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बंगाल में काउंटिंग सेंटर बने अभेद्य किले, SC के आदेश के बाद पर्यवेक्षकों की फौज तैनात

पश्चिम बंगाल में मतगणना से पहले सुरक्षा और निगरानी को लेकर बड़े कदम उठाए गए हैं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद निर्वाचन आयोग ने अतिरिक्त मतगणना और पुलिस पर्यवेक्षकों की तैनाती कर दी है. हर काउंटिंग सेंटर पर सख्त प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं.

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद 4 मई को मतगणना और नतीजों का ऐलान होना है. (File Photo: ITG)
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद 4 मई को मतगणना और नतीजों का ऐलान होना है. (File Photo: ITG)

सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में मतगणना को लेकर तैयारियां सख्त कर दी हैं. आयोग ने राज्य में अतिरिक्त मतगणना पर्यवेक्षकों और पुलिस पर्यवेक्षकों की अंतिम तैनाती कर दी है, ताकि काउंटिंग की पूरी प्रक्रिया पर कड़ी नजर रखी जा सके.

निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए मतगणना केंद्रों के आसपास सुरक्षा-व्यवस्था मजबूत करने, कानून-व्यवस्था की निगरानी के लिए 165 अतिरिक्त मतगणना पर्यवेक्षक और 77 पुलिस पर्यवेक्षक तैनात किए हैं. इनकी तैनाती का मकसद पारदर्शी मतगणना है.

इससे मतगणना की कार्यवाही सुरक्षित, शांतिपूर्ण, भयमुक्त और पारदर्शी वातावरण में पूरी हो सकेगी. ये नियुक्तियां संविधान के अनुच्छेद 324 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 20बी के तहत आयोग को प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए की गई हैं. 

इस दौरान सभी पर्यवेक्षकों को आयोग में प्रतिनियुक्ति पर माना जाएगा. वो सीधे उसके पर्यवेक्षण और नियंत्रण में काम करेंगे. 165 ऐसे विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र हैं, जहां एक से अधिक मतगणना कक्ष बनाए गए हैं. इन जगहों पर मतगणना के लिए अतिरिक्त पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं.

पुलिस पर्यवेक्षक अपने निर्धारित मतगणना केंद्रों के आसपास सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर नजर रखेंगे. उन्हें सुनिश्चित करना होगा कि काउंटिंग सेंटर के आसपास की सुरक्षा व्यवस्था आयोग के निर्देशों के अनुसार हो. हालांकि, मतगणना के दिन वो कक्ष में प्रवेश नहीं करेंगे.

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पुलिस पर्यवेक्षक, मतगणना पर्यवेक्षकों और अन्य चुनाव अधिकारियों के साथ समन्वय में काम करेंगे, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को तुरंत रोका जा सके. रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ), मतगणना कर्मियों, उम्मीदवारों और उनके एजेंटों के लिए पहचान पत्र जारी किया गया है. 

ये पहचान पत्र ईसीआईएनईटी के एक समर्पित मॉड्यूल के जरिए जारी किए जाएंगे. काउंटिंग सेंटर में प्रवेश सिर्फ उन्हीं लोगों को मिलेगा, जिनके पास क्यूआर कोड आधारित फोटो आईडी होगी. सुरक्षा के लिहाज से मतगणना पर्यवेक्षक के अलावा कोई भी मोबाइल फोन नहीं ले जा सकेगा.

मतगणना प्रक्रिया के दौरान नियंत्रण इकाइयों से प्राप्त परिणामों को दर्शाने वाला प्रपत्र 17C-II, गणना पर्यवेक्षकों द्वारा गणना एजेंटों की मौजूदगी में तैयार किया जाएगा. इसके बाद इसे हस्ताक्षर के लिए गणना एजेंटों को दिया जाएगा. एजेंट चाहें तो इस प्रक्रिया को दोहराया भी जा सकता है.

हर टेबल पर तैनात माइक्रो-ऑब्जर्वर भी कंट्रोल यूनिट के डिस्प्ले से परिणामों को स्वतंत्र रूप से नोट करेंगे. हर राउंड के अंत में वे इन आंकड़ों को काउंटिंग ऑब्जर्वर को सौंपेंगे, ताकि क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जा सके. कुल मिलाकर, पारदर्शिता के लिहाज से बेहद कड़े इंतजाम हैं.

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