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सीमांचल में अमित शाह का 'मिशन मोड', सुरक्षा समीक्षा या चुनावी शंखनाद?

यह दौरा भाजपा के लिए दोहरा राजनीतिक फायदा ला सकता है, इसमें बंगाल चुनाव में घुसपैठ पर फोकस और बिहार में सुरक्षा-प्रधान नैरेटिव की उठान शामिल है.  साथ ही ममता बनर्जी के 'केंद्र दबाव बना रहा है' वाले तर्क का जवाब भी देना प्राथमिकता रहेगी. इससे जनसांख्यिकीय बदलाव और सीमा सुरक्षा को चुनावी विमर्श में केंद्रित करना लक्ष्य होगा. 

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बंगाल चुनाव से पहले शाह की बॉर्डर रणनीति, सीमांचल में बड़ी बैठक. (ANI video grab)
बंगाल चुनाव से पहले शाह की बॉर्डर रणनीति, सीमांचल में बड़ी बैठक. (ANI video grab)

केंद्र की सियासत और सुरक्षा, दोनों के केंद्र में आज से बिहार का सीमांचल आ गया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को अपने तीन दिवसीय दौरे की शुरुआत कर दी, और ये दौरा उतना ही रणनीतिक है जितना राजनीतिक. नेपाल और बांग्लादेश की सरहदों से लगा यह इलाका पहले से ही सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर रहा है, लेकिन पश्चिम बंगाल चुनाव से ठीक पहले शाह का यहां पहुंचना इसे एक बड़े राजनीतिक संकेत में बदल देता है.

क्या है दौरे की अहमियत? 

गुरुवार को शाह किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार सहित सात जिलों के डीएम और एसपी के साथ सुरक्षा समीक्षा बैठक करेंगे. इन जिलों में सुरक्षा एजेंसियों की प्रमुख चिंताएं हैं. इनमें सीमा पार से अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज़ और पहचान पत्र का नेटवर्क, तस्करी की लगातार सक्रिय राहें अैर आबादी में असामान्य-तेज वृद्धि शामि‍ल है. 

दिल्ली की सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, बिहार का बॉर्डर ज़ोन बंगाल तक प्रभाव डालता है, क्योंकि कई अवैध मूवमेंट बिहार से होकर पश्चिम बंगाल की ओर शिफ्ट होते हैं.

बंगाल चुनाव और शाह का सीमांचल दौरा

भाजपा और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच घुसपैठ के मुद्दे पर टकराव पहले से जारी है.भाजपा इस मुद्दे को चुनावी विमर्श में मजबूती से स्थापित करती रही है. शाह का यह दौरा यह संदेश भी देता है कि घुसपैठ सिर्फ बंगाल का मुद्दा नहीं है. अब यह बिहार, असम, त्रिपुरा और पूरे उत्तर-पूर्व की सुरक्षा से जुड़ा मामला है. इससे भाजपा घुसपैठ के मुद्दे को राज्य राजनीति से उठाकर राष्ट्रीय सुरक्षा का विमर्श बनाने की कोशिश कर रही है. 

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सीमांचल-बंगाल कॉरिडोर: खुफिया एजेंसियों की पुरानी चेतावनियां 

सालों से खुफिया एजेंसियां रिपोर्ट कर रही हैं कि बांग्लादेश की तरफ से अवैध प्रवेश हो रहा है. फर्जी दस्तावेज़ तैयार करने वाले नेटवर्क
सीमांचल से निकलकर बंगाल तक सक्रिय तस्करी मार्ग अपना रहे हैं. इससे आबादी का असमान और तीव्र बढ़ाव बढ़ा है. कई रूट किशनगंज, उत्तर दिनाजपुर, मालदा और मुर्शिदाबाद तक जुड़ते हैं. यानी सीमांचल एक ट्रांजिट गेटवे की तरह काम करता है, जहां से होकर काफी मूवमेंट बंगाल तक जाता है.

