पश्चिम बंगाल में जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और चुनाव आयोग के बीच टकराव और गहराता जा रहा है. शनिवार को ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को एक और चिट्ठी लिखते हुए चुनाव आयोग पर राज्य की जमीनी हकीकत को न समझने और असंवेदनशील रवैया अपनाने का आरोप लगाया. यह नवंबर के बाद चौथा मौका है जब मुख्यमंत्री ने SIR प्रक्रिया के विरोध में सीधे CEC को चिट्ठी लिखी है.
अपनी चिट्ठी में ममता बनर्जी ने खास तौर पर बंगाल के प्रवासी मजदूरों और राज्य से बाहर रह रहे लोगों की समस्याओं का जिक्र किया. उन्होंने लिखा कि चुनाव आयोग ने बहुत देर से यह व्यवस्था दी कि कुछ मतदाता अपने अधिकृत पारिवारिक सदस्यों के जरिए सुनवाई में पेश हो सकते हैं, लेकिन यही सुविधा प्रवासी मजदूरों को नहीं दी गई. ममता ने इसे आयोग की संवेदनहीनता और जमीनी हालात की समझ की कमी बताया.
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मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग पर राजनीतिक पक्षपात और तानाशाही रवैये का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि जिस संवैधानिक संस्था से निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की उम्मीद की जाती है, वही संस्था अब ऐसे स्तर पर पहुंच गई है जो किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए बेहद चिंताजनक है. ममता का आरोप है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची में सुधार या समावेशन नहीं, बल्कि केवल नाम काटना और लोगों को बाहर करना नजर आ रहा है.
ममता ने चिट्ठी में कलम से भी लिखा मैसेज
ममता बनर्जी ने आयोग से अपील की कि आम नागरिकों को भेजे जा रहे नोटिस के कारण जो परेशानी, मानसिक तनाव और उत्पीड़न हो रहा है, उसे कम किया जाए. चिट्ठी में उन्होंने हाथ से लिखा कि उन्हें पता है कि शायद इस चिट्ठी का कोई जवाब या स्पष्टीकरण नहीं आएगा, लेकिन एक मुख्यमंत्री के रूप में उनका कर्तव्य है कि वे अपनी बात रिकॉर्ड पर रखें.
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ममता बनर्जी ने पहले भी लिखी चिट्ठी!
इससे पहले 3 जनवरी को लिखी चिट्ठी में भी ममता ने SIR प्रक्रिया को अव्यवस्थित, मनमाना और बिना तैयारी का अभ्यास बताया था. उन्होंने आरोप लगाया था कि अधिकारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं दिया गया, आईटी सिस्टम में खामियां हैं और आयोग की तरफ से कोई स्पष्ट योजना या समान टाइमलाइन नहीं है. मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया था कि व्हाट्सऐप और मैसेज जैसे अनौपचारिक माध्यमों से रोज नए निर्देश जारी किए जा रहे हैं.