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QR कोड पर प्रैंक, पेपर में ओरी और अब कॉपियों में गड़बड़ी... CBSE का ये कैसा डिजिटल 'मेस'?

देश की सबसे बड़ी शिक्षा बोर्डों में से एक सीबीएसई लगातार सवालों के घेरे में है. पिछले कुछ सालों में परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़ी कई डिजिटल गड़बड़ियां सामने आई हैं. लेकिन इस साल जब रिजल्ट जारी भी नहीं हुआ था तब से लेकर CBSE बोर्ड में विवाद चल रहा है जो अभी तक रूका नहीं है. मैथ्स के पेपर में रिक एस्टली के सरप्राइज लिंक, इतिहास के पेपर में ओरी के क्यूआर कोड और अब ओएसएम सिस्टम से जुड़े विवाद ने परीक्षा व्यवस्था को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है. 

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कब से शुरू हुआ CBSE को लेकर विवाद?
कब से शुरू हुआ CBSE को लेकर विवाद?

CBSE बोर्ड विवादों में रिजल्ट आने के बाद से नहीं उसके पहले से ही है. कक्षा 12वीं के मैथ्स के पेपर में सामने रिक रोल लिंक से लेकर इतिहास के पेपर में ओरी से जुड़े क्यूआर कोड और अब ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम में बताई जा रही तकनीकी खामियों तक फैल गई है. बोर्ड की डिजिटल परीक्षा और मूल्यांकन व्यवस्था लगातार विवादों का सामना कर रही है. लगातार सामने आ रहे कभी न खत्म होने वाली परेशानी ने न केवल बोर्ड को सवालों के घरे में खड़ा कर दिया है बल्कि छात्रों और अभिभावकों के बीच बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता भी बढ़ा दी है.

हालांकि, हर मामले की परिस्थितियां अलग रही है लेकिन इन सभी घटनाओं का एक असर देखने को मिला है. छात्रों और अभिभावकों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि परीक्षाओं के संचालन, कॉपियों के मूल्यांकन और परिणामों की प्रक्रिया में इस्तेमाल किए जा रहे डिजिटल सिस्टम कितने भरोसेमंद, सुरक्षित और लगातार सही तरीके से काम करने वाले हैं. ऐसे में बोर्ड में ये विवाद की जड़ कहा से शुरू हुई है चलिए जानते हैं. 

बोर्ड में भी वायरल हुआ रिक रोल

बोर्ड को लेकर सबसे पहला विवाद 12वीं के मैथ्स पेपर के दौरान सामने आया था. जब छात्रों ने दावा किया कि पेपर छपे क्यूआर कोड को स्कैन करने से उन्हें रिक एस्टली के मशहूर गाने नेवर गोना गिव यू अप पर रीडायरेक्ट कर दिया गया. इसके बाद से इसे रिक रोल का नाम दे दिया गया. यह दावा सोशल मीडिया पर तेजी से अपने पैर पसारने लगा. इसके बाद से छात्रों ने स्क्रीनशॉट और प्रतिक्रियाएं शेयर कीं. बाद में सीबीएसई ने स्पष्ट किया कि क्यूआर कोड प्रश्न पत्र के डिजाइन का हिस्सा थे और परीक्षा की सुरक्षा या निष्पक्षता से कोई समझौता नहीं हुआ था. 

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ओरी से जुड़ा विवाद 

बोर्ड के इस विवाद ने बॉलीवुड को भी नहीं छोड़ा. रिक रोल वाली घटना के बाद इतिहास के पेपर में कुछ इसी तरह का मामला सामने आया. छात्रों ने आरोप लगाया कि एक अन्य क्यूआर कोड सोशल मीडिया पर्सनालिटी ओरी से जुड़ी प्लेटफॉर्म पर लेकर जा रहा है. इस दावे को एक बार फिर ऑनलाइन काफी समर्थन मिला, जिससे परीक्षा अवधि के दौरान भ्रम की स्थिति और बढ़ गई. सीबीएसई ने इस बार भी कहा कि सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत तैयार किया गया था और परीक्षा सामग्री में कोई अनधिकृत या बाहरी सामग्री शामिल नहीं थी. 

अब ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम 

अभी इन विवादों की आग ठंडी हुई नहीं थी कि रिजल्ट जारी हो गया. इसके बाद से एक नया विवाद ऑन स्क्रीन मार्किंग को लेकर शुरू हो गया. सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली के तहत छात्रों को पुनर्मूल्यांकन या सत्यापन के लिए आवेदन करने से पहले अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई कॉपी उपलब्ध कराई जाती है. लेकिन इस साल कई छात्रों ने शिकायत की कि उन्हें मिली कॉपियां धुंधली थीं, कुछ में पन्ने गायब थे, जबकि कुछ को अधूरी उत्तर पुस्तिकाएं मिलीं. कुछ मामलों में तो छात्रों ने आरोप लगाया कि उनकी कॉपियों में दूसरे विषयों के पन्ने भी जुड़े हुए थे. 

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इसके अलावा, कई छात्रों ने यह भी कहा कि आवेदन सफलतापूर्वक जमा होने के बावजूद उन्हें पोर्टल पर तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी मिलने में देरी हुई. जैसे-जैसे ऐसी शिकायतों की संख्या बढ़ी, मामला केवल परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों तक सीमित नहीं रहा. इसने सीबीएसई की डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया और परिणाम जारी होने के बाद इस्तेमाल की जाने वाली प्रणालियों की विश्वसनीयता को लेकर भी नए सवाल खड़े कर दिए. 

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