पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी विधानसभा सीट भवानीपुर में जैन मान स्तंभ और संत कुटिया गेट का उद्घाटन किया. चुनाव से ठीक पहले किए गए इस कार्य को इलाके के गुजराती, पंजाबी और जैन समुदाय के वोटर्स को अपनी ओर आकर्षित करने की रणनीतिक कोशिश माना जा रहा है. भवानीपुर सीट पर दीदी ने एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया शुरू होने के बाद से अब तक बूथ लेवल एजेंटों के साथ दो महत्वपूर्ण बैठकें की हैं.
पहली बैठक तब हुई, जब 44 हजार वोटर्स के नाम बाहर किए जाने की बात सामने आई थी और दूसरी बैठक हाल ही में उनके कालीघाट स्थित आवास पर हुई. इन बैठकों में ममता बनर्जी ने एजेंटों को 'डोर-टू-डोर' जाकर जेनुइन वोटर्स का नाम पक्का करने और 'मैन मार्किंग' करने की सख्त हिदायत दी है.
साल 2021 में नंदीग्राम से हारने के बाद उपचुनाव में भवानीपुर से जीतकर लौटीं ममता बनर्जी इस बार किसी भी तरह की ढील नहीं बरतना चाहतीं.
भवानीपुर की दिलचस्प डेमोग्राफी और वोटिंग पैटर्न
भवानीपुर विधानसभा सीट का जातीय समीकरण बेहद दिलचस्प है, जिसे मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा जा सकता है. यहां करीब 40 फीसदी बंगाली वोटर्स हैं, जबकि 40 फीसदी हिस्सा हिंदी भाषी वोटर्स का है, जिनमें बिहारी, मारवाड़ी, गुजराती और सिख समुदाय शामिल हैं. शेष 20 प्रतिशत मुस्लिम वोटर्स हैं. पारंपरिक रूप से मारवाड़ी और गुजराती वोटर्स का झुकाव भाजपा (BJP) की ओर माना जाता है, यही वजह है कि ममता बनर्जी इस बार इन समुदायों के धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों के जरिए उन्हें अपने खेमे में लाने का प्रयास कर रही हैं.
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10 साल में बढ़ा बीजेपी का ग्राफ
भले ही भवानीपुर टीएमसी का गढ़ रहा है, लेकिन पिछले एक दशक के आंकड़े बताते हैं कि बीजेपी यहां लगातार अपनी पकड़ मजबूत कर रही है. साल 2011 में बीजेपी को इस सीट पर महज 5,078 वोट मिले थे, लेकिन 2014 की मोदी लहर में यह आंकड़ा बढ़कर 47 हजार के पार पहुंच गया. 2019 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी उम्मीदवार माला रॉय यहां से महज 3,168 वोटों की लीड ही ले सकी थीं. इतना ही नहीं, 2015 के नगर निगम चुनाव में तो बीजेपी ने भवानीपुर का वार्ड नंबर 70 जीत कर सबको चौंका दिया था.
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ममता बनर्जी के जीत के मार्जिन में उतार-चढ़ाव
साल 2011 में पहली बार सत्ता में आने के बाद ममता बनर्जी ने भवानीपुर से उपचुनाव लड़ा और करीब 54 हजार वोटों के अंतर से जीती थीं. हालांकि, 2016 के विधानसभा चुनाव में उनकी जीत का मार्जिन घटकर 25 हजार रह गया. इसके बाद 2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी के शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने बीजेपी के रुद्रनील घोष को 28 हजार वोटों से हराया था. जीत के मार्जिन में आ रहे इस बदलाव ने ममता बनर्जी को पहले से ज्यादा सतर्क कर दिया है, जिससे वह अब बूथ मैनेजमेंट और हर वर्ग को साधने में जुटी हैं.
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रणनीतिक बढ़त और 'मैन मार्किंग'
मुख्यमंत्री का सीधा जोर अब बूथ लेवल पर है. उन्होंने अपने एजेंटों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे हर घर जाकर यह सुनिश्चित करें कि किसी भी असली मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से न कटे. जैन मान स्तंभ और संत कुटिया गेट का निर्माण इस बात का साफ संकेत है कि दीदी इस बार उन वोटर्स को भी रिझाना चाहती हैं, जो पारंपरिक रूप से बीजेपी समर्थक माने जाते रहे हैं.