नाम आर प्रग्गनानंधा और उम्र महज 12 साल 10 महीने, जिन्होंने शतरंज जगत में इतिहास रचते हुए भारत का नाम रोशन किया है. प्रग्गनानंधा की उम्र भले ही कम हो लेकिन उनके पास शतरंज के ग्रांडमास्टर का खिताब है, जो पद शतरंज खिलाड़ी के लिए एक सपना होता है. बता दें कि प्रग्गनानंधा 12 साल 10 महीने और 13 दिन की उम्र में इटली में आयोजित हो रहे ग्रेडिन ओपन के फाइनल राउंड में पहुंच गए हैं, जिसके बाद वे भारत के सबसे छोटे और दुनिया के दूसरे सबसे छोटे ग्रांडमास्टर बन गए हैं.
शतरंज जगत में भारत का नाम रोशन करने वाले प्रग्गनानंधा ने इससे पहले 2016 में 10 साल 10 महीने 19 दिन में यंगेस्ट इंटरनेशनल मास्टर बनने का खिताब अपने नाम किया था. प्रग्गनानंधा फाइनल राउंड में रोनाल्ड के साथ खेल रहे थे, जो कि जीत के लिए आश्वस्त थे. उन्होंने प्रतियोगिता में ग्रैंडमास्टर मोरोनी लूका जूनियर को आठ राउंड के मुकाबले में हराकर जीत हासिल की.
आर प्रग्गनानंद को प्यार से प्रग्गू कहा जाता है. टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, 'इस उपलब्धि के बाद मैं राहत महसूस कर रहा हूं. शायद अभी भी पूरी तरह समझ नहीं पा रहा हूं. आठवें राउंड में पहुंचने के दौरान किसी ने बताया कि मैं ग्रैंडमास्टर बनने वाला हूं. उससे पहले मुझे नहीं पता था. मैंने इस बारे नहीं सोचा क्योंकि इससे मेरा ध्यान भटक सकता था. मेरा अगला लक्ष्य विश्व चैंपियन बनने का है.'
गौरतलब है कि भारत के महान शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद ने 18 साल की उम्र में ग्रैंडमास्टर का खिताब हासिल किया था. 2013 में उन्हें वर्ल्ड चैंपियनशिप में हराने वाले और अब शतरंज की दुनिया में राज कर रहे मैग्नस कार्लसन 13 साल चार महीने की उम्र में ग्रैंडमास्टर बने थे.