2011 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान, मशहूर कॉमेडी एक्टर वदिवेलु ने डीएमके के लिए बड़े जोर-शोर से प्रचार किया था, उन्होंने अपनी हाजिरजवाबी और कटाक्ष के हुनर का इस्तेमाल विजयकांत का मजाक उड़ाने के लिए किया, जिन्होंने उस चुनाव में जयललिता की अन्नाद्रमुक (AIADMK) के साथ गठबंधन किया था.
जब AIADMK-DMDK गठबंधन भारी बहुमत से सत्ता में आया, तो वदिवेलु को तमिल फिल्म इंडस्ट्री से प्रभावी रूप से ब्लैकलिस्ट कर दिया गया. यह वह दौर था, जब वदिवेलु अपने करियर के शिखर पर थे और किसी फिल्म में उनकी मौजूदगी बॉक्स ऑफिस की सफलता की गारंटी मानी जाती थी. ऐसा नहीं था कि विजयकांत या जयललिता की ओर से कोई सार्वजनिक बयान जारी किया गया था कि "उसे काम पर मत रखो", बल्कि यह फिल्म इंडस्ट्री द्वारा खुद पर लागू किया गया एक तरह का 'फ्रीज' था. कोई भी नई सत्ता के गुस्से का शिकार नहीं होना चाहता था.
वदिवेलु इंडस्ट्री के लिए 'अछूत' बन गए थे और एक इंटरव्यू में उन्होंने स्वीकार किया था कि वे बस अपने फोन की घंटी बजने का इंतजार करते रहते थे. पिछले दशक में उन्होंने कुछ फ़िल्में कीं, लेकिन 2023 की फिल्म 'मामन्नन' में उनके दमदार अभिनय ने सबका ध्यान खींचा, जिसका निर्माण संयोग से उनके सह-अभिनेता उदयनिधि स्टालिन ने किया था.
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साथी ही कर रहे 'सियासत'
शायद इसी तरह के अंजाम के डर ने तमिल सिनेमा के सितारों को 2016 और 2021 में वदिवेलु जैसी हिम्मत दिखाने से रोका था. लेकिन 2026 का चुनाव काफी हद तक 'विजय का चुनाव' बनता जा रहा है, और अब कॉलीवुड (तमिल फिल्म इंडस्ट्री) अभियान के आखिरी पड़ाव में पूरी ताकत के साथ खुलकर अपने राजनीतिक रंग दिखा रहा है. इनमें प्रकाश राज भी शामिल हैं, जो संयोग से विजय की आखिरी फिल्म 'जन नायकन' में उनके साथ काम कर रहे हैं. प्रकाश राज, जिन्होंने ब्लॉकबस्टर फिल्म 'घिल्ली' में विजय के किरदार के साथ जबरदस्त टक्कर ली थी (कहा जाता है कि फिल्म में प्रकाश राज द्वारा तृषा के लिए इस्तेमाल किए गए शब्द 'चेल्लम' के संदर्भ में, विजय असल जिंदगी में भी राज को 'चेल्लम' कहकर बुलाते हैं), उन्होंने हाल ही में एक कड़ा बयान दिया.
प्रकाश राज ने कहा कि अगर उन्हें कोई अभिनेता पसंद है, तो वे उसके लिए सीटी तो बजा सकते हैं, लेकिन राज्य की बागडोर उसके हाथ में नहीं सौंप सकते. उन्होंने कहा, "राजनीति अलग है और सिनेमा अलग है," और सवाल उठाया कि कैसे विजय या उनके ड्राइवर का बेटा अचानक सत्ता के शीर्ष पदों पर बिठाए जा सकते हैं.
हालांकि प्रकाश राज विवादास्पद मुद्दों पर विजय की राय मांगने में सही हैं, लेकिन भारत का संविधान किसी अभिनेता या ड्राइवर के बेटे को चुनाव लड़ने से नहीं रोकता. सिनेमा के दिग्गज कमल हासन ने भी 2021 का चुनाव लड़ा था और आज राज और हासन खुद को एक ही पाले में पाते हैं, जहां वे द्रमुक (DMK) का पक्ष ले रहे हैं. उदयनिधि स्टालिन भी एक अभिनेता-निर्माता रहे हैं और उन्हें जल्दी ही उप-मुख्यमंत्री के पद पर प्रमोट किया गया. प्रकाश राज खुद 2017 के आसपास खुले तौर पर राजनीति में आए और 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ा, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा. ठीक वैसे ही विजय ने भी कदम बढ़ाया है, जिन्होंने 2024 में अपनी पार्टी 'तमिझगा वेत्री कज़गम' (TVK) की स्थापना की.
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'बाहुबली' में कट्टप्पा की भूमिका निभाने वाले सत्यराज स्वीकार करते हैं कि वे विजय के प्रशंसक हैं और चाहते हैं कि वे केवल सिनेमा में ही बने रहें. यह कहने का एक अलग तरीका है कि वो उन्हें चुनाव हारते हुए देखना चाहते हैं. हालांकि सत्यराज, जो विजय की 'नियो-द्रविड़ियन' राजनीति के आलोचक हैं, द्रमुक (DMK) का समर्थन कर रहे हैं, वहीं उनके बेटे अभिनेता सिबी सत्यराज का झुकाव टीवीके की ओर है. यह बिल्कुल वैसा ही है जैसा कि तमिलनाडु के कई परिवारों में पीढ़ीगत अंतर देखने को मिल रहा है.
