scorecardresearch
 

तेहरान में तबाही की आहट! क्यों इस एक यूनिवर्सिटी के वजूद के लिए दुआएं मांग रहा है पूरा ईरान?

शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी का नाम पूरी दुनिया में बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है. भले ही QS वर्ल्ड रैंकिंग जैसे पैमानों पर इसे हमेशा वह जगह न मिले, लेकिन इसकी साख ऐसी है कि भारत के दिग्गज IIT (Indian Institutes of Technology) भी इससे मुकाबला करने में पसीने छोड़ देते हैं. जानकारों का मानना है कि यह संस्थान ग्लोबल लेवल के इंजीनियर तैयार करने के लिए ही बना है.

Advertisement
X
मोहम्मद अली मोजतहेदी और आर्यमेहर यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (शरीफ यूनिवर्सिटी) के साइंटिफिक बोर्ड के सदस्य, 1967. (फोटो: विकिपीडिया)
मोहम्मद अली मोजतहेदी और आर्यमेहर यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (शरीफ यूनिवर्सिटी) के साइंटिफिक बोर्ड के सदस्य, 1967. (फोटो: विकिपीडिया)

इसे दुनिया 'मिडल ईस्ट का MIT' कहती है. ईरान के दिल में बसी शरीफ यूनिवर्सिटी (Sharif University) ने इंजीनियरों की ऐसी फौज तैयार की है, जो आज पूरी दुनिया की इंडस्ट्रीज को दिशा दे रही है. इस यूनिवर्सिटी की साख सिर्फ इसकी पढ़ाई या रिसर्च से नहीं, बल्कि समस्याओं को सुलझाने और इनोवेशन के उस जज्बे से बनी है, जो यहां की रग-रग में बसा है.

लेकिन आज मंजर कुछ और है. 27 फरवरी की शाम, जब मिडल ईस्ट के आसमान में अमेरिकी और इजरायली लड़ाकू विमान आग उगल रहे थे और तेहरान मिसाइल हमलों से दहल रहा था, तब ईरान का यह महान शिक्षा संस्थान भी तबाही के खौफ में था. लोगों को डर सिर्फ इमारतों के गिरने का नहीं है, बल्कि फिक्र इस बात की है कि अगर यह संस्थान तबाह हुआ, तो ईरान में इंजीनियरिंग के भविष्य का क्या होगा?

IIT से भी कठिन है मुकाबला!

शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी का नाम पूरी दुनिया में बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है. भले ही QS वर्ल्ड रैंकिंग जैसे पैमानों पर इसे हमेशा वह जगह न मिले, लेकिन इसकी साख ऐसी है कि भारत के दिग्गज IIT (Indian Institutes of Technology) भी इससे मुकाबला करने में पसीने छोड़ देते हैं. जानकारों का मानना है कि यह संस्थान ग्लोबल लेवल के इंजीनियर तैयार करने के लिए ही बना है.

Advertisement

हकीकत तो यह है कि आज ईरान के पास जो मिसाइल तकनीक और ड्रोन पावर (Drone Warfare) है, उसका बहुत बड़ा श्रेय शरीफ यूनिवर्सिटी को जाता है. 1960 के दशक से ही इस यूनिवर्सिटी ने ईरान को तकनीकी रूप से आधुनिक बनाने की नींव रखी थी.

इंजीनियरिंग का वो गढ़, जिसका लोहा मानता है सिलिकॉन वैली

ईरान में इंजीनियरिंग की यह चमक रातों-रात नहीं आई. यहां की नेशनल एंट्रेंस परीक्षा इतनी कठिन होती है कि उसे पास करना दुनिया के सबसे मुश्किल इम्तिहानों में से एक माना जाता है.

सख्त सिलेक्शन: लाखों उम्मीदवारों में से सिर्फ टॉप 1% छात्रों को ही यहां दाखिला मिलता है.

ग्लोबल दबदबा: आज गूगल, फेसबुक और एप्पल जैसी दिग्गज टेक कंपनियों में ऊंचे पदों पर बैठे कई ईरानी इंजीनियर इसी शरीफ यूनिवर्सिटी की देन हैं.

पुरानी विरासत: ईरान ने इंजीनियरिंग का इतना मजबूत ढांचा तब खड़ा कर लिया था, जब दुनिया में 'टेक बूम' की शुरुआत भी नहीं हुई थी.

प्रतिबंधों के बीच 'जुगाड़' नहीं, 'इनोवेशन' से जीता

ईरान की इंजीनियरिंग की सबसे बड़ी परीक्षा तब हुई जब उस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाए गए. विदेशी तकनीक और मशीनों का रास्ता बंद हुआ, तो यहां के इंजीनियरों ने हार मानने के बजाय खुद के रास्ते बनाए.

उन्होंने खुद के सॉफ्टवेयर, मेडिकल डिवाइस और सैटेलाइट तैयार किए. 1979 के बाद से ईरान ने करीब 130 बांध बनाए और पानी का विशाल नेटवर्क खड़ा किया. 

Advertisement

कैंसर के इलाज में काम आने वाली एडवांस दवाओं से लेकर डिफेंस टेक्नोलॉजी तक, ईरान आज आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रहा है.

Wikipedia education workshop in Sharif university 2019 by Mardetanha.

लैब में महिलाओं का बढ़ता दम

ईरान की वैज्ञानिक तरक्की की एक और तस्वीर यहां की लैब्स में दिखती है. हाल के दशकों में रोबोटिक्स, नैनोटेक्नोलॉजी और एयरोस्पेस जैसे मुश्किल क्षेत्रों में महिला रिसर्चर्स की संख्या तेजी से बढ़ी है. शरीफ यूनिवर्सिटी की प्रयोगशालाओं में आज महिलाएं कंधे से कंधा मिलाकर सबसे चुनौतीपूर्ण तकनीकों पर काम कर रही हैं.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement