तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और उसकी सहयोगी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच पावर शेयरिंग को लेकर सियासी सरगर्मी बढ़ गई है. मुख्यमंत्री एम के स्टालिन के 'नो पावर शेयरिंग' वाले बयान के बाद चर्चाओं का दौर तेज हो गया हालांकि कांग्रेस सार्वजनिक तौर पर यह कह रही है कि गठबंधन में कोई समस्या नहीं है.
कांग्रेस की सफाई
कांग्रेस के चुनाव प्रभारी गिरीश चोडनकर ने साफ कहा कि गठबंधन वार्ता के लिए पांच सदस्यीय समिति बनाई गई है. वही समिति बातचीत कर हाईकमान को रिपोर्ट देगी और अंतिम फैसला वहीं से होगा. उन्होंने यह भी कहा कि जब तक रिपोर्ट नहीं आती, तब तक किसी को भी गठबंधन या पावर शेयरिंग पर बयान नहीं देना चाहिए.
जब उनसे पूछा गया कि इतने लंबे समय से गठबंधन में रहने के बाद अब यह मतभेद क्यों दिख रहे हैं तो उनका जवाब था, 'कोई समस्या नहीं है, हम सिर्फ इंतजार कर रहे हैं.' DMK की ओर से पावर शेयरिंग से इनकार की बात पर कांग्रेस का कहना है कि ऐसी कोई औपचारिक जानकारी उन्हें नहीं दी गई है. बातचीत शुरू होने पर स्थिति स्पष्ट होगी.
वेणुगोपाल की एंट्री, अटकलें तेज
इसी बीच कांग्रेस संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल चेन्नई पहुंचे. वे पुडुचेरी में पदयात्रा में हिस्सा लेंगे और फिर तमिलनाडु कांग्रेस की पदयात्रा में शामिल होंगे. कांग्रेस सांसद विजय वासन ने कहा कि 22 फरवरी के बाद जब समिति गठित होगी और औपचारिक बातचीत शुरू होगी, तभी तस्वीर साफ होगी. अंतिम फैसला AICC यानी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ही करेगी.
मणिकम टैगोर का 'नो फियर' संदेश
इस बीच DMK की ओर से कार्रवाई की मांग की चर्चा के बीच कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कवि सुबरमण्यम भारती की पंक्तियां साझा कीं. 'नो फियर, नो फियर, नो फियर एट ऑल.' इस पोस्ट को सियासी संकेत के तौर पर देखा गया.
हालांकि मदुरै एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में टैगोर ने कहा कि उनके और तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष सेल्वापेरुंथगई के बीच कोई मतभेद नहीं है. उन्होंने कहा कि हम भाई हैं, कोई बड़ी समस्या नहीं है. मैंने 17 तारीख को नेतृत्व से बात कर ली है. उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि उनका X पोस्ट सिर्फ एक नॉर्मल गुड मॉर्निंग मैसेज था.
भाजपा पर भी हमला
टैगोर ने भाजपा नेताओं पर महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देने का आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की. उन्होंने कहा कि कांग्रेस तमिलनाडु के हित में लड़ रही है और पार्टी को विश्वास है कि इस चुनाव में तमिलनाडु जीतेगा.
फिलहाल कांग्रेस ये दिखाने की कोशिश में है कि गठबंधन में सब कुछ सामान्य है, लेकिन पावर शेयरिंग को लेकर असमंजस बना हुआ है. 22 फरवरी के बाद जब औपचारिक वार्ता शुरू होगी, तब तय होगा कि सीट बंटवारे के साथ सरकार में हिस्सेदारी का मुद्दा किस दिशा में जाता है.
तमिलनाडु की सियासत में यह खींचतान आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है, क्योंकि दोनों दल सार्वजनिक तौर पर संयम दिखा रहे हैं, लेकिन अंदरखाने बातचीत की धार तेज है.