कोलकाता में स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर चल रहे विवाद के बीच सियासत तेज हो गई है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सखावत मेमोरियल स्कूल पहुंचने को लेकर पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने तंज कसा है. उन्होंने कहा कि यह सब सिर्फ पब्लिसिटी के लिए किया जा रहा है और इसमें कोई सच्चाई नहीं है.
शुभेंदु अधिकारी का कहना है कि टीएमसी के आरोप बेबुनियाद हैं और लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश है. उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी हार की आशंका के चलते ऐसे मुद्दे उठा रही है. उनके मुताबिक, बीजेपी को सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्या से अधिक सीटें मिलेंगी.
क्या है पूरा मामला, क्यों बढ़ा विवाद
दरअसल, एक दिन पहले गुरुवार को स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया था. टीएमसी नेताओं ने आरोप लगाया कि स्ट्रॉन्ग रूम में गड़बड़ी हो रही है और इसके खिलाफ धरने पर बैठ गए. इसके बाद बीजेपी कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंच गए और दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और नोकझोंक देखने को मिली. उसके बाद, टीएमसी ने एक सीसीटीवी फुटेज भी जारी किया, जिसमें बैलेट बॉक्स के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया. इस मुद्दे पर पार्टी के नेता शशि पांजा और कुणाल घोष कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में धरने पर बैठ गए. मामला बढ़ता देख मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद सखावत मेमोरियल स्कूल पहुंचीं और वहां काफी देर तक रहीं.
इधर, चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर सफाई दी. आयोग ने कहा कि खुदीराम अनुशीलन केंद्र के सभी 7 स्ट्रॉन्ग रूम पूरी तरह सुरक्षित और सील हैं. यह प्रक्रिया उम्मीदवारों की मौजूदगी में पूरी की गई थी और आखिरी कमरा सुबह 5:15 बजे बंद किया गया था. आयोग के मुताबिक, जिस कमरे को लेकर भ्रम हुआ, वहां पोस्टल बैलेट की छंटनी का काम चल रहा था. इस बारे में पहले ही सभी पार्टियों को जानकारी दी गई थी. स्थिति साफ करने के लिए टीएमसी और बीजेपी के प्रतिनिधियों को बुलाकर सील बंद कमरे भी दिखाए गए, ताकि किसी तरह का शक न रहे.
अब इसी पूरे विवाद को लेकर शुभेंदु अधिकारी भी सखावत मेमोरियल स्कूल जाने वाले हैं, जहां दक्षिण कोलकाता और भवानीपुर के बूथों की ईवीएम और मतपेटियां रखी गई हैं. स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर शुरू हुआ यह मामला अब राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है, जहां दोनों पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं और चुनाव आयोग अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुका है.