJP फिर भी 96,083 वोटों के बड़े अंतर से आगे रही. इस इलाके में BJP के अरुण गोविल को 161,862 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी की सुनीता वर्मा को 65,779 वोट मिले.
मेरठ कैंट विधानसभा क्षेत्र में रजिस्टर्ड वोटरों की संख्या लगातार बढ़ी है. 2012 में यह संख्या 346,745 थी, जो 2017 में बढ़कर 401,849 और 2019 में 418,042 हो गई. इसके बाद 2022 में यह बढ़कर 430,144 और 2024 के लोकसभा चुनावों में 441,117 हो गई.
वोटिंग प्रतिशत (टर्नआउट) काफी कम रहा है, जैसा कि कई शहरी और छावनी इलाकों में होता है. यह 2012 में 58.62 प्रतिशत, 2017 में 58.98 प्रतिशत, 2019 में 59.28 प्रतिशत और 2022 में 57 प्रतिशत था, जो 2024 में घटकर 55.61 प्रतिशत रह गया.
मेरठ कैंट हिंदू-बहुल निर्वाचन क्षेत्र है, जहां मुस्लिम वोटर भी अच्छी-खासी संख्या में हैं. यहां जाटों की भी अहम मौजूदगी है. कुल वोटरों में अनुसूचित जातियों की हिस्सेदारी 20.29 प्रतिशत है. यह पूरी तरह से शहरी सीट है और यहां कोई ग्रामीण वोटर नहीं है.
मेरठ छावनी की स्थापना 1803 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने की थी. यह उत्तर भारत के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों में से एक बन गया. 1857 का विद्रोह यहीं 10 मई को शुरू हुआ था, जब भारतीय सिपाहियों ने अंग्रेजों के खिलाफ बगावत कर दी, कई अधिकारियों को मार डाला और दिल्ली की ओर कूच किया. तब से यह छावनी एक बड़ा मिलिट्री बेस बनी हुई है और भारतीय सेना के ढांचे में अहम भूमिका निभा रही है.
मेरठ छावनी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उपजाऊ मैदानी इलाकों में स्थित है. छावनी क्षेत्र होने के कारण, यहां सड़क का ढांचा बहुत अच्छा है और इलाका सुनियोजित तरीके से बसाया गया है. यहां अपना कोई अलग रेलवे स्टेशन नहीं है. सबसे पास का मुख्य रेलवे स्टेशन मेरठ शहर में है. दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल ने पूरे मेरठ इलाके के साथ कनेक्टिविटी को बेहतर बनाया है. मेरठ शहर का केंद्र बहुत पास है, गाजियाबाद और नोएडा लगभग 70-80 किमी दूर हैं, हापुड़ लगभग 60 किमी दूर है, और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली लगभग 70-80 किमी दूर है. राज्य की राजधानी लखनऊ लगभग 450 किमी दूर है.
यहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से मिलिट्री बेस, व्यापार, छोटे व्यवसायों और सेवाओं पर टिकी है. यहां के कई निवासी सरकारी नौकरियों और उनसे जुड़े कामों में भी लगे हुए हैं. मतदाताओं के लिए मुख्य मुद्दों में नागरिक सुविधाएं, बुनियादी ढांचे का रखरखाव, बिजली की आपूर्ति, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं.
मेरठ छावनी में बीजेपी का प्रदर्शन लगातार मजबूत रहा है और पार्टी ने हमेशा बड़े अंतर से जीत हासिल की है. इस वजह से 2027 के विधानसभा चुनावों में भी इस सीट को बनाए रखने के मामले में वह सबसे आगे मानी जा रही है. उसके लिए असली चुनौती शायद विपक्ष से नहीं, बल्कि अपनी ही पार्टी के भीतर अति-आत्मविश्वास या ढिलाई से आ सकती है.
(अजय झा)
Manisha Ahlawat
RLD
Amit Sharma
BSP
Avnish Kajla
INC
Madan Singh Maan
AAAP
Nota
NOTA
Rajiv Kumar
IND
Upendra Kumar
APNJNTP
Om Prakash Kanik
PPID
Pawan Kumar Dhiman
NYAYPR
Deepak Saini
IND
Dr.sudhir Agrawal
SamVP
Rakesh Parjapati
RSPS
Deepak Sirohi
SHS
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की कानून व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर पिछली सरकारों पर निशाना साधा है. सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में आम जनता की आवाज नहीं सुनी जाती थी और अपराधियों को संरक्षण मिलता था. उन्होंने कहा कि आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. अब अगर कोई अपराध करता है तो उस पर तुरंत कठोर कार्रवाई की जाती है. आज प्रदेश में कोई भी गुंडा टैक्स वसूलने की हिम्मत नहीं कर सकता.
पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने मिर्जापुर के चुनार में घोषणा की कि उनकी नई पार्टी जननीति भारत आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में भाग लेगी. उन्होंने कहा कि पार्टी मजबूत उम्मीदवार मिलने पर सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी.
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी के सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अपनाया है. जांच के दौरान यह बात उजागर हुई कि बिना किसी फॉर्म 8 के आवेदन के ही 10,000 से अधिक मतदाताओं के नाम और उनके पिता के नाम में बदलाव कर दिए गए. चुनाव आयोग ने इस मामले को केवल एक लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर अपराध माना है. इसके बाद संबंधित अधिकारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों के खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की गई है.
उत्तर प्रदेश में शनिवार को मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है. इस अभियान के तहत प्रदेश के सभी जिलों में सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक विशेष कैंप लगाए गए हैं.
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षक और स्नातक मतदाता सरकार से बुरी तरह नाराज हैं. उन्होंने दावा किया कि जनता ने बड़े पैमाने पर बीजेपी के खिलाफ मतदान करना शुरू कर दिया है. अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि अपनी हार सामने देखकर बीजेपी ने आगरा, फतेहपुर, इटावा, औरैया, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और नोएडा जैसे कई जिलों में चुनावी धांधली करने की कोशिश की. प्रशासन और अधिकारियों के जरिए वोट डालने से रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन जनता सब समझ चुकी है और बीजेपी की हार तय है.
बिजनौर की सियासत में गन्ने की मिठास के साथ जातीय समीकरणों का भी अपना गणित है. आठ विधानसभा सीटों वाले इस जिले में BJP-सपा की लड़ाई, दलित-मुस्लिम वोट और 2024 लोकसभा चुनाव में नगीना सीट पर चंद्रशेखर आजाद की जीत ने सियासी तस्वीर को खास बना दिया. आइए जानते हैं इस जिले की और क्या खासियत है.
बदायूं की पूर्व सांसद संघमित्रा मौर्य को 2024 में BJP ने टिकट नहीं दिया था. इसके बाद उनकी नाराजगी और राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं होती रहीं. पिता स्वामी प्रसाद मौर्य के कांग्रेस के साथ आने के बाद बिल्सी से चुनाव लड़ने की अटकलें तेज हुईं. अब संघमित्रा ने आज तक से बातचीत में BJP छोड़ने की चर्चा खारिज की है.
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पीलीभीत में वोटर लिस्ट की जांच के दौरान 10 हजार से ज्यादा ऐसी एंट्री मिलीं, जो जरूरी आवेदन के बिना की गई थीं. अब पूरे उत्तर प्रदेश में इसी तरह की गड़बड़ियों की जांच के आदेश दिए गए हैं.
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव रामपुर पहुंचे और जेल में बंद पार्टी नेता आजम खान से मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं. रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के छात्रों और एल्युमनी ने इस पूरे घटनाक्रम और असदुद्दीन ओवैसी के हालिया बयानों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.