पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए मतदान शुरू हो गया. पहले फेज की 152 सीटों पर 1478 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करीब 3.60 करोड़ वोटर्स तय करेंगे. बीजेपी और टीएमसी की साख ही दांव पर नहीं बल्कि इन दोनों ही पार्टियों के धुरंधरों का भी असल इम्तिहान है. इस चरण में न केवल ममता सरकार के मंत्रियों की परीक्षा के साथ-साथ बीजेपी के दिग्गजों और कांग्रेस के कद्दावर नेताओं के लिए भी यह 'नाक की लड़ाई' है.
बंगाल के पहले चरण में 16 जिलों की 152 सीटें दांव पर है, जिसमें उत्तर बंगाल की 54, जंगलमहल की 42 और दक्षिण बंगाल की 56 सीटों पर चुनाव है. मतुआ बेल्ट के साथ-साथ मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद के इलाके की सीटों पर बीजेपी, टीएमसी और कांग्रेस सहित लेफ्ट ही अग्निपरीक्षा है.
पहले चरण में बीजेपी और कांग्रेस के धुरंधरों का असल इम्तिहान होना है.बंगाल में बीजेपी का चेहरा माने जा रहे शुभेंदु अधिकारी और दिलीप घोष की परीक्षा तो कांग्रेस के दिग्गज नेता अधीर रंजन को विधानसभा चुनाव जीतने की चुनौती है. इसके अलावा बाबरी मस्जिद के बहाने सियासी चर्चा में आए हुमायूं कबीर के सामने अपने गढ़ को बचाए रखने की चुनौती है.
नंदीग्राम में सुवेंदु अधिकारी बनाम पवित्र कर
टीएमसी में कभी ममता बनर्जी के करीबी रहे शुभेंदु अधिकारी अब बंगाल में बीजेपी के चेहरा हैं. बीजेपी शुभेंदु को आगे करके चुनावी मैदान में उतरी है और उन्हें ममता का सबसे बड़ा विरोधी माना जाता है. शुभेंदु अधिकारी एक बार फिर से नंदीग्राम से चुनाव लड़ रहे हैं, यह वही सीट है जहां उन्होंने 2021 के चुनाव में ममता बनर्जी को हराकर बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की आंखों के तारा बन गए हैं. इसके अलावा शुभेंदु भवानीपुर से भी चुनाव लड़ रहे हैं, यह कोलकाता की वह सीट है, जहां से ममता बनर्जी हैं.
पहले चरण में शुभेंदु अधिकारी की नंदीग्राम पर चुनाव हो रहे हैं, जहां उनका मुकाबला TMC के पवित्र कर से है. पविक्ष कर बीजेपी में रहे हैं और शुभेंदु के करीबी माने जाते हैं. टीएमसी ने नंदीग्राम सीट से उन्हें उतारकर शुभेंदु की सियासी टेंशन जरूर बढ़ा दी है, जिसके चलते मुकाबला काफी रोचक हो गया है. इस बार देखना है कि शुभेंदु क्या अपनी जीत का अंतर बढ़ाते हैं या फिर पवित्र जीत दर्ज करते हैं?
खड़गपुर सदर में दिलीप घोष बनाम प्रदीप सरकार
दिलीप घोष बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हैं, जो पश्चिम बंगाल में पार्टी के विस्तार का एक प्रमुख चेहरा रहे हैं. दिलीप घोष ने 2016 में पश्चिम मेदिनीपुर जिले की खड़गपुर सदर सीट जीती थी. हालांकि, 2021 में बीजेपी के हिरन चटर्जी ने TMC के प्रदीप सरकार के खिलाफ कड़ी टक्कर में जीत हासिल की थी. 2026 के चुनाव में दिलीप घोष खड़गपुर सदर सीट से BJP के टिकट पर फिर से चुनाव लड़ रहे हैं. TMC ने इस सीट से फिर से प्रदीप सरकार को मैदान में उतारा है. प्रदीप सरकार ने 2019 के विधानसभा उपचुनाव में यह सीट जीती थी.
