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वीरा पासी के बहाने राहुल गांधी ने रायबरेली से अवध तक के दुर्ग को कैसे दुरुस्त कर लिया?

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली में 1857 के क्रांतिकारी वीरा पासी की मूर्ति का अनावरण किया. वीरा पासी के जरिए उन्होंने सिर्फ रायबरेली के सियासी समीकरण को ही नहीं, बल्कि अवध क्षेत्र को दुरुस्त करने के दांव चला है. समझें पूरा गणित.

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राहुल गांधी ने वीरा पासी की मूर्ति का अनावरण किया (Photo-INC)
राहुल गांधी ने वीरा पासी की मूर्ति का अनावरण किया (Photo-INC)

शतरंज के खेल में घोड़ा भले ही वजीर की तरह हर तरफ न चलता हो, लेकिन वह सिर्फ ढाई घर चलकर ऐसा चक्रव्यूह रच देता है, जिससे सामने वाले खिलाड़ी का निकलना आसान नहीं होता है.  लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी चार महीने के बाद अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली दौरे पर पहुंचे. राहुल गांधी ने अपने दो दिवसीय के दौरे में अपने सियासी दुर्ग को दुरुस्त करने के साथ-साथ सूबे में बिछी राजनीतिक बिसात पर कांग्रेस के लिए एक नई उम्मीद की किरण जगा गए? 

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के बीच राहुल गांधी दो दिन के रायबरेली दौरे पर पहुंचे. राहुल ने पहले दिन तीन जनसभाएं और 'महिला संवाद' करते हुए रायबरेली के साथ गांधी परिवार का नाता और यहां लोगों के साथ अपनापन जताने का प्रयास करते नजर आए. 

वहीं, राहुल गांधी दूसरे दिन गेस्ट हाउस में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और क्षेत्रीय जनता से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनी. इसके बाद लोधवारी गांव पहुंचे, जहां उन्होंने 1957 के क्रांतकारी वीरा पासी की प्रतिमा का अनावरण किया. वीरा पासी की जरिए सामाजिक न्याय के एजेंडे को सियासी धार देने के साथ-साथ रायबरेली से लेकर अवध तक के सियासी समीकरण साधने का दांव चला है? 

रायबरेली में वीरा पासी की मूर्ति का अनावरण
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रायबरेली के लोधवारी गांव में महाबली वीरा पासी की प्रतिमा का भव्य अनावरण किया.  वीरा पासी की मूर्ति कांग्रेस नेता और राही क्षेत्र के ब्लॉक प्रमुख धर्मेंद्र बहादुर सिंह उर्फ राजू यादव के द्वारा लगवाई गई थी.  इस दौरान राहुल गांधी ने जनसभा को भी संबोधित करते हुए 1957 के महान योद्धा और रायबरेली क्षेत्र के प्रतीक रहे वीरा पासी के गौरवशाली इतिहास को सराहा.  राहुल इस कदम को पासी समाज के बीच कांग्रेस की मजबूत पैठ बनाने की बड़ी रणनीति माना जा रहा है.

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राहुल गांधी ने कहा कि आज हम वीरा पासी को याद कर रहे हैं, लेकिन जब मैं भाषण सुन रहा था तो सोच रहा था कि जो विचारधारा अंबेडकर की थी.  आज उसे खत्म किया जा रहा है, ये मत सोचिए कि कोई मामूली किताब है, ये एक विचारधारा है जो अंबेडकर, गांधी और वीरा पासी के खून में थी. ये किताब आजादी के बाद लिखी गई और इसमें आपको कोई न कोई मिलेगा जो इसके लिए लड़ा था और मरा था. गुरुनानक-कबीर बुद्ध भगवान इन सबकी आवाज इस संविधान में है.

वारी पासी और आंबेडकर के बहाने RSS पर निशाना
राहुल गांधी ने कहा कि अगर हम वीरा पासी और अंबेडकर के सामने को हाथ जोड़ते हैं तो उनकी विचारधारा का सम्मान करना हमारी जिम्मेदारी है. अंबेडकर यहां आपके सामने बैठे होते, आप लोग उनके सामने नारे लगाते. इसके बाद बाहर जाकर अंग्रेजों से हाथ मिला लेते तो ये अंबेडकर की विचारधारा पर आक्रमण होता.  हम लोग फोटो के सामने हाथ जोड़ लेते हैं, लेकिन जब वीरा पासी की विचारधारा का अपमान किया जाता है, तो हम चुप हो जाते हैं.

राहुल गांधी ने कहा कि आपके मुंह के सामने आरएसएस के लोग संविधान को फाड़कर फेंकते हैं तो आप चुप हो जाते हैं. ये एक किताब नहीं बल्कि आपका खून है,  इसकी रक्षा करना आपकी और हमारी जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि वीरा पासी जी, अंबेडकर जी ने कहा था कि हिंदुस्तान में हर नागरिक एक समान है, हर व्यक्ति को अभ्यास का सही फल मिलना चाहिए और सभी को समान अधिकार मिलने चाहिए.

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कांग्रेस नेता ने कहा कि ये देश सबका है, किसी एक जाति या संगठन का नहीं है. यही बात देश का संविधान भी कहता है. ऐसे में संविधान में हिंदुस्तान के लोगों की आवाज है. संविधान की रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है. इस तरह से राहुल गांधी ने आरएसएस और बीजेपी को दलित विरोधी कठघरे में खड़े करते नजर आए. 

