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ससुर ने 5 दामाद लगवाए तो किसी ने बेटे-बहू या बीवी...! ऐसे कुछ 'परिवारों' में बंट रहा मदरसों का 1100 करोड़ फंड

उत्तर प्रदेश के सहायता प्राप्त मदरसों में भाई-भतीजावाद और वंशवाद चरम पर है. मदरसा विनियमावली 2016 में स्पष्ट प्रावधान है कि मदरसा प्रबंधन अपने परिवार के सदस्यों की नियुक्ति नहीं करेगा. इसके बावजूद संबंधित प्रबंधक नियमों को दरकिनार करने के लिए पहले औपचारिक रूप से इस्तीफा दे देता है, अपने स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को प्रबंधक नियुक्त कर देता है और परिवार के सदस्यों की नियुक्ति होने के बाद पुनः स्वयं प्रबंधक बन जाता है.

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मदरसों में फैमिली भर्ती का बड़ा खुलासा! (प्रतीकात्मक तस्वीर)
मदरसों में फैमिली भर्ती का बड़ा खुलासा! (प्रतीकात्मक तस्वीर)

कहीं ससुर के बाद 5 दामादों की न‍ियुक्ति‍ तो कहीं बहू-बेटे को पद द‍िए गए. दरअसल यूपी के सहायता प्राप्त मदरसों में सरकारी फंड से चल रही फैमिली भर्ती का कुछ ऐसा ही खुलासा हुआ है. नियमों को चकमा देने के लिए पहले प्रबंधक इस्तीफा देता है, फिर पत्नी, बेटे, दामाद और रिश्तेदारों की नियुक्ति कर दोबारा कुर्सी संभाल लेता है.

1100 करोड़ के सरकारी अनुदान पर कुछ परिवारों का कब्जा होने के आरोप.जिसकी शिकायत शिकायतकर्ता तल्हा अंसारी ने NHRC से किया जिसके बाद NHRC ने यूपी चीफ सेक्रेटरी को नोटिस भेजकर जवाब भी मांगा जिसके बाद खुलासा हुआ कि बाराबंकी, जौनपुर, बस्ती और कुशीनगर के मदरसों में एक ही परिवार के कई सदस्य सरकारी वेतन लेते मिले. ब्रिटेन और दुबई में रहने वाले लोगों तक को ड्यूटी पर दिखाकर वेतन निकालने का दावा. 

मदरसे शिक्षा केंद्र हैं या फैमिली कंपनी?

यह खुलासा अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था में बड़े भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन की तरफ इशारा करता है. उत्तर प्रदेश के सहायता प्राप्त मदरसों में भाई-भतीजावाद और वंशवाद चरम पर है. मदरसा विनियमावली 2016 में स्पष्ट प्रावधान है कि मदरसा प्रबंधन अपने परिवार के सदस्यों की नियुक्ति नहीं करेगा. इसके बावजूद संबंधित प्रबंधक नियमों को दरकिनार करने के लिए पहले औपचारिक रूप से इस्तीफा दे देता है, अपने स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को प्रबंधक नियुक्त कर देता है और परिवार के सदस्यों की नियुक्ति होने के बाद पुनः स्वयं प्रबंधक बन जाता है.

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इस प्रकार मदरसा विनियमावली के प्रावधानों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और प्रशासन को गुमराह कर भाई-भतीजावाद एवं वंशवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है. उत्तर प्रदेश के सहायता प्राप्त मदरसों में प्रबंधन से लेकर सरकारी शिक्षक और कर्मचारी तक एक ही परिवार की सीमाओं में सिमट गए हैं.

बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार सहायता प्राप्त मदरसों के लिए प्रतिवर्ष लगभग 1100 करोड़ रुपये का अनुदान देती है, लेकिन यह राशि कुछ चुनिंदा परिवारों के बीच ही बंटकर रह जाती है. यह प्रदेश की 5 करोड़ से अधिक अल्पसंख्यक आबादी के मानवाधिकारों का भी खुला उल्लंघन है. नीचे कुछ मदरसों के उदाहरण दिए जा रहे हैं, जो इस व्याप्त भाई-भतीजावाद और वंशवाद की तस्वीर पेश करते हैं. 


उदाहरण 1:  मदरसा जामिया मदीनतुल उलूम, रसौली, जनपद बाराबंकी
1. प्रबंधक- अयाज अहमद (पति)
2. सरकारी शिक्षिका- जेबा बानो (प्रबंधक की पत्नी)
3. सरकारी शिक्षक-मोहम्मद शब्बीर (प्रबंधक के साले/रिश्तेदार)

इस मामले में हुआ ये कि अपनी पत्नी जेबा बानो और रिश्तेदार मोहम्मद शब्बीर की नियुक्ति के समय प्रबंधक अयाज अहमद ने अपने चाचा इसरार अहमद को प्रबंधक बना दिया. नियुक्तियां पूरी होते ही वह पुनः स्वयं प्रबंधक बन गए.

