डोमकल, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले का एक उप-मंडल है, जो मुर्शिदाबाद लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाले सात विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. यह एक सामान्य श्रेणी (General Category) की सीट है और इसमें डोमकल ब्लॉक के अजीमगंजगोला, भागीरथपुर, डोमकल, गराईमारी, गरीबपुर, घोरामारा, जीतपुर, जुगींदा, जुरनपुर, मधुरकुल, रायपुर और सरंगपुर ग्राम पंचायतें शामिल हैं.
डोमकल विधानसभा सीट की स्थापना 1967 में हुई थी और तब से अब तक यहां 14 बार चुनाव हो चुके हैं. लंबे समय तक यह सीट भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPM का गढ़ मानी जाती रही है, जिसने 14 में से 11 बार यहां से जीत हासिल की. खास बात यह रही कि 1977 से 2016 तक CPM ने लगातार 9 बार इस सीट पर कब्जा बनाए रखा. केवल 1969 और 1972 में कांग्रेस ने CPM की इस जीत की लय को रोका था.
इस सीट पर CPM के अनिसुर रहमान एक बड़ा नाम रहे, जिन्होंने 1991 से 2016 तक लगातार 6 बार जीत दर्ज की. हालांकि, 2011 और 2016 के चुनावों में CPM की जीत का अंतर बहुत कम रह गया था - सिर्फ 3,075 और 6,890 वोटों से.
2021 के विधानसभा चुनावों में पहली बार CPM को बड़ा झटका लगा. तृणमूल कांग्रेस (TMC) के जाफिकुल इस्लाम ने CPM के मोहम्मद मुस्तफिजुर रहमान को 47,229 वोटों के भारी अंतर से हराया. TMC को 56.45% वोट मिले, जबकि CPM को 35.57% वोट मिले थे. भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पहली बार कुछ उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन उसका वोट प्रतिशत केवल 5.46% रहा. कांग्रेस ने इस चुनाव में CPM के साथ गठबंधन किया था, इसलिए उसने खुद उम्मीदवार नहीं उतारा.
हाल ही में हुए 2024 के लोकसभा चुनावों में डोमकल विधानसभा क्षेत्र से मिले नतीजे CPM के लिए कुछ हद तक उम्मीद जगाने वाले रहे. TMC को यहां केवल 13,471 वोटों की बढ़त मिली, जो लगभग उतनी ही थी जितनी 2019 में थी (13,696 वोटों की). इससे साफ होता है कि मुकाबला अब भी खुला हुआ है और TMC की स्थिति पूरी तरह से अजेय नहीं है.
डोमकल की एक खासियत यह रही है कि यहां से कभी भी किसी गैर-मुस्लिम उम्मीदवार ने जीत दर्ज नहीं की. 2021 के चुनाव में यहां कुल 2,52,142 वोटर थे, जिनमें से 84.60% यानी 2,13,312 मतदाता मुस्लिम समुदाय से थे. अनुसूचित जाति (SC) के मतदाता केवल 2.42% (6,102) और अनुसूचित जनजाति (ST) के मतदाता सिर्फ 0.27% (681) थे. डोमकल पूरी तरह ग्रामीण इलाका है और यहां कोई शहरी मतदाता नहीं है.
2024 में मतदाताओं की संख्या घटकर 2,45,206 रह गई. इसके बावजूद वोटिंग प्रतिशत अच्छा रहा, 2021 में 82.36% मतदान हुआ, जबकि 2016 में यह 83.84% था.
डोमकल मुर्शिदाबाद जिले के उत्तर-पूर्वी भाग में स्थित है और यह बागरी क्षेत्र में आता है. यहां की जमीन समतल और उपजाऊ है क्योंकि इस क्षेत्र से भागीरथी और पद्मा जैसी नदियां गुजरती हैं. मानसून के दौरान बाढ़ का खतरा बना रहता है, जिससे खेती और सड़कों को नुकसान पहुंचता है.
यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है. धान, जूट और सब्जियां मुख्य फसलें हैं. इसके अलावा डोमकल में रेशम बुनाई (silk weaving) का एक छोटा उद्योग भी है, जो मुर्शिदाबाद की समृद्ध कपड़ा परंपरा का हिस्सा है.
डोमकल में बुनियादी ढांचा अब धीरे-धीरे सुधर रहा है. राज्य राजमार्ग 11 (SH-11) यहां से गुजरता है, जो इसे बेरहामपुर और जिले के अन्य हिस्सों से जोड़ता है. कोलकाता और आस-पास के शहरों के लिए बस सेवाएं उपलब्ध हैं. सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन करीब 30 किलोमीटर दूर कोसिमबाजार में है.