विजय अकेले ऐसे अभिनेता नहीं हैं, जिन्हें अपने इंडस्ट्री के साथियों से प्यार और नफरत दोनों मिल रही है. अभिनेता-निर्देशक सुंदर सी, जो अभिनेत्री और भाजपा नेता खुशबू के पति हैं, मदुरै सेंट्रल से द्रमुक के दिग्गज नेता और आईटी मंत्री पी. थियागराजन के खिलाफ एनडीए (NDA) के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं. प्रकाश राज ने सुंदर पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि जो व्यक्ति अपना नाम उम्मीदवार के रूप में घोषित होने से तीन दिन पहले तक फिल्म की शूटिंग में व्यस्त था, वह इस मंदिर नगरी के लिए एक आदर्श विधायक कैसे हो सकता है. ऐसा लगता है मानो फिल्म का कोई सीन अब असल जिंदगी की सभाओं में दोहराया जा रहा है.
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कमल हासन की पार्टी कर रही है DMK का समर्थन
कमल हासन, जिनकी पार्टी इस बार चुनाव नहीं लड़ रही है और द्रमुक (DMK) का समर्थन कर रही है, उन्होंने विजय का नाम लिए बिना दो निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ने के लिए उनकी आलोचना की. यह केवल आलोचना के लिए की गई आलोचना ही नजर आती है, क्योंकि विजय एक से अधिक सीटों से चुनाव लड़ने वाले पहले व्यक्ति नहीं हैं. दूसरी ओर, हासन खुद भी निशाने पर हैं क्योंकि वे कोयंबटूर में द्रमुक के सेंथिल बालाजी, त्रिची में के.एन. नेहरू और चेन्नई में शेखर बाबू के लिए प्रचार कर रहे हैं. गौरतलब है कि 2021 में खुद कमल हासन ने ही बालाजी को "भ्रष्टाचार का चेहरा" करार दिया था.
संयोग से, खुशबू विजय को अपना भाई मानती हैं और उनके पास उनके बारे में कहने के लिए केवल अच्छी बातें ही हैं. यह तब है जब विजय की पार्टी टीवीके, एनडीए (NDA) के वोटों में सेंध लगा सकती है और तमिलनाडु में उसकी सत्ता में आने की संभावनाओं को प्रभावित कर सकती है. इसी तरह, सुंदर सी ने भी विजय के बारे में कुछ भी नकारात्मक बोलने से परहेज किया है.
2026 के अभियान के इस आखिरी पड़ाव में फिल्मी सितारों के एंट्री ने यह साबित कर दिया है कि तमिल सिनेमा में अब कोई भी राजनीति से अछूता नहीं रह गया है. यहां तक कि अजीत और रजनीकांत, जो अबतक राजनीति से दूर रहे हैं, वे भी खुद को तमिलनाडु की राजनीति के इस दलदल में घिरा पा रहे हैं.
कॉलीवुड में किसे 'रेड कार्ड'
अजीत को लंबे समय से कॉलीवुड में विजय के प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा जाता रहा है, इसलिए अन्नाद्रमुक (AIADMK) के नेता एसपी वेलुमणि जैसे लोगों ने खुद को अजीत के शुभचिंतक के रूप में पेश करने की कोशिश की है. उनकी कोशिश यह है कि विजय के प्रति अजीत के प्रशंसकों की नापसंदगी का फायदा उठाकर उन्हें अपने पाले में लाया जा सके. यह सब तब हो रहा है जब व्यक्तिगत स्तर पर 'थाला' (जैसा कि अजीत को बुलाया जाता है) और 'थलपति' विजय अच्छे दोस्त हैं. वहीं, टीवीके नेता आधव अर्जुन द्वारा रजनीकांत पर की गई अभद्र टिप्पणियों के बाद, दोनों द्रविड़ दलों (DMK और AIADMK) को उम्मीद है कि रजनीकांत के प्रशंसक विजय का साथ नहीं देंगे.
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कई लोग कमल हासन, प्रकाश राज और सत्यराज द्वारा किए जा रहे इन हमलों को विजय के 'थलपति' वाले सुरक्षा कवच को तोड़ने और उनके चेहरे से फिल्मी चमक उतारने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं. इस तीखी आलोचना ने कई लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या द्रमुक (DMK) को अब शहरी क्षेत्रों में टीवीके (TVK) से खतरे की आहट होने लगी है.
4 मई के बाद जब चुनाव का शोर थमेगा, तो इसका कॉलीवुड के लिए क्या मतलब होगा? विजय फिलहाल नंबर वन स्टार हैं, जिनकी बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त पकड़ है. अगर टीवीके सत्ता के गलियारों में अपनी जगह बनाने में कामयाब रहती है, तो 'वदिवेलु इफेक्ट' एक बार फिर सक्रिय हो सकता है और यदि ऐसा नहीं भी होता है, तो भविष्य के बड़े प्रोजेक्ट्स सत्ताधारी गठबंधन की नजरों में 'राजनीतिक रूप से सही' दिखने की कोशिश करेंगे, चाहे वह कलाकारों का चयन हो या क्रू का.
4 मई केवल तमिलनाडु की सत्ता के केंद्र 'फोर्ट सेंट जॉर्ज' के अगले उत्तराधिकारी का फैसला नहीं करेगी, बल्कि यह भी तय करेगी कि कॉलीवुड में किसे 'रेड कार्ड' मिलेगा और किसके लिए 'रेड कार्पेट' बिछाए जाएंगे.