उदाहरण 2: मदरसा रियाजुल उलूम, मछलीशहर, जनपद जौनपुर

1. सरकारी प्रधानाचार्य- महजबी बेगम (पत्नी)
2. पूर्व प्रबंधक/वर्तमान सरकारी शिक्षक- बकरिदू खान उर्फ इमरान (प्रधानाचार्या के पति)
3. सरकारी शिक्षक- फैजान अहमद (प्रधानाचार्या का पुत्र)
4. सरकारी शिक्षक- रिजवान अहमद (प्रधानाचार्या का पुत्र)
5. सरकारी क्लर्क- महमूद आलम (प्रधानाचार्या के रिश्तेदार)
6. फरहत अंजुम (प्रधानाचार्या की रिश्तेदार)
7. तहसीन बानो (प्रधानाचार्या की रिश्तेदार)

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इस केस में प्रधानाचार्या महजबी बेगम तथा उनके दोनों पुत्र फैजान अहमद और रिजवान अहमद की नियुक्ति एक ही दिन हुई. इससे बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की आशंका उजागर होती है.

उदाहरण 3: मदरसा अहले सुन्नत फैजुन्नबी, कप्तानगंज, बस्ती
1. प्रबंधक- मुनीर अली (ससुर)
2. सरकारी शिक्षक- प्रबंधक के 5 दामाद

यहां अपने पांच दामादों की नियुक्ति के समय प्रबंधक मुनीर अली ने पद से इस्तीफा दे दिया था. नियुक्तियां पूरी होने के बाद वह पुनः प्रबंधक बन गए. इस प्रकार नियमों में हेरफेर कर प्रशासन को गुमराह किया गया और सरकारी धन की खुली लूट की गई.

उदाहरण 4 – मदरसा अब्रे रहमत, मझगवां कला, जनपद जौनपुर
1. प्रबंधक- बाबर कुरैशी (ससुर)
2. सरकारी क्लर्क- अफसू बानो (प्रबंधक की बहू)

उदाहरण 5: मदरसा जामियतुल फलाह, बदमपुर अलियाबाद, जनपद बाराबंकी
1. प्रबंधक- अफसरी फहीम (माता)
2. सरकारी शिक्षक- मोहम्मद काशिफ उमैर (प्रबंधक का पुत्र)
3. सरकारी शिक्षक- मोहम्मद आमिर (प्रबंधक का पुत्र)

इस मामले में आजमगढ़ के मुबारकपुर स्थित मदरसा अशरफिया में शिक्षक रहे शम्सुल हुडा खान वर्ष 2007 से ब्रिटेन में रह रहे थे और वहां की नागरिकता भी ले चुके थे. इसके बावजूद भारत में वर्ष 2017 तक उनका वेतन और वेतनवृद्धि जारी रही.

अप्रैल 2026 में कुशीनगर के ‘मदरसा मोहम्मदिया फैज़े रसूल’ में एक बड़ा घोटाला सामने आया. यहां शिक्षिका तालीमुन निशा दो महीने तक दुबई में थीं, लेकिन कागज़ों में उन्हें ‘ड्यूटी पर’ दिखाकर सरकारी वेतन निकाला जाता रहा. उक्त शिक्षिका मदरसे के प्रबंधक की पुत्री हैं. मदरसे में एक ही परिवार के छह सदस्य नियुक्त हैं.

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मदरसा बोर्ड डिप्टी डायरेक्टर सोन कुमार के मुताबिक इस मामले में जांच की जा रही है. इसमें कई ऐसे मदरसे हैं जिनके प्रबंधक इस्तीफा देने के बाद दूसरा प्रबंधन उनके रिश्तेदारों को रख लेता है इस टेक्निकल ग्राउंड पर नियुक्ति की जाती है 2024 की नियमावली के बाद कोई भी नई नियुक्ति नहीं की गई है 2016 नियमावली में ब्लड रिलेशन और 24 की नियुक्ति में साफ तौर से ब्लड रिलेशन को मनाए ही है इसके इसके बावजूद अगर इस तरीके से हैं तो जो भी एनएचआरसी के लेटर आते हैं उन पर जांच होती है और टीम गठित करके डीएम स्तर पर भी कार्रवाई की जाती है.

इस पूरे मामले की शिकायतकर्ता जिन्होंने NHRC में शिकायत दर्ज करवाई है . तल्हा अंसारी ने बताया कि उन्होंने NHRC से शिकायत की जिसमें सभी मदरसों को डिटेल में भेजा गया उसके बाद NHRCH ने चीफ सेक्रेटरी को नोटिस भेजकर जवाब भी मांगा है जिससे अब जांच की जा रही है .और आगे की कार्यवाही की जाएगी. ये मदरसे काफी समय से चला रहे है और अपने रिश्तेदारों को ब्लड रिलेशन को आगे बढ़ा रहे है और इस्तीफा देकर फिर ज्वाइन कर लेते जिससे टेक्निकल ग्राउंड मजबूर रहे और अब शिकायत के बाद कार्यवाही की जा रही है.

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