पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. उससे पहले प्रदेश की राजनीति जो मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा में है वो है - स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR). राजधानी कोलकाता में आयोजित 49वें अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले का मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उद्धाटन किया. इस दौरान उन्होंने चुनाव आयोग पर SIR को लेकर तीखा हमला बोला.
मुख्यमंत्री ममता ने कहा कि राज्य में SIR प्रक्रिया के कारण पैदा हुए तनाव और घबराहट के चलते अब तक कम से कम 110 लोगों की मौत हो चुकी है. उन्होंने कहा कि SIR के तहत बुजुर्ग मतदाताओं को रोजाना स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन कैंपों में बुलाया जाता है, जहां उन्हें पांच से छह घंटे तक खुले में लाइन में खड़ा रहना पड़ता है. इससे उन्हें शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानियां हो रही हैं. ममता बनर्जी ने इसे आम जनता को भयभीत करने वाली प्रक्रिया बताया.
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने अपने 162वें कविता संग्रह की भी घोषणा की, जो इसी पुस्तक मेले में प्रकाशित होगा. इस किताब में SIR के कारण मतदाताओं को झेलनी पड़ रही पीड़ा पर आधारित 26 कविताएं शामिल होंगी, जो आम लोगों के दर्द और लोकतंत्र पर पड़ रहे प्रभाव को दर्शाएंगी.
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ममता ने चुनाव आयोग पर भी निशाना साधा और कहा कि “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” के नाम पर बंगाली सरनेम पर सवाल उठाए जा रहे हैं. उन्होंने खुद के नाम के उदाहरण दिए कि उन्हें ममता बनर्जी और ममता बंद्योपाध्याय दोनों नामों से जाना जाता है. ठाकुर को अंग्रेजों के दौर में टैगोर कहा गया. उन्होंने कहा कि अगर आज रबींद्रनाथ टैगोर जीवित होते, तो उन्हें भी SIR के दौरान ऐसे सवालों का सामना करना पड़ता.
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि बुजुर्गों से जन्म प्रमाण पत्र की मांग और परिवारों में बच्चों की उम्र का अंतर पूछना गैरजरूरी और लोगों को परेशान करने वाली प्रक्रिया है. उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का हवाला देते हुए कहा कि उनके जन्मदिन की सही तारीख भी दर्ज नहीं थी. ममता बनर्जी ने SIR को लोकतंत्र के खिलाफ बताते हुए इसे मानवीय बनाने की मांग की.