scorecardresearch
 

क्र‍िकेटर रिंकू सिंह को बेसिक श‍िक्षा अध‍िकारी क्यों नहीं बनाया गया? फिर मिला RSO का पद, क्या है पूरा व‍िवाद 

उत्तर प्रदेश के क्रिकेटर रिंकू सिंह को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्षेत्रीय खेल अधिकारी (RSO) के पद पर नियुक्त किया है. पहले उन्हें बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) बनाने की योजना थी, लेकिन व‍िवादों के चलते ये नियुक्ति रद्द हो गई. रिंकू के संघर्ष और सफलता की कहानी प्रेरणादायक है, जो एक सामान्य परिवार से उठकर सरकारी अफसर बने. आइए समझते हैं पूरी कहानी...

Advertisement
X
 BSA बनते-बनते कैसे रह गए और अब RSO बनकर क्या करेंगे रिंकू सिंह
BSA बनते-बनते कैसे रह गए और अब RSO बनकर क्या करेंगे रिंकू सिंह

उत्तर प्रदेश के लाल और टीम इंडिया के स्टार क्रिकेटर रिंकू सिंह आज सिर्फ अपनी बल्लेबाजी के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी नई सरकारी नौकरी को लेकर भी चर्चा में हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रिंकू सिंह को RSO (क्षेत्रीय खेल अधिकारी) के पद पर नियुक्ति दी है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रिंकू को पहले शिक्षा विभाग में BSA (जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी) बनाने की तैयारी थी? आखिर क्यों उस वक्त उनकी नौकरी पर ब्रेक लगा और अब जो पद मिला है, वह पहले वाले से कितना अलग है? आइए आसान भाषा में समझते हैं.

BSA वाली नौकरी पर क्यों हुआ था 'खटराग'?
बात जनवरी 2025 की है. यूपी सरकार ने अपनी विशेष नियमावली के तहत रिंकू सिंह को खेल कोटे से बेसिक शिक्षा विभाग में BSA बनाने का मन बनाया था. रिंकू को पोर्टल पर अपने दस्तावेज (डॉक्यूमेंट्स) अपलोड करने को भी कहा गया. लेकिन जैसे ही यह खबर बाहर आई, विवाद शुरू हो गया.

विवाद की जड़ थी 'शैक्षिक योग्यता'. रिंकू के भाई सोनू सिंह बताते हैं कि रिंकू का मन शुरू से ही किताबों से ज्यादा मैदान पर लगता था और उन्होंने ओपन स्कूल से 10वीं पास की है. वहीं, BSA जैसे प्रशासनिक पद के लिए ऊंची डिग्री और विशेष योग्यता की जरूरत होती है. इसी वजह से उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई थी. अब सरकार ने रास्ता निकालते हुए उन्हें उनके अपने क्षेत्र यानी 'खेल विभाग' में ही बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है.

Advertisement

BSA और RSO में क्या है अंतर?
कई लोग उलझन में हैं कि रिंकू पहले क्या बनने वाले थे और अब क्या बन गए हैं. इसे ऐसे समझिए:

BSA (ड‍िस्ट्रिक बेस‍िक एजुकेशन ऑफ‍िसर): यह शिक्षा विभाग का एक बड़ा प्रशासनिक पद है. एक BSA के कंधों पर जिले के सभी प्राइमरी और जूनियर स्कूलों की जिम्मेदारी होती है. शिक्षकों की भर्ती, स्कूलों का निरीक्षण और मिड-डे मील जैसी व्यवस्थाएं देखना इनका काम होता है. इसके लिए कड़े प्रशासनिक अनुभव और डिग्री की जरूरत होती है.

यह भी पढ़ें: 5 भाई-1 बहन और पिता थे गैस हॉकर... 10वीं पास रिंकू सिंह बनेंगे सरकारी अफसर, भाई ने सुनाई संघर्ष की कहानी

RSO (रीजनल स्पोर्ट्स ऑफ‍िसर): यह खेल विभाग का राजपत्रित (गैजेटेड) पद है. रिंकू अब 'क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी' के रूप में अपने इलाके के खेल स्टेडियम, खेल सुविधाओं और नए खिलाड़ियों को निखारने का काम देखेंगे. रिंकू के लिए यह पद ज्यादा मुफीद है क्योंकि वे खुद एक खिलाड़ी हैं और खेल की बारीकियों को समझते हैं.

संघर्ष से 'अफसर' बनने तक का सफर
रिंकू की कहानी किसी को भी भावुक कर सकती है. अलीगढ़ के रहने वाले रिंकू के पिता खानचंद सिंह घर-घर गैस सिलेंडर पहुंचाते थे. पांच भाइयों के परिवार में इतनी तंगी थी कि एक वक्त रिंकू को कोचिंग सेंटर में 'सफाई कर्मचारी' की नौकरी का ऑफर मिला था. लेकिन रिंकू ने हार नहीं मानी.

Advertisement

उनके भाई सोनू सिंह कहते हैं कि जो सपना मैं पूरा नहीं कर सका, छोटे भाई ने उसे जी कर दिखा दिया. भले ही रिंकू आज अपरिहार्य कारणों से लखनऊ के समारोह में नहीं पहुंच सके, लेकिन उनके घर में जश्न का माहौल है क्योंकि एक गैस हॉकर का बेटा अब सरकारी 'अफसर' बन चुका है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement