देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी 2026 को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परीक्षा को रद्द कर दिया है. परीक्षा रद्द होने के पीछे पेपर लीक का मामला बताया जा रहा है. जानकारी के अनुसार परीक्षा से एक दिन पहले ही प्रश्नपत्र लीक होने के सबूत एनटीए को मिले, जिसके बाद एजेंसी ने तत्काल प्रभाव से परीक्षा निरस्त करने का निर्णय लिया.
एनटीए के मुताबिक इस बार नीट यूजी परीक्षा में करीब 22 लाख छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे. परीक्षा देशभर के विभिन्न राज्यों में बनाए गए परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई थी. परीक्षा संपन्न होने के बाद सोशल मीडिया और कई मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर पेपर वायरल होने की शिकायतें सामने आई थीं. शुरुआती जांच में कुछ सवाल परीक्षा के वास्तविक प्रश्नपत्र से मेल खाते पाए गए, जिसके बाद मामला गंभीर हो गया.
मनीष यादव और अविनाश लांबा हैं मास्टरमाइंड
पेपर लीक मामले में मनीष यादव और अविनाश लांबा नाम के दो लोगों को मुख्य सरगना माना जा रहा है. हालांकि जांच एजेंसियों ने अभी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की है. बताया जा रहा है कि दोनों आरोपियों के नेटवर्क के जरिए प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले कुछ लोगों तक पहुंचाया गया था. मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) टीम जांच में जुटी हुई है.
एसओजी टीम इस बात की पड़ताल कर रही है कि आखिर पेपर लीक कैसे हुआ. जांच एजेंसियों को शक है कि प्रश्नपत्र प्रिंटिंग प्रक्रिया के दौरान लीक किया गया हो सकता है. वहीं यह भी संभावना जताई जा रही है कि पेपर सेट करने या सुरक्षित रखने से जुड़े किसी व्यक्ति ने जानकारी आरोपियों तक पहुंचाई हो. फिलहाल कई संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है और डिजिटल साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं.
केंद्र सरकार ने मामले को बेहद गंभीर मानते हुए इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने का फैसला लिया है. सीबीआई अब पूरे नेटवर्क, आर्थिक लेनदेन और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगी. इधर परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों में नाराजगी है. साथ ही पैरेंट्स भी चिंतित हैं. जबकि एनटीए के सामने फिर से परीक्षा आयोजित करने और समय पर रिजल्ट जारी करने का दबाव है. क्योंकि अगर एग्जाम में देरी हुई और रिजल्ट देर से जारी किया गया तो छात्रों का अकादमिक सत्र भी पिछड़ जाएगा.
केरल से सीकर आया नीट का गेस पेपर, 720 नंबर के प्रश्नों में से 600 नंबर के सवाल हूबहू
नीट परीक्षा 3 मई को आयोजित हुई थी. राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप की जांच में संकेत मिले हैं कि परीक्षा के कुल 720 नंबर के सवालों में से करीब 600 नंबर के सवाल दो दिन पहले ही सीकर में छात्रों तक पहुंच चुके थे. बड़ी बात है कि नीट परीक्षा में पूछे सवालों के उत्तर के ऑप्शन भी गेस पेपर के प्रश्नों के क्रमों में हैं. सूत्रों के अनुसार पहले दिन पांच-पांच लाख में गेस पेपर बिके. जबकि परीक्षा के एक रात पहले 30-30 हजार में गेस पेपर बेचा गया. एसओजी का कहना है कि हिरासत में लिए गए लोगों के मोबाइल में मेनी टाईम फॉरवार्डेड का ऑप्शन आ रहा है यानी ये बहुत लोगों तक पहुंचा है.
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, कथित ‘क्वेश्चन बैंक’ का लिंक चूरू के एक युवक से जुड़ रहा है, जो फिलहाल केरल के एक मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है. बताया जा रहा है कि उसने 1 मई को यह सामग्री सीकर में अपने एक दोस्त को भेजी थी. इसके बाद यह दस्तावेज एक पीजी संचालक तक पहुंचा और फिर वहां रहने वाले छात्रों, करियर काउंसलर्स और अन्य अभ्यर्थियों के बीच तेजी से फैलता चला गया. एसओजी अब इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हुई है.
एसओजी सोशल मीडिया चैट, कॉल डिटेल्स और इंस्टेंट मैसेजिंग एप्स के जरिए जुड़े हर लिंक को खंगाल रही है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह केवल एक ‘गेस पेपर’ था या फिर वास्तव में परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र का हिस्सा लीक हुआ था. जांच एजेंसियां फिलहाल इसी कड़ी को जोड़ने में लगी हैं. सूत्रों के अनुसार, छात्रों तक पहुंचे इस कथित ‘क्वेश्चन बैंक’ में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के 300 से अधिक सवाल शामिल थे. सभी सवाल हाथ से लिखे हुए बताए जा रहे हैं और हैंडराइटिंग भी एक जैसी पाई गई है.
चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से करीब 140 सवाल हूबहू परीक्षा में पूछे गए. चूंकि नीट में हर सवाल 4 अंक का होता है, ऐसे में लगभग 600 नंबर के प्रश्न उसी कथित बैंक से आने की बात सामने आ रही है. ऐसे में किसी गेस पेपर से कुछ सवाल मैच होना सामान्य बात हो सकती है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में प्रश्नों का मिलना बेहद असामान्य माना जाता है. खासतौर पर उस परीक्षा में, जहां एक-एक अंक रैंक और मेडिकल कॉलेज तय करता है.