तमिलनाडु में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और कांग्रेस के बीच चुनावी गठबंधन करीब-करीब तय हो गया है. राहुल गांधी के साथ हुई बातचीत के बाद आए सकारात्मक नतीजों ने दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन की राह बनाई है. हालांकि, कांग्रेस अभी भी राज्य में 'पावर शेयरिंग' यानी सत्ता में भागीदारी का विकल्प तलाश रही है, लेकिन रणनीतिक रूप से वह इस मुद्दे पर सार्वजनिक चर्चा नहीं करेगी.
सीट शेयरिंग (सीटों के बंटवारे) की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी अब मुकुल वासनिक को सौंपी गई है, जिसके कारण गिरीश चोडनकर की भूमिका सीमित हो जाएगी. इसके साथ ही, तमिलनाडु में कांग्रेस की चुनाव पर्यवेक्षक समिति का विस्तार करते हुए इसके सदस्यों की संख्या 5 से बढ़ाकर 8 कर दी गई है.
गठबंधन के इस औपचारिक कदम से राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है.
राहुल गांधी की दखल से सुलझा मामला
गठबंधन को लेकर पिछले कुछ वक्त से चल रही अटकलों पर अब विराम लग गया है. सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी ने व्यक्तिगत रूप से इस मामले में रुचि ली और डीएमके नेतृत्व से बातचीत की. इस उच्च स्तरीय संवाद के बाद दोनों दल एक बार फिर साथ चुनाव लड़ने पर सहमत हुए हैं.
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सीट शेयरिंग और सांगठनिक बदलाव
कांग्रेस ने राज्य में अपनी चुनावी तैयारियों को धार देने के लिए मुकुल वासनिक पर भरोसा जताया है. सीट बंटवारे की जिम्मेदारी उन्हें मिलने से पार्टी के अंदर संगठनात्मक बदलाव की आहट भी देखी जा रही है. वहीं, चुनाव पर्यवेक्षक समिति में तीन नए सदस्यों की बढ़ोतरी दर्शाती है कि कांग्रेस तमिलनाडु के हर जिले और विधानसभा क्षेत्र में जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत करना चाहती है.
पावर शेयरिंग पर कांग्रेस की रणनीति
तमिलनाडु में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा सवाल सत्ता में भागीदारी का रहा है. हालांकि डीएमके के साथ गठबंधन पक्का हो गया है, लेकिन कांग्रेस 'पावर शेयरिंग' के विकल्प को पूरी तरह छोड़ना नहीं चाहती. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व बंद कमरों में इस पर चर्चा जारी रखेगा, जिससे चुनाव नतीजों के बाद सत्ता में अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित की जा सके.