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संसदीय समिति ने CUET पर फिर उठाए सवाल, परीक्षा के डिजाइन को रिव्यू करने की मांग की

संसदीय समिति की ओर से कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) को लेकर कई गंभीर चिताएं उठाई गई हैं. कमेटी का कहना है कि बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) वाला फॉर्मेट ह्यूमैनिटीज और सोशल साइंसेज जैसे विषयों के लिए सही नहीं है. इसके साथ ही समिति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए परीक्षा के डिजाइन और प्रश्नों की गुणवत्ता की समीक्षा करने की मांग की है. 

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Parliamentary Panel On CUET Exam 2026
Parliamentary Panel On CUET Exam 2026

कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) को लेकर एक बड़ी खबर आ रही है. संसद की एक स्थायी समिति ने CUET परीक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. कमेटी का साफ कहना है कि हर विषय को एक ही तराजू में नहीं तोला जा सकता. खासकर ह्यूमैनिटीज और सोशल साइंसेज जैसे विषयों के लिए मल्टिपल चॉइस क्वेश्चन (MCQ) वाला फॉर्मेट बिल्कुल भी सही नहीं है. समिति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के विजन का हवाला देते हुए इस एंट्रेंस एग्जाम के पूरे डिजाइन और क्वेश्चन पेपर की क्वालिटी की दोबारा रिव्यू करने की मांग की है.

राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने पाया कि CUET को 2022-23 एकेडमिक ईयर से इसलिए शुरू किया गया था ताकि छात्रों, यूनिवर्सिटीज और पूरी शिक्षा व्यवस्था पर बोझ कम किया जा सके और अलग-अलग बोर्ड से पास होने वाले उम्मीदवारों को एक समान स्तर पर लाया जा सके. हालांकि, समिति के कुछ सदस्य अंडरग्रेजुएट पढ़ाई के लिए CUET को एडमिशन के यूनिवर्सल तरीके के तौर पर लागू करने के फायदों से सहमत नहीं हैं. समिति ने मंगलवार को राज्यसभा चेयरमैन सीपी राधाकृष्णन को सौंपी अपनी रिपोर्ट में यह बात कही. 

क्या कहा गया है रिपोर्ट में? 

यह हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट से जुड़ी ग्रांट्स की मांगों (2025-26) पर 364वीं रिपोर्ट में दी गई सिफारिशों पर एक्शन टेकन रिपोर्ट थी, जो 381वीं रिपोर्ट है. इस दौरान रिपोर्ट में कहा गया है कि मल्टीपल-चॉइस सवाल (MCQ) के जवाब ह्यूमैनिटीज और सोशल साइंसेज जैसे विषयों के लिए ठीक नहीं है क्योंकि ये विषय आजाद और व्यक्तिगत सोच पर आधारित होते हैं.

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रिपोर्ट में आगे कहा गया कि कमेटी सलाह देती है कि CUET परीक्षा के सवाल-पत्र की क्वालिटी और उसके डिजाइन की समीक्षा की जाए ताकि यह पक्का किया जा सके कि यह NEP, 2020 के मकसद को पूरा करती है. कमेटी ने यह भी देखा कि CUET के एकमात्र प्रवेश परीक्षा होने के अपने फायदे हैं, लेकिन यह जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी जैसी यूनिवर्सिटीज़ को जिनके अपने खास कानूनी नियम हैं, उनकी खास जरूरतों को पूरा करने की इजाजत नहीं देता है. इसे लेकर कमेटी ने कहा कि वह इस मामले पर आगे और विचार करने का फैसला करती है. 

JNU के परीक्षा व्यवस्था पर भी हुई बात 

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि JNU की परीक्षा व्यवस्था इस तरह से बनाई गई थी ताकि यह पक्का किया जा सके कि यूनिवर्सिटी अपने एडमिशन में JNU एक्ट के तहत जरूरी सामाजिक-आर्थिक और क्षेत्रीय विविधता और प्रतिनिधित्व के मानदंडों को पूरा कर सके. सरकार ने अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट में कहा कि कमिटी की बातों पर ठीक से ध्यान दिया गया है और यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की जरूरी सलाह दी गई है. 

इसमें कहा गया है कि CUET सेंट्रल यूनिवर्सिटीज और इसमें शामिल होने वाले संस्थानों में एडमिशन के लिए आयोजित किया जा रहा है. यह एक ही एप्लीकेशन विंडो देता है, जिससे छात्र एक बार अप्लाई करके कई यूनिवर्सिटीज में एडमिशन के लिए एक ही परीक्षा में शामिल हो सकते हैं. इसमें यह भी कहा गया है कि CUET दो साल के अंदर भारत की दूसरी सबसे बड़ी परीक्षा बनकर उभरा है, जिसमें 2025 में 13,54,699 उम्मीदवार शामिल हुए.

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रिपोर्ट में बताया गया है कि CUET(UG) के स्ट्रक्चर को पहले तीन एडिशन के अनुभव के आधार पर बेहतर बनाया गया है. CUET(UG) 2025 में 37 विषयों में परीक्षा आयोजित की गई और इसके नतीजे 2024 की तुलना में 2025 में तीन हफ्ते से पहले ही घोषित कर दिए गए हैं. 

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