उत्तर प्रदेश में भले ही विधानसभा चुनाव का ऐलान न हुए हो, लेकिन चौधरियों के गढ़ माने जाने वाले पश्चिमी यूपी सियासी प्रयोगशाला बनता जा रहा है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने गुर्जर बहुल दादरी से अपने चुनावी अभियान की शुरुआत कर गुर्जर-मुस्लिम समीकरण बनाया. उसी दिन मेरठ के सकौती गांव में जाट समाज के मसीहा वीर शिरोमणि महाराजा सूरजमल की प्रतिमा का अनावरण के बाद से पश्चिम यूपी में जाट बनाम ठाकुर का सियासी तापमान गर्म है.
योगी सरकार के मंत्री व निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने नोएडा से मिशन-2027 का आगाज किया और अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी भी पश्चिमी यूपी से चुनाव बिगुल फूंकने उतर रहे हैं.
सीएम योगी-जयंत चौधरी 13 अक्तूबर को मुजफ्फरनगर में संयुक्त रूप से जनसभा संबोधित करेंगे. माना जा रहा है कि इस रैली के जरिए जाट समीकरण ही दुरुस्त करने की रणनीति नहीं बल्कि पश्चिमी यूपी के सियासी माहौल को भाजपामय बनाकर नई सियासी इबारत लिखने की है?
जयंत-योगी की जोड़ी लिखेगी नई पठकथा
पश्चिमी यूपी के अखिलेश की दादरी रैली के बाद अब 13 अप्रैल को मुजफ्फरनगर के नुमाइश ग्राउंड में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी संयुक्त जनसभा संबोधित करेंगे. इसके लिए पहले उन्हें 9 अप्रैल को रोजगार मेले का उद्घाटन करना के लिए आना था. मेले में लगभग 150 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां शामिल होंगी. इन कंपनियों के द्वारा लगभग 5000 युवक-युवतियों को रोजगार दिए जाने की संभावना है. अब यह आयोजन 13 अप्रैल को हो रहा है, जिसका उद्घाटन सीएम योगी करेंगे. इसे 2027 के विधानसभा चुनाव के लिहाज से अहम माना जा रहा है.
योगी और जयंत चौधरी की मुजफ्फरनहर रैली को मिशन-2027 के अभियान के शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है. बीजेपी और आरएलडी के लोग मुजफ्फरनगर में बड़ी संख्या में भीड जुटाने के लिए कार्यकर्ताओं को गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने का निर्देश दिया गया है. मुजफ्फरनगर ही नहीं बल्कि कैराना, मेरठ और सहारनपुर से भी भीड़ जुटाने की तैयारी है. मुजफ्फरनगर आरएलडी का मजबूत गढ़ रहा है तो भाजपा गठबंधन के साथ उसकी ताकत और बढ़ी है. योगी और जयंत मुजफ्फरनगर में जनसभा कर नई पटकथा लिख सकते हैं.
जाट-ठाकुर-गुर्जर वोटों को साधने का चैलेंज
बीजेपी के पूर्व सांसद संजीय बालियान और संगीत सोम की सियासी अदावत के चलते मुजफ्फरनगर ही नहीं बल्कि जाट बनाम ठाकुर की सियासत पश्चिमी यूपी में पूरी तरह के गर्मा गई है. जाट और ठाकुर के बीच सियासी खाईं गहरी हुई है, जिसके चलते बीजेपी के बेचैनी बढ़ी है. यही नहीं शिरोमणि महाराजा सूरजमल की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम के दौरान पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और राजस्थान के सांसद हनुमान बेनीवाल द्वारा पीएम मोदी और सीएम योगी पर दिए बयानों से बीजेपी की जाट राजनीति में हलचल है.
पश्चिम उत्तर प्रदेश में जाट और गुर्जर दोनों सबसे प्रभावशाली राजनीतिक फैक्टर हैं. वर्ष 2014 के लोक सभा और 2017 में विधान सभा चुनाव के दौरान जाट और गुर्जर दोनों भाजपा के पक्ष में आए, लेकिन 2022 के विधान सभा चुनाव में जाटों का बड़ा वोट आरएलडी के पास वापस जाता दिखाई पड़ा, लेकिन 2024 के चुनाव में जाट वोटर्स में बिखराव दिखा है. ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले बीजेपी कई जाट नेताओं की बेचैनी बढ़ी है तो सपा के गुर्जर पॉलिटिक्स ने सियासी टेंशन और भी बढ़ा रखी है.
बीजेपी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में जयंत चौधरी से हाथ मिलाकर जाट वोटों को लेकर अपना तनाव टाल दिया, लेकिन उपेक्षा का आरोप लगाकर नाराज गुर्जरों ने बीजेपी को आगाह किया कि 2027 में समाज नई राह पकड़ सकता है. ऐसे में गुर्जर समाज का मलाल दूर करने के फार्मूले पर काम रही है, जिसका संदेश सीएम योगी अपनी रैली से दे सकते हैं तो जयंत चौधरी जाट और गुर्जर दोनों के बीच सियासी बैलेंस बनाते हुए नजर आएंगे.
पश्चिम यूपी से तय होती यूपी की सत्ता
पश्चिम यूपी के जरिए लखनऊ की सत्ता की दशा और दिशा तय होती है. बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में अपना राजनीतिक वनवास को पश्चिमी यूपी के जरिए ही खत्म करने में कामयाब रही है. 2014 और 2019 का लोकसभा चुनाव हो या फिर 2017 और 2022 का विधानसभा चुनाव, पश्चिमी यूपी में बीजेपी का पलड़ा भारी रही. 2024 में जरूर पश्चिमी के एक बेल्ट में बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ा हो, लेकिन पूर्वांचल की तुलना में कम हुआ है.
यूपी की कुल 403 विधानसभा सीटों में से 137 सीटें पश्चिमी यूपी में आती है, जो 26 जिलों में फैली हुई है. 2024 के लोकसभा चुनाव के लिहाज से विधानसभा सीटों में बढ़त देखे तो बीजेपी 78 विधानसभा सीट पर आगे थी तो सपा को 54 सीटों पर बढ़त मिली थी. दलित नेता चंद्रशेखर की पार्टी को 5 सीटों पर बढ़त मिली थी. बीजेपी ने इस चुनाव में जयंत चौधरी की आरएलडी से गठबंधन कर रखा था.
गुर्जर वोटों को कैसे जोड़ेगी बीजेपी
2022 के विधानसभा चुनाव में सपा-आरएलडी का गठबंधन था, जयंत और अखिलेश की जोड़ी ने मेरठ, शामली, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, संभल और रामपुर सहित बरेली में बीजेपी को तगड़ा झटका दिया था. अब जयंत बीजेपी के साथ है तो अखिलेश की नजर गुर्जर वोटों पर है, जिसके लिए अखिलेश ने दादरी रैली में गुर्जर समाज से वादा किया है.
सपा के सत्ता में आते हैं तो लखनऊ में तीन गुर्जर महानायकों मिहिर भोज,कोतवाल धन सिंह गुर्जर एवं स्वतंत्रता सेनानी विजय सिंह पथिक की प्रतिमाएं लगाने का काम करेंगे. इसके चलते पश्चिमी यूपी में बीजेपी के लिए अपने सियासी समीकरण को साधने की चुनौती खड़ी हो गई है. गुर्जर, जाट से लेकर ठाकुर वोट तक बीजेपी से छिटक रहा है, जिसके साधे बिना सत्ता की हैट्रिक लगाना आसान नहीं है.