पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सिटिजनशिप सर्टिफिकेट पर TMC और BJP के बीच जारी सियासी जंग के बीच जलपाईगुड़ी ज़िले में अब तक लगभग 42 लोगों को सिटिजनशिप सर्टिफिकेट मिल चुका है. इसके अलावा लगभग 700-800 लोग ऐसे हैं जिन्होंने नागरिकता पाने के लिए आवेदन किया हुआ है और प्रमाण पत्र के इंतजार में है.
सीएए पर जारी सियासी घमासान के बीच आजतक की टीम कुछ ऐसे लोगों तक पहुंची जिनको हाल ही में नागरिकता का प्रमाण पत्र मिला है. जलपाईगुड़ी के भुजारी पाड़ा गांव में काफी लोग ऐसे हैं, जो 1971 के बाद बांग्लादेश से भारत आकर बस गए थे.
ये सभी हिंदू शरणार्थी हैं. इन्हीं में से एक नारायण मंडल हैं जिन्हें एक हफ्ते पहले ही नागरिकता प्रमाणपत्र हासिल हुआ है.
नारायण और उसका परिवार रातोंरात बांग्लादेश के ढाका से भारत आ गया था. नारायण के मुताबिक उन्हें जमीन-जायदाद, पालतू पशु और धान की लहलहाती फसल छोड़ कर यहां आना पड़ा क्योंकि उनके गांव में लूटपाट शुरू हो चुकी थी और जान जाने का खतरा हो गया था.
नारायण सपरिवार ढाका से राजशाही होते हुए कूचबिहार के माथाभांगा से नदी पार कर भारत पहुंचे और माथाभांगा में ही बस गए. कुछ साल माथाभांगा रहने के बाद नारायण पत्नी और बच्चों के साथ जलपाईगुड़ी आ गए.
सिटिजनशिप सर्टिफिकेट से मिली राहत
बातचीत में नारायण ने सिटिजनशिप सर्टिफिकेट दिखाते हुए बताया कि उनके पास भारत के कई सारे पहचान पत्र हैं. उनके पास आधार कार्ड, पैन कार्ड से लेकर वोटर आईडी कार्ड और राशन कार्ड भी है, लेकिन इनके बावजूद असुरक्षा का भाव बना हुआ था. पता नहीं कब उनको वापस बांग्लादेश ना भेज दिया जाए.
ऐसे में हाल के दिनों में सीएए के तहत नारायण ने नागरिकता के लिए आवेदन किया और एक हफ्ते पहले ही उन्हें सिटिजनशिप सर्टिफिकेट हासिल हो गया है. अब चहकते अंदाज में नारायण बताते है कि उनकी चिंता अब दूर हो चुकी है.
नारायण की पत्नी रेणु को भी सिटिजनशिप सर्टिफिकेट मिल चुका है. समूचे जलपाईगुड़ी में नारायण जैसे 42 लोगों को अब तक सिटिजनशिप सर्टिफिकेट मिल चुका है और 700 से 800 ऐसे शरणार्थी हैं जिन्होंने अब तक आवेदन किया हुआ है.
इसी गांव में सपन मंडल भी हैं जिनकी उम्र 50 साल है. सपन मंडल जब एक साल के थे तब अपने माता पिता और परिवार के साथ बांग्लादेश से भागकर भारत पहुंचे थे. सपन का जन्म भले ही बांग्लादेश में हुआ लेकिन उनकी पढ़ाई लिखाई भारत में ही हुई. लेकिन सपन मंडल भी चाहते हैं कि उनकी नागरिकता का प्रमाण पत्र मिले और वह अपने परिवार के साथ सिटिजनशिप सर्टिफिकेट के लिए आवेदन करने वाले हैं.
सपन का कहना है कि भारत में पढ़ाई लिखाई और सब कुछ होने के बावजूद उनके मन में एक डर बना रहता है, और यही वजह है कि जब सरकार सुविधा दे रही है तो वो उसे ग्रहण करेंगे और नागरिकता के लिए आवेदन करेंगें.
ऐसे में जब सपन से सवाल पूछा गया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तो कह रही हैं कि किसी को सीएए की आवश्यकता नहीं है और उनके रहते किसी को बंगाल नहीं छोड़ना पड़ेगा. इस पर सपन का कहना है कि भविष्य में क्या होगा किसी को नहीं मालूम और ऐसे में निश्चिंत होने के लिए नागरिकता प्रमाण पत्र उनके लिए जरूरी है.
इसी गांव के राजीव लोचन बाला भी इसी तरह की सोच रखते हैं. राजीव का जन्म पश्चिम बंगाल में ही हुआ लेकिन उनके पिता और उनके दादा दादी बांग्लादेश से भारत आए थे. हाल ही में उनकी दादी ढाकेश्वरी बाला को भी सिटिजनशिप सर्टिफिकेट मिला है.
राजीव लोचन भी मानते हैं कि आधार कार्ड या वोटर आईडी कार्ड समेत तरह-तरह के पहचान पत्र होने के बावजूद बांग्लादेश से आए लोगों के पास सिटिजनशिप सर्टिफिकेट होना जरूरी है, ताकि निश्चिंत मन से वह रह पाए.