उत्तर प्रदेश पुलिस को चार साल के लंबे इंतजार के बाद फुल-टाइम DGP मिल गया है. सरकार ने 1991 बैच के वरिष्ठ IPS अधिकारी राजीव कृष्ण को राज्य का फुल-टाइम DGP नियुक्त किया है. बता दें कि उत्तर प्रदेश में 2022 के बाद से DGP का पद खाली रहा है. इस दौरान कई अधिकारी कार्यवाहक DGP के रूप में जिम्मेदारी संभालते रहे. अब राजीव कृष्ण की नियुक्ति के साथ यह लंबा इंतजार खत्म हो गया है और प्रदेश को नियमित पुलिस प्रमुख मिल गया है. इसके बाद से लोग उनके बारे में और जानने के लिए उत्सुक हैं.
पढ़ाई में हमेशा से रहे हैं अव्वल
राजीव कृष्ण सिर्फ एक सख्त पुलिस अधिकारी ही नहीं बल्कि पढ़ाई में भी काफी तेज रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है. इसकी झलक उनके काम करने के तरीके में साफ दिखाई देती है. वह टेक्नोलॉजी आधारित पुलिसिंग के बड़े समर्थक माने जाते हैं. राजीव कृष्ण 1991 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी हैं. अपने तीन दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने कई अहम जिलों और विभागों में जिम्मेदारियां निभाई हैं. वह आगरा, मथुरा, लखनऊ, फिरोजाबाद और नोएडा जैसे अहम जिलों में SP और SSP रह चुके हैं. इसके अलावा उन्होंने प्रयागराज, बरेली, कानपुर और अलीगढ़ में ASP के पद पर भी अपनी सेवाएं दी हैं.
2029 तक रहेगा कार्यकाल
राजीव कृष्ण जून 2029 में सेवानिवृत्त होंगे. यानी उनके पास करीब तीन साल का कार्यकाल है. ऐसे में माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश पुलिस में स्थिर नेतृत्व के साथ कई नई चीजें देखने को मिल सकती है. उत्तर प्रदेश जैसे देश के सबसे बड़े पुलिस बल की कमान संभालने वाले राजीव कृष्ण की पहचान एक शांत, तकनीक-समर्थक और परिणाम देने वाले अधिकारी के रूप में रही है.
उनके नाम है अनोखा रिकॉर्ड
राजीव कृष्ण के नाम एक खास रिकॉर्ड शामिल है. वह अकेले ऐसे IPS हैं जिन्होंने लखनऊ पुलिस के एसएसपी रहे हैं. 1 दिसंबर 2006 को राजीव लखनऊ के एसएसपी बने और 16 मार्च 2007 तक उनकी तैनाती रही. दूसरी बार उन्हें तब इस पद पर तैनाती मिली जब लखनऊ, कानपुर, मेरठ समेत कई बड़े शहरों में डीआईजी व्यवस्था लागू हुई.