वीरा पासी के जरिए दुर्ग को दुरुस्त रखने का दांव

वीरा पासी 1857 की क्रांति में राजा राणा बेनी माधव के सेनापति थे. अंग्रेजों ने जब राणा बेनी माधव को गिरफ्तार कर रायबरेली की जेल में बंद कर रखा था तो वारी पासी ही जेल तोड़कर राणा बेनी माधव को बाहर निकाला था.  वीरा पासी के शौर्य और स्वाभिमान पर पासी समुदाय गर्व करता है. रायबरेली ही नहीं बल्कि अवध क्षेत्र में पासी समुदाय के लोग वीरा पासी को अपना मसीहा मानते हैं.  इसी राजनीतिक और सामाजिक महत्व को समझते हुए राहुल गांधी ने वीरा पासी की मूर्ति का अनावरण कर सियासी संदेश देने की कवायद की है.

रायबरेली की सियासत में पासी मतदाताओं की संख्या काफी अच्छी है, जो किसी भी कैंडिडेट की हार-जीत तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं. इसी सियासी और सामाजिक महत्व को समझते हुए राहुल गांधी ने वीरा पासी की मूर्ति का अनावरण किया. इस तरह बहुजन समाज के स्वाभिमान के बहाने अपने सियासी दुर्ग माने जाने वाले रायबरेली को दुरुस्त बनाए रखने का दांव चला है, जिसमें उन्होंने वीरा पासी और आंबेडकर के साथ संविधान के जरिए दलित समुदाय के विश्वास को जीतने का दांव चला है. 

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रायबरेली में सबसे बड़ा वोटबैंक पासी समुदाय का है. रायबरेली में करीब 5 लाख से ज्यादा पासी वोटर हैं. जिले की सभी विधानसभा सीटों पर पासी वोटर निर्णायक भूमिका में है. राहुल गांधी की 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली जीत में पासी वोटरों का अहम रोल था. इसके चलते ही राहुल गांधी ने रायबरेली जिले में ही नहीं बल्कि कांग्रेस ने सुशील पासी को पासी चेहरे के तौर आगे बढ़ाने का काम किया है. वीरा पासी की मूर्ति अनावरण के समय राहुल गांधी के साथ सुशील पासी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े नजर आए। 

रायबरेली से अवध क्षेत्र को साधने का प्लान
सूबे सियासी बिसात पर दलितों के भीतर 'पासी' समुदाय एक भले ही खामोश है, लेकिन बेहद ताकतवर माने जाते हैं. पासी समाज के वोटर सिर्फ रायबरेली नहीं बल्कि अवध इलाके में अच्छे-अच्छे राजनीतिक सूरमाओं के समीकरण बिगाड़ने की ताकत रखता है. सूबे में पासी वोट बैंक उत्तर प्रदेश की सत्ता की चाबी का एक अहम हिस्सा बन चुका है.

उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति (SC) यानी दलितों की आबादी करीब 21 फीसदी है. दलितों के भीतर सबसे बड़ा हिस्सा जाटव समाज का है, जो करीब 54 फीसदी है. लेकिन इसके ठीक बाद दूसरे नंबर पर सबसे बड़ी आबादी पासी समाज की है, जो कुल दलित आबादी का लगभग 16 फीसदी है, जो यूपी की कुल आबादी का करीब 3.2 फीसदी से अधिक है. 

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यूपी पासी समुदाय का सबसे मजबूत प्रभाव उत्तर प्रदेश के अवधऔर पूर्वांचल के क्षेत्रों में है, जहां पासी मतदाता हार-जीत तय करते हैं.  रायबरेली, अमेठी, लखनऊ,  बाराबंकी, हरदोई, उन्नाव, सीतापुर, कौशांबी, प्रयागराज और प्रतापगढ़ जिले में पासी वोटर अहम है. यूपी की लगभग 65 से 70 विधानसभा सीटों और 12 से 15 लोकसभा सीटों पर पासी मतदाता बेहद निर्णायक भूमिका में है. 

राहुल और अखिलेश का पासी समाज पर दांव
पासी समुदाय का सियासी झुकाव समय-समय पर बदलता रहा है, जिसने राज्य की सत्ता का रुख मोड़ा है. पासी वोटों के मिजाज में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखा जा रहा है, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का नारा देकर पासी समुदाय को अपने पाले में लाने के लिए बड़ी बिसात बिछाई है और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संविधान और आरक्षण के बहाने रायबरेली और अमेठी को नहीं साधा बल्कि दलित वोटबैंक का विश्वास जीतने में सफल रहे हैं. अब 2027 के चुनाव में पासी वोटों को जोड़े रखने के लिए वीरा पासी का दांव चला है. 

अखिलेश यादव ने गोमती रिवर फ्रंट पर महाराजा बिजली पासी की सोने की प्रतिमा लगाने का ऐलान किया, तो राहुल गांधी ने रायबरेली में वारी पासी की मूर्ति का अनावरण करके सियासी संदेश देने की कवायद की है.  उत्तर प्रदेश की राजनीति में पासी समुदाय की बढ़ती अहमियत को देखते हुए दांव चले जा रहे हैं. 
 

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