बहरामपुर में अधीर रंजन चौधरी बनाम सुब्रत मैत्रा
अधीर रंजन चौधरी बंगाल में कांग्रेस का चेहरा माने जाते हैं और लंबे समय तक सांसद रहे हैं, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में TMC नेता और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान से हार गए थे. अधीर रंजन चौधरी इस बार बहरामपुर विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरे हैं, जहां पर उनका मुकाबला बीजेपी के सुब्रत मैत्रा से है. मुर्शिदाबाद जिले में स्थित बहरामपुर विधानसभा क्षेत्र पर फिलहाल भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है. मौजूदा विधायक सुब्रत मैत्रा हैं, जिन्हें अधीर रंजन चौधरी से दो-दो हाथ करना पड़ रहा.
आसनसोल दक्षिण में अग्निमित्रा पॉल बनाम तापस बनर्जी
अग्निमित्रा पॉल पश्चिम बंगाल में बीजेपीकी सबसे प्रमुख महिला नेताओं में से एक हैं. अग्निमित्रा पॉल, जो 2019 में बीजेपी में शामिल हुई थीं, उन्होंने 2021 के विधानसभा चुनावों में टीएमसी की सायनी घोष को हराया था. पॉल का मुकाबला TMC के तापस बनर्जी से है. तापस TMC के पुराने नेता हैं, जिन्होंने 2011 से 2021 तक आसनसोल दक्षिण सीट का प्रतिनिधित्व किया है, तापस ने 2021 में रानीगंज से BJP के बिजन मुखर्जी को हराया था, लेकिन एक फिर से अपनी पुरानी सीट पर लौटी हैं.
माथाभंगा में निशीथ प्रमाणिक बनाम सबलू बर्मन
पूर्व केंद्रीय मंत्री निशीथ प्रमाणिक कूचबिहार जिले की माथाभंगा (SC) सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं, यहां टीएमसी के सबलू बर्मन उम्मीदवार हैं. CPI(M) के खागेन चंद्र बर्मन उत्तरी बंगाल में लेफ्ट फ्रंट की क्षेत्रीय वापसी की कोशिश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस ने यहां से क्षितेंद्र नाथ बर्मन को उतारा है. प्रमाणिक, जो बीजेपीके एक प्रमुख नेता और उत्तरी बंगाल में पार्टी का एक अहम चेहरा हैं, ने 2021 के चुनावों में दिनहाटा सीट से जीत हासिल की थी, जिसमें उन्होंने TMC के उदयन गुहा को हराया था.हालांकि, बाद में प्रमाणिक ने अपनी लोकसभा सदस्यता बरकरार रखते हुए यह सीट छोड़ दी थी, जिसके बाद गुहा ने उपचुनाव जीत लिया था.
डोमकल में हुमायूं कबीर बनाम मुस्तफिजुर रहमान
बाबरी मस्जिद के नाम पर सियासी चर्चा में आए हुमायूं कबीर बंगाल के दिग्गत नेता हैं, TMC से विधायक और ममता बनर्जी के मंत्रिमंडल में मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं. बंगाल में बाबरी मस्जिद के निर्माण का प्रस्ताव रखने के कारण कबीर को 2025 में पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था.
उन्होंने अपनी खुद की पार्टी, 'आम जनता उन्नयन पार्टी' बनाई और अकेले चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया. मुर्शिदाबाद की डोमकल सीट से CPI(M) के मोहम्मद मुस्तफ़िज़ुर रहमान (राणा) के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ रहे हैं, 2021 में यह सीट TMC के ज़फ़िकुल इस्लाम ने जीती थी. इस बार फिर से मैदान में है, जिसके चलते त्रिकोणीय मुकाबला है.
पानीहाटी में रत्ना देबनाथ बनाम निर्मल घोष
रत्ना देबनाथ, जो दो साल पहले आरजी कर अस्पताल में बलात्कार और हत्या की शिकार हुई महिला डॉक्टर की मां हैं, उत्तरी 24 परगना की पानीहाटी सीट से बीजेपी की उम्मीदवार हैं, देबनाथ का मुक़ाबला TMC विधायक निर्मल घोष से है, जो 1996 से ज़्यादातर समय इस सीट पर काबिज़ रहे हैं. इस बार बीजेपी से रत्ना देबनाथ के उतरने से मुकाबला रोचक हो गया है.