हर चुनाव के अपने सितारे होते हैं, और कभी-कभी कुछ सितारे गुमनाम भी रह जाते हैं. इस साल तमिलनाडु में ऐसा ही एक नाम रहा, K अन्नामलाई. IPS अधिकारी से नेता बने अन्नामलाई कभी राज्य में BJP के विस्तार की सबसे मजबूत उम्मीद माने जाते थे. लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव में वह उम्मीदवारों की सूची में भी शामिल नहीं थे.
BJP ने लंबी अवधि की रणनीति के बजाय AIADMK के साथ गठबंधन का रास्ता चुना. इसी फैसले ने अन्नामलाई को मुख्य मंच से दूर कर दिया. कुछ समय पहले तक अन्नामलाई हर जगह दिखते थे. सड़क से लेकर सुर्खियों तक, लेकिन इस बार विधानसभा चुनाव के दौरान उनकी गैरमौजूदगी खुद एक बड़ा राजनीतिक संदेश बन गई.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में विजय की TVK 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. हालांकि बहुमत से 9 सीट दूर है. BJP, जिसने AIADMK के साथ गठबंधन किया था, सिर्फ एक सीट जीत सकी. AIADMK को 47 सीटें मिलीं. BJP ने उधगमंडलम सीट मात्र 900 वोटों के अंतर से जीती.
नतीजों के बाद अन्नामलाई ने विजय और TVK को बधाई देते हुए कहा कि लोगों ने वोट खरीदने और वंशवादी राजनीति को नकार दिया है. उन्होंने इसे राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव बताया. अन्नामलाई अगस्त 2020 में BJP में शामिल हुए. कर्नाटक में IPS अधिकारी रहते हुए उनकी छवि सख्त और ईमानदार अफसर की रही है.
BJP में आने के एक साल के भीतर ही उन्हें BJP का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया. उनका उभार तेज और असामान्य था. उन्होंने युवाओं से सीधे संवाद, सोशल मीडिया और आक्रामक राजनीति के जरिए अपनी पहचान बनाई. उन्होंने DMK और AIADMK पर खुलकर हमला किया, जो BJP की गठबंधन राजनीति से अलग रणनीति थी.
इससे उन्हें लोकप्रियता मिली, लेकिन टकराव भी बढ़ा. साल 2021 के विधानसभा चुनाव में अन्नामलाई ने अरावकुरिची से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए. उन्हें 68,553 वोट मिले, जबकि DMK उम्मीदवार को 93,369 वोट मिले. विशेषज्ञों के मुताबिक यह सीट रणनीतिक रूप से कठिन थी, जहां बड़ा अल्पसंख्यक वोट बैंक DMK के साथ था.
हार के बावजूद अन्नामलाई चर्चा में बने रहे. उन्होंने खुद को भ्रष्टाचार विरोधी चेहरा बनाया और लगातार सरकार पर हमले किए. लेकिन उनकी आक्रामक शैली AIADMK के साथ रिश्तों में खटास का कारण बनी. साल 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले BJP और AIADMK का गठबंधन टूट गया. इसकी बड़ी वजह अन्नामलाई के बयान माने गए.
इनमें उन्होंने AIADMK के दिग्गज नेताओं पर टिप्पणी की थी. AIADMK नेतृत्व ने सार्वजनिक रूप से कहा कि अन्नामलाई के बयान गठबंधन टूटने की वजह बने. अन्नामलाई ने कोयंबटूर से चुनाव लड़ा, लेकिन 17,800 वोटों से हार गए. इन नतीजों ने यह साफ किया कि बिना गठबंधन BJP के लिए तमिलनाडु में जीत आसान नहीं है.
साल 2025 में BJP ने रणनीति बदली. अन्नामलाई की जगह नैनार नागेंद्रन को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया. यह बदलाव AIADMK के साथ रिश्ते सुधारने की दिशा में कदम माना गया. साल 2026 चुनाव में अन्नामलाई को टिकट नहीं दिया गया और उनकी भूमिका सीमित कर दी गई. यह संकेत था कि पार्टी ने गठबंधन को प्राथमिकता दिया है.
इसके लिए BJP ने अपने सबसे चर्चित चेहरे को पीछे कर दिया. उम्मीदवार न होने के बावजूद अन्नामलाई चुनाव में सक्रिय रहे. उन्होंने स्टार प्रचारक के तौर पर रैलियां, रोड शो और जनसभाएं कीं. उन्होंने खुद को एक कार्यकर्ता के रूप में पेश किया और गठबंधन को मजबूत करने में जुटे रहे. वो तमिलनाडु, पुडुचेरी से केरल तक सक्रिय रहे.
तमिलनाडु में BJP का वोट शेयर लंबे समय से सीमित रहा है. 2011 में 2.22%, 2016 में 2.84%, 2021 में 2.6% और 2026 में 2.9%. हालांकि 2024 लोकसभा चुनाव में यह 11.2% तक पहुंचा, लेकिन सीट नहीं मिली. अन्नामलाई के समर्थकों का मानना है कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं मिला. वहीं कुछ विशेषज्ञ उन्हें भविष्य का बड़ा चेहरा मानते हैं.
फिलहाल, अन्नामलाई भले ही मुख्य मंच से दूर हों, लेकिन उनकी राजनीतिक कहानी खत्म नहीं हुई है. उनकी गैरमौजूदगी ही आज तमिलनाडु में BJP की सबसे बड़ी कहानी बन गई है.