पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के लिए निर्वाचन आयोग ने सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए हैं. आयोग का कहना है कि उसकी प्राथमिकता शांतिपूर्ण और पारदर्शी मतदान सुनिश्चित कराना है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पहले ही चुनावी गड़बड़ियों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' पॉलिसी की बात कह चुके थे, और अब आयोग ने इसे जमीन पर उतारते हुए बंगाल में पहले चरण के मतदान के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की कुल 2,407 कंपनियों की तैनाती का फैसला किया है. बता दें कि केंद्रीय सशस्त्र बलों की एक कंपनी में 70-80 जवान होते हैं.
बंगाल में पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को होगा, जिसमें उत्तर बंगाल के सभी जिलों के साथ-साथ दक्षिण बंगाल के कई अहम क्षेत्रों की कुल 152 विधानसभा सीटें शामिल हैं. इस चरण को लेकर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट पर हैं. निर्वाचन आयोग ने मुर्शिदाबाद को कानून-व्यवस्था के लिहाज से बंगाल के सबसे संवेदनशील क्षेत्र के तौर पर चिन्हित किया है. यहां जंगीपुर और मुर्शिदाबाद को मिलाकर केंद्रीय बलों की कुल 316 कंपनियां तैनात की जाएंगी, जो राज्य में सबसे अधिक है. यह फैसला पिछले चुनावों में यहां देखी गई हिंसा और तनाव को ध्यान में रखते हुए लिया गया है.
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जिला-वार सुरक्षा बलों की तैनाती
पूर्व मिदनापुर - 273 कंपनियां
पश्चिम मिदनापुर - 271 कंपनियां
बांकुड़ा - 193 कंपनियां
बीरभूम - 176 कंपनियां
मालदा - 172 कंपनियां
पुरुलिया - 151 कंपनियां
कूचबिहार - 146 कंपनियां
आसनसोल-दुर्गापुर - 125 कंपनियां
जलपाईगुड़ी - 92 कंपनियां
दक्षिण दिनाजपुर - 83 कंपनियां
अलीपुरद्वार - 77 कंपनियां
झाड़ग्राम - 74 कंपनियां
रायगंज - 71 कंपनियां
दार्जिलिंग - 61 कंपनियां
इस्लामपुर - 61 कंपनियां
सिलीगुड़ी - 44 कंपनियां
कालिम्पोंग - 21 कंपनियां
बंगाल चुनाव के पहले चरण में प्रमुख क्षेत्र
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, कूचबिहार और दिनाजपुर समेत उत्तर बंगाल के सभी महत्वपूर्ण जिले शामिल हैं. इसके अलावा दक्षिण बंगाल के पश्चिम बर्दवान, झाड़ग्राम और मिदनापुर में भी पहले चरण में मतदान होगा. निर्वाचन आयोग का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में केंद्रीय बलों की तैनाती से संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा का मजबूत घेरा तैयार होगा और किसी भी तरह की हिंसा या गड़बड़ी को रोका जा सकेगा.
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अब सभी की नजरें 23 अप्रैल पर टिकी हैं, जब राज्य में पहले चरण का मतदान होगा. यह चरण न सिर्फ बंगाल की चुनावी दिशा तय करेगा, बल्कि यह भी दिखाएगा कि निर्वाचन आयोग की सख्त सुरक्षा रणनीति कितनी कारगर साबित होती है. बंगाल में दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा, जिसमें 142 सीटें शामिल हैं. चुनाव नतीजे 4 मई को घोषित होंगे.