पश्चिम बंगाल में चुनाव हो चुके हैं और अब चार मई को नतीजे आने वाले हैं. लेकिन बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा का एक पुराना इतिहास रहा है. इसी को देखते हुए चुनाव आयोग ने इस बार बहुत सख्त इंतजाम किए हैं. 700 से ज्यादा CAPF यानी केंद्रीय सुरक्षा बलों की कंपनियां तैनात किए जाएंगे. कोर्ट ने भी कह दिया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान पुलिस और प्रशासन चुनाव आयोग के अधीन काम करेंगे.
पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद जीती हुई पार्टी के कार्यकर्ता और हारी हुई पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट, तोड़फोड़ और हमले की घटनाएं पहले भी होती रही हैं. यह बंगाल की एक बड़ी समस्या रही है. इसी को रोकने के लिए इस बार चुनाव आयोग ने कमर कस ली है.
चुनाव आयोग ने क्या-क्या इंतजाम किए हैं?
चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी ने मिलकर कई कदम उठाए हैं. सबसे पहले सुरक्षा की बात करें तो 700 CAPF कंपनियां पूरे राज्य में तैनात रहेंगी. CAPF का मतलब है केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल जैसे CRPF, BSF वगैरह. ये केंद्र सरकार के जवान होते हैं जो राज्य पुलिस से अलग होते हैं. इन्हें खासतौर पर संवेदनशील इलाकों में लगाया गया है.
मतगणना केंद्रों यानी जहां वोट गिने जाएंगे, वहां तीन परतों में सुरक्षा होगी. यानी तीन अलग-अलग सुरक्षा घेरे. अंदर जाने के लिए QR कोड वाला पहचान पत्र जरूरी होगा. बिना इसके कोई भी अंदर नहीं जा सकेगा.
चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव अधिकारी के दफ्तरों में 24 घंटे 7 दिन कंट्रोल रूम चलेंगे जहां से पूरे राज्य पर नजर रखी जाएगी. कहीं भी कोई गड़बड़ी होते ही तुरंत कार्रवाई की जाएगी. चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि जो भी गड़बड़ी करेगा उसे बख्शा नहीं जाएगा.
कोर्ट ने क्या कहा?
कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा कि चुनाव की प्रक्रिया के दौरान राज्य का पुलिस और प्रशासन चुनाव आयोग के अधीन काम करेगा. यानी राज्य सरकार इन्हें अपने मन से नहीं चला सकती. यह एक बड़ी बात है क्योंकि इससे निष्पक्षता सुनिश्चित होती है.