डोमकल, जिला मुख्यालय बेरहामपुर से लगभग 35 किलोमीटर और राज्य की राजधानी कोलकाता से करीब 240 किलोमीटर दूर है. इसके पास के अन्य प्रमुख कस्बों में जलंगी (25 किमी), रानीनगर (20 किमी) और लालगोला (40 किमी) शामिल हैं, जो बांग्लादेश की सीमा के निकट है.
अगर 2024 के लोकसभा चुनावों को पैमाना माना जाए, तो साफ है कि डोमकल में CPM पूरी तरह हारी नहीं है. वाम मोर्चा (Left Front) को अब उम्मीद है कि BJP अगर TMC के वोट बैंक में सेंध लगाए, तो बहुकोणीय मुकाबले में उसे जीत का मौका मिल सकता है. ऐसे में डोमकल की आगामी विधानसभा चुनावों में लड़ाई बेहद दिलचस्प होने वाली है.
(अजय झा)
Md. Mostafijur Rahaman (rana)
CPI(M)
Biyamma Mondal (rubia)
BJP
Nota
NOTA
Iman Ali Biswas
IND
Amir Sohail
JSTDVPMTP
Md Jewel Mondal
IND
Hikmat Ali
IUML
Ayenul Haque
IND
Samsuzzaman(kajal)
SUCI
मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का तीसरा आम बजट ऐसे समय आया है, जब देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल गर्म है. वित्त मंत्री ने बजट के जरिए बंगाल से लेकर केरल और तमिलनाडु तक को साधने की कवायद करती नजर आईं हैं.
देश का बजट ऐसे समय में आया है, जब देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव से सियासी माहौल गरम है. ऐसे में मोदी सरकार ने बजट के जरिए चुनावी राज्यों में सियासी पिच तैयार करने का दांव चला है.
अमित शाह ने सिलिगुड़ी में बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार की विदाई नजदीक है और सत्ता परिवर्तन निश्चित है. उन्होंने ममता पर आरोप लगाए कि उन्होंने विभिन्न समुदायों को आपस में लड़ाने वाली राजनीति की, जिससे सामाजिक तनाव बढ़ा और एकता ख़तरे में पड़ी.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तर 24 परगना में कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी सरकार पर तीखा प्रहार किया. उन्होंने हाल ही में मोमो फैक्ट्री में लगी आग को सरकारी भ्रष्टाचार का नतीजा बताया है.
JUP प्रमुख हुमायूं कबीर ने 11 फरवरी को बाबरी मस्जिद निर्माण शुरू करने का एलान किया है. उन्होंने पश्चिम बंगाल में AIMIM और SDPI के साथ गठबंधन के संकेत दिए हैं. कबीर ने मार्च में कोलकाता में ओवैसी के साथ बड़ी रैली करने और टीएमसी सरकार को उखाड़ फेंकने का दावा किया है.
पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने चरणबद्ध रणनीति तैयार की है, जिसे अगले तीन महीने में धरातल पर उतारने का प्लान है. पार्टी इस बार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निजी हमलों से परहेज करेगी.
इंडिया टुडे-सीवोटर के ‘मूड ऑफ द नेशन’ सर्वे के मुताबिक, अगर आज लोकसभा चुनाव होते हैं तो पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस 2024 जैसा ही मजबूत प्रदर्शन करते हुए करीब 28 सीटें जीत सकती है, जबकि बीजेपी की सीटें बढ़कर 14 तक पहुंचने का अनुमान है. विधानसभा चुनाव से दो महीने पहले आए इस सर्वे से संकेत मिलता है कि बीजेपी का वोट शेयर बढ़ रहा है, लेकिन वह राज्य में कोई बड़ा उलटफेर करने की स्थिति में नहीं दिखती और टीएमसी की प्रासंगिकता बनी हुई है.
पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में SIR की समय सीमा बढ़ाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. बंगाल की तरफ से एडवोकेट कपिल सिब्बल ने मामूली कारणों से नोटिस भेजे जाने पर आपत्ति जताई. सुनवाई में चुनाव आयोग ने समय सीमा बढ़ाने का विरोध किया है.
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मंगलवार को कोलकाता में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की. संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने भाजपा पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पार्टी चुनाव आयोग के साथ मिलकर लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को नुकसान पहुंचा रही है.
कोलकाता के साखेर बाजार में बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच जमकर टकराव हो गया. तृणमूल कार्यकर्ताओं ने बीजपेी की बैठक में बाधा डाली. इसके बाद बीजेपी समर्थकों ने तृणमूल के एक कार्यक्रम में तोड़फोड़ की.