SIR: केंद्र-राज्य के बीच नई टकराहट

केंद्र सरकार Special Intensive Revision (SIR) के जरिए मतदाता सूची की विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया चलाना चाहती है. इसका उद्देश्य घुसपैठ से जुड़े अवैध नामों की पहचान है. लेकिन बंगाल सरकार इसे NRC की नई शक्ल बता रही है.  ममता बनर्जी का कहना है, 'यह NRC का नया नाम है, हम इसे लागू नहीं होने देंगे.'  वहीं केंद्र का तर्क है कि यह सुरक्षा से जुड़ी प्रक्रिया है, राजनीति न की जाए. सीमांचल जैसे बॉर्डर ज़ोन में SIR कैसे लागू किया जाए, यह शाह की समीक्षा का अहम हिस्सा होगा.

जनसांख्यिकीय बदलाव: बहस का ‘अनकहा’ केंद्रबिंदु
सीमांचल और उत्तर बंगाल के कई इलाकों में तेज़ जनसंख्या वृद्धि, धार्मिक जनसांख्यिकीय परिवर्तन, नए बसावट पैटर्न और सीमा पार मूवमेंट से जुड़े संकेत स्पष्ट दिखते हैं. भाजपा इसे घुसपैठ का परिणाम बताती है, जबकि TMC इसे ध्रुवीकरण की राजनीति का प्रयास कहती है. शाह का दौरा इस विवाद को फिर राष्ट्रीय मंच पर लाएगा.

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चिकन नेक: पूर्वोत्तर की लाइफलाइन

सीमांचल सिलिगुड़ी कॉरिडोर या 'चिकन नेक' के बेहद पास स्थित है. वो संकरा भू-भाग जो पूरे पूर्वोत्तर को भारत के मुख्य हिस्से से जोड़ता है. इस क्षेत्र में छोटी-सी गड़बड़ी भी सुरक्षा के लिहाज से बड़ी चुनौती बन सकती है. शाह का दौरा इस स्ट्रैटेजिक जोन की सुरक्षा मजबूती से भी जुड़ा है. 

असम, त्रिपुरा से लेकर सीमांचल तक... 

शाह इससे पहले असम और त्रिपुरा की सीमाई स्थिति का भी जायजा ले चुके हैं. केंद्र अब इन सभी क्षेत्रों असम, त्रिपुरा, बंगाल, बिहार को एक जुड़े हुए सुरक्षा थियेटर के रूप में देखने की रणनीति पर काम कर रहा है. 

एक साथ दो नैरेटिव की तैयारी

यह दौरा भाजपा के लिए दोहरा राजनीतिक फायदा ला सकता है, इसमें बंगाल चुनाव में घुसपैठ पर फोकस और बिहार में सुरक्षा-प्रधान नैरेटिव की उठान शामिल है.  साथ ही ममता बनर्जी के 'केंद्र दबाव बना रहा है' वाले तर्क का जवाब भी देना प्राथमिकता रहेगी. इससे जनसांख्यिकीय बदलाव और सीमा सुरक्षा को चुनावी विमर्श में केंद्रित करना लक्ष्य होगा. 

शाह का दौरा कई संदेश छोड़ता है
यह दौरा सीमांचल को एक साथ कई भूमिकाएं देता है. इसमें सुरक्षा का हॉटस्पॉट, जनसांख्यिकीय बदलाव का अध्ययन-क्षेत्र, चिकन नेक की सुरक्षा-कवच, पूर्वी भारत की चुनावी रणनीति का केंद्र और सीमा पार मूवमेंट के खिलाफ़ प्रथम रक्षा पंक्ति शामिल है. अमित शाह का यह मिशन आने वाले महीनों में बिहार, बंगाल और उत्तर-पूर्व की राजनीति व सुरक्षा विमर्श का केंद्र बनने जा रहा है.

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