बुधवार की शाम अगर आप दक्षिण चेन्नई के टी नगर इलाके में होते, तो आपको लगता कि आप किसी नेता की रैली में नहीं बल्कि किसी सुपरस्टार की फिल्म के 'फर्स्ट डे फर्स्ट शो' में आ गए हैं. नजारा कुछ ऐसा था कि गलियों से लेकर छतों तक सिर्फ लोग ही लोग नजर आ रहे थे. छोटे-छोटे बच्चे छतों पर खड़े होकर सीटियां बजा रहे थे और सड़कों पर बस एक ही नाम गूंज रहा था 'थलपति... थलपति!'
दरअसल, ये मौका था साउथ के सुपरस्टार और अब नेता बन चुके विजय की चुनावी रैली का. माहौल ऐसा कि राजनीति और फिल्मी दीवानगी के बीच का अंतर ही खत्म हो गया.
जैसे ही विजय अपनी कैंपेन गाड़ी के ऊपर सवार होकर सड़कों पर निकले, नजारा एकदम फिल्मी हो गया. बैकग्राउंड में गाना बज रहा था 'उंगा विजय, उंगा विजय, तनी आल इल्लई, कदल नान...' यानी आपका विजय अकेला नहीं है, वो एक समंदर है, वो आम आदमी की आवाज है. जैसे फिल्मों में हीरो की एंट्री पर शोर मचता है, ठीक वैसा ही शोर यहां था. उनके स्वागत में चार सजे-धजे घोड़े खड़े थे, जिन्हें देखकर लग रहा था कि यह कोई चुनावी रैली नहीं बल्कि किसी फिल्म का ग्रैंड प्रीमियर है. चेन्नई की सड़कों पर सिर्फ विजय शो का जादू चल रहा था, जिसने पूरे शहर को अपने कब्जे में ले लिया था. इस दौरान उन्होंने चेन्नई की तीन बड़ी सीटों टी नगर, थाउजेंड लाइट्स और एग्मोर में धुआंधार रोड शो किया,लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा टी नगर की है.
टी नगर चेन्नई का वो इलाका है जिसे शहर का सबसे बड़ा शॉपिंग हब कहते हैं. रंगनाथन स्ट्रीट जैसी मशहूर जगहें यहीं हैं, जहां कपड़ों और गहनों की बड़ी-बड़ी दुकानें सजी रहती हैं. लेकिन राजनीति के मामले में भी यह सीट बड़ी दिलचस्प है. 2021 के चुनाव में यहां ऐसी कांटे की टक्कर हुई थी कि आप सुनकर हैरान रह जाएंगे. पिछली बार डीएमके ने यहां सिर्फ 137 वोटों के मामूली अंतर से जीत दर्ज की थी. यानी हार-जीत का फासला इतना कम था कि पलड़ा किसी भी तरफ झुक सकता था.
कौन किसके सामने खड़ा है?
विजय की पार्टी टीवीके ने यहां से बुसी आनंद को मैदान में उतारा है. आनंद सिर्फ उम्मीदवार नहीं हैं, बल्कि विजय के सबसे भरोसेमंद साथी माने जाते हैं. उन्होंने पार्टी को खड़ा करने के लिए जमीन पर बहुत मेहनत की है, इसलिए विजय खुद उनके लिए पसीना बहा रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ मुकाबला भी कम दिलचस्प नहीं है. उनके सामने मैदान में हैं राजा अनबाझगन. ये दिवंगत पूर्व विधायक जे. अनबाझगन के बेटे हैं. जे. अनबाझगन वही शख्स थे जो कोरोना काल में लोगों की सेवा करते हुए अपनी जान गंवा बैठे थे. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने उनकी वफादारी का सम्मान करते हुए टी नगर में बने एक फ्लाईओवर का नाम भी उनके नाम पर रखा है. अब उनके बेटे अपनी विरासत बचाने की जंग लड़ रहे हैं.
पूरी शाम टी नगर की सड़कों पर जो कुछ भी हुआ, उसने एक बात साफ कर दी कि विजय की फैन फॉलोइंग अब उनके वोट बैंक में बदलने को बेताब है. लोग उन्हें सिर्फ एक एक्टर के तौर पर नहीं देख रहे, बल्कि एक ऐसे लीडर के तौर पर देख रहे हैं जो उनकी बात सुनेगा. जब रैली खत्म हुई, तो लोगों के जहन में राजनीति के आंकड़े कम और विजय का वो फिल्मी अंदाज ज्यादा था.
देखना दिलचस्प होगा कि सड़कों पर दिखी ये 'सीटियों वाली भीड़' वोटिंग मशीन तक पहुंचती है या नहीं. फिलहाल तो चेन्नई में सिर्फ थलपति का नाम गूंज